
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं के लिए एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) ने राज्य के करोड़ों उपभोक्ताओं को एक तरफ जहां डिजिटल और पारदर्शी बिलिंग की बड़ी सौगात दी है। वहीं दूसरी तरफ बैकडोर से बिजली के बिलों पर 10 प्रतिशत का सरचार्ज लागू कर उपभोक्ताओं की जेब पर भारी बोझ डाल दिया है।
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बिगड़ा आम जनता का बजट
बिजली विभाग के इस दोहरे कदम को लेकर अब पूरे प्रदेश में विवाद और चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। एक ओर नई सुविधाओं के आने से उपभोक्ताओं को विभागीय दफ्तरों के चक्कर काटने से मुक्ति मिलने की उम्मीद जगी है, तो दूसरी ओर बिना किसी शोर-शराबे के बढ़ाए गए सरचार्ज ने आम जनता के बजट को बिगाड़ कर रख दिया है।

उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन ने तकनीकी सुधारों की दिशा में कदम बढ़ाते हुए बिजली के बिलों के प्रारूप को पहले से कहीं अधिक पारदर्शी और उपभोक्ता अनुकूल बना दिया है। विभाग का दावा है कि, इस नए बदलाव के बाद उपभोक्ताओं को मिलने वाले बिजली बिल में हर छोटे-बड़े खर्च और शुल्कों की पूरी तथा स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।
मिल रहीं ये सुविधाएं
अभी तक बिल विवरण को लेकर सही, स्पष्ट और समय पर जानकारी न मिलने के कारण प्रदेश के आम उपभोक्ताओं को भारी मानसिक और व्यावहारिक दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। बिल में गड़बड़ी या अस्पष्टता होने पर उन्हें अपनी शिकायत दर्ज कराने और समाधान पाने के लिए बार-बार बिजली विभाग के दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर होना पड़ता था। उपभोक्ताओं की इसी बड़ी समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए बिजली विभाग ने बिलिंग व्यवस्था में अत्याधुनिक तकनीक का समावेश किया है, जिसके तहत निम्नलिखित सुविधाएं सीधे बिल पर दी जा रही हैं।
QR Code की सुविधा
नए बिल प्रारूप में एक विशेष क्यूआर कोड प्रिंट होकर आएगा। इस कोड को उपभोक्ता अपने स्मार्टफोन से स्कैन करके घर बैठे ही अपना मोबाइल नंबर, व्हाट्सएप नंबर और ईमेल आईडी विभाग के डेटाबेस में तुरंत अपडेट कर सकेंगे।
डिजिटल कनेक्टिविटी
उपभोक्ता अब बिल के माध्यम से ही अपने मोबाइल नंबर और ईमेल को विभागीय रिकॉर्ड के लिए सत्यापित कर सकेंगे, जिससे उन्हें भविष्य में बिल जनरेट होने या भुगतान संबंधी अलर्ट सीधे उनके फोन पर मिल सकें।
6 महीनों की खपत की डिटेल
नए बिल में उपभोक्ताओं के पिछले छह महीनों के दौरान खर्च की गई बिजली और यूनिट रीडिंग का पूरा रिकॉर्ड शामिल रहेगा। इस चार्ट या विवरण की मदद से लोग अपनी बिजली खपत के पुराने और नए पैटर्न को आसानी से समझ सकेंगे और फिजूलखर्ची पर नियंत्रण कर पाएंगे।
अंतिम भुगतान की पूरी डिटेल मिलेगी
उपभोक्ता ने अपना पिछला बिजली बिल कब जमा किया था, कितनी राशि जमा की थी और वह भुगतान किस माध्यम (जैसे- ऑनलाइन, कैश, यूपीआई या चेक) से किया गया था, इसकी पूरी जानकारी भी अब नए बिल पर स्पष्ट रूप से दर्ज होगी।
बिल में लिखी होगी रीडिंग की गणना
उपभोक्ताओं की सबसे बड़ी शिकायत यह रहती थी कि उन्हें पता नहीं चलता था कि उनकी बिजली की गणना किस दर से की गई है। अब नए प्रारूप में यह साफ-साफ दिखेगा कि उपभोक्ता की रीडिंग की गणना किस स्लैब के तहत की जा रही है। इसके अलावा बिल में लगने वाला फिक्स्ड चार्ज या अन्य जो भी अतिरिक्त नियत चार्ज लिए जा रहे हैं, उनका पूरा विवरण अलग से साफ अक्षरों में दिखाई देगा।
पारदर्शिता का भी रखा गया ध्यान
इस बड़े बदलाव के क्रम में पारदर्शिता को इस हद तक बढ़ाया गया है कि यदि किसी उपभोक्ता का बिजली चोरी का कोई मामला या कोई अन्य सतर्कता संबंधी प्रकरण चल रहा है, तो उसका पूरा विवरण और बकाया जुर्माना भी बिल पर पूरी पारदर्शिता के साथ अंकित किया जाएगा।

जहां एक तरफ बिजली विभाग अपनी इन नई सुविधाओं का जमकर प्रचार कर रहा है और इसे उपभोक्ता हित में उठाया गया कदम बता रहा है, वहीं दूसरी तरफ बिजली बिलों में चुपके से जोड़ दिए गए 10 प्रतिशत सरचार्ज ने उपभोक्ताओं को तगड़ा झटका दिया है। जानकारी के अनुसार, बिजली विभाग की ओर से जारी किए जा रहे नए बिल अब इसी 10 फीसदी अतिरिक्त सरचार्ज को जोड़कर बनाए जा रहे हैं।
विद्युत नियामक आयोग ने बताया गलत
चौंकाने वाली बात यह है कि बीते दिनों उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने इस 10 प्रतिशत सरचार्ज को पूरी तरह से गलत और नियमों के विरुद्ध बताया था। नियामक आयोग के इस कड़े रुख के बाद आम जनता और विशेषज्ञों को यह पूरी उम्मीद थी कि, इस बार बिजली के बिलों में किसी भी प्रकार की बढ़ोतरी नहीं होगी और उपभोक्ताओं को महंगाई से राहत मिलेगी, लेकिन, धरातल पर स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत नजर आ रही है। नियामक आयोग की आपत्तियों और निर्देशों को दरकिनार करते हुए पावर कॉरपोरेशन ने उपभोक्ताओं के बिलों में इस सरचार्ज को जोड़ना जारी रखा है।
आयोग ने की कड़ी टिप्पणी
उत्तर प्रदेश राज्य उपभोक्ता परिषद ने बिजली बिलों के साथ इस अवैध सरचार्ज को न हटाए जाने और इसे जनता पर थोपे जाने का बेहद कड़ा विरोध दर्ज कराया है। यूपी राज्य उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा की मानें तो, 1 जून को विद्युत नियामक आयोग द्वारा इस सरचार्ज पर कड़ी टिप्पणी किए जाने से पहले ही उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड की आधिकारिक वेबसाइट पर 10 प्रतिशत सरचार्ज लागू करने को लेकर अपडेट कर दिया गया था।
सबसे गंभीर बात यह है कि आयोग की स्पष्ट हिदायत और टिप्पणी के बाद भी इस अपडेट को वेबसाइट से अब तक नहीं हटाया गया है, और इसी बढ़े हुए आधार पर उपभोक्ताओं के वर्तमान बिल धड़ल्ले से तैयार किए जा रहे हैं।
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