यूपी में आयुष शिक्षा को मिलेगा बड़ा बूस्ट, योगी सरकार बनाने जा रही 5 नए मेडिकल कॉलेज

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र को और मजबूत बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। राज्य में पांच नए एकीकृत आयुष चिकित्सालय और महाविद्यालय स्थापित किए जाएंगे। ये महाविद्यालय गोंडा, मीरजापुर, मेरठ, आगरा और बस्ती मंडलों में बनाए जाएंगे। इस पहल से प्रदेश में पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को बढ़ावा मिलेगा और गुणवत्तापूर्ण आयुष शिक्षा तथा स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार होगा।योगी सरकार का यह कदम आधुनिक चिकित्सा के साथ-साथ भारत की प्राचीन चिकित्सा विरासत को मजबूत करने की दिशा में उठाया गया है।

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उपलब्ध होंगी अच्छी स्वास्थ्य सेवाएं

इन नए महाविद्यालयों में आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी जैसी पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों की शिक्षा दी जाएगी। साथ ही आधुनिक स्वास्थ्य विज्ञान, प्रयोगशालाओं और क्लिनिकल ट्रेनिंग को भी शामिल किया जाएगा। इससे युवाओं को बेहतर शिक्षा मिलेगी और स्थानीय स्तर पर अच्छी स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

UP Ayush Medical College

प्रमुख सचिव आयुष रंजन कुमार ने बताया कि सीएम योगी आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के साथ-साथ देश की पारंपरिक चिकित्सा विरासत को भी मजबूत करने पर जोर दे रहे हैं, ताकि प्रदेश के लोगों को सुरक्षित, सस्ती और प्रभावी स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।

पांच नए एकीकृत आयुष महाविद्यालयों के लिए पांच मंडलों में जमीन का चयन कर लिया गया है। गोंडा के देवीपाटन मंडल में वजीरगंज विकास खंड के ग्राम कोडर में करीब 14.82 एकड़ भूमि, मीरजापुर मंडल में सदर तहसील के ग्राम अकोढ़ी में 13.83 एकड़ भूमि, मेरठ मंडल के गाजियाबाद मोदीनगर तहसील के ग्राम सैदपुर हुसैनपुर डलना में 11 एकड़ भूमि, आगरा मंडल में किरावली तहसील के ग्राम अकबरा में 13.5 एकड़ भूमि और बस्ती मंडल में हर्रैया तहसील के ग्राम जोगापुर में 15 एकड़ भूमि इन महाविद्यालयों के लिए चुनी गई है। इनमें से चार मंडलों में भूमि पहले से ही आयुष विभाग के नाम दर्ज है जबकि बस्ती में भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया अंतिम चरण में है।

तैयार किया जा रहा नक्शा

उत्तर प्रदेश के आयुष महानिदेशक एवं मिशन निदेशक चैत्रा वी ने बताया कि सभी पांच मंडलों में महाविद्यालयों के लिए जमीन उपलब्ध हो गई है। फिलहाल राजकीय एकीकृत आयुष महाविद्यालय एवं चिकित्सालय का नक्शा तैयार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि, ये नए महाविद्यालय केवल शिक्षा संस्थान नहीं होंगे बल्कि रिसर्च और इनोवेशन के केंद्र के रूप में भी विकसित किए जाएंगे। यहां आयुर्वेदिक औषधियों, योग चिकित्सा, जीवनशैली आधारित उपचार और विभिन्न पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों पर अनुसंधान को प्रोत्साहित किया जाएगा।

नए आयुष महाविद्यालयों की स्थापना से प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों के विद्यार्थियों को अपने ही मंडल में उच्च स्तरीय चिकित्सा शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। इससे दूर-दराज के छात्रों को बड़े शहरों की ओर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इन महाविद्यालयों में आधुनिक प्रयोगशालाएं, चिकित्सालय, अनुसंधान सुविधाएं, पंचकर्मा केंद्र, योग थेरपी यूनिट और हर्बल गार्डन जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इस पहल से प्रदेश में आयुष चिकित्सा का दायरा काफी बढ़ेगा।

मजबूत होगी अर्थव्यवस्था 

स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित डॉक्टर्स और पैरामेडिकल स्टाफ तैयार होंगे, जो क्षेत्रीय स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाएंगे। योगी सरकार का मानना है कि, भविष्य में स्वास्थ्य व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए पारंपरिक और आधुनिक चिकित्सा का समन्वय जरूरी है। इन महाविद्यालयों के माध्यम से यही समन्वय हासिल किया जाएगा।

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नए संस्थानों से सैकड़ों युवाओं को आयुष क्षेत्र में करियर बनाने का मौका मिलेगा। ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध होंगी। साथ ही आयुष दवाओं के उत्पादन, अनुसंधान और मार्केटिंग को भी बढ़ावा मिलेगा। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और चिकित्सा पर्यटन की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।

यह फैसला उत्तर प्रदेश को आयुष स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी बनाने की दिशा में एक ठोस कदम है। सरकार का लक्ष्य है कि हर जिले और मंडल में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हों ताकि आम नागरिक को बेहतर इलाज मिल सके। जमीन चयन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और निर्माण कार्य जल्द शुरू होने की उम्मीद है।

योगी आदित्यनाथ सरकार का यह निर्णय न केवल स्वास्थ्य क्षेत्र को बल देगा बल्कि आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश के निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान देगा। पारंपरिक चिकित्सा को मुख्यधारा में लाकर सरकार प्रदेशवासियों को स्वस्थ और सशक्त बनाने की दिशा में लगातार काम कर रही है।

 

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