पाकिस्तान का नया दांव: अब प्रवासियों की जेब से जुटाएगा डॉलर

नई दिल्ली। विदेशी मुद्रा भंडार की कमी, लगातार आर्थिक अस्थिरता और बढ़ते वित्तीय दबाव से जूझ रहे पाकिस्तान ने अब अपने ही नागरिकों की विदेशी कमाई को देश की अर्थव्यवस्था में लाने के लिए एक नया रणनीतिक कदम उठाया है। पाकिस्तान सरकार और उसका केंद्रीय बैंक स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान (SBP) खाड़ी देशों में काम कर रहे लाखों पाकिस्तानी प्रवासियों की बचत को सीधे देश में आकर्षित करने की कोशिश कर रहा है। इसके लिए ‘नया पाकिस्तान सर्टिफिकेट’ स्कीम का दायरा बढ़ा दिया गया है।

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सीधे निवेश की सुविधा

अब संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की मुद्रा दिरहम और सऊदी अरब की मुद्रा रियाल में भी सीधे निवेश की सुविधा उपलब्ध करा दी गई है। यह व्यवस्था 1 जून से लागू हो चुकी है। यह योजना पाकिस्तान की सरकार के लिए एक महत्वपूर्ण दांव मानी जा रही है। वर्षों से विदेशी मुद्रा की कमी, आयात-निर्यात असंतुलन, कर्ज के बोझ और मुद्रास्फीति जैसी समस्याओं से घिरे पाकिस्तान के लिए प्रवासी पाकिस्तानियों की भूमिका हमेशा से महत्वपूर्ण रही है। सरकार का मानना है कि, यदि इन प्रवासियों की कमाई औपचारिक चैनलों के माध्यम से देश में निवेश के रूप में आए तो न केवल विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत होंगे, बल्कि अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलेगी।

 निवेशकों को होता था नुकसान

पहले खाड़ी देशों में रहने वाले पाकिस्तानी नागरिकों को इस स्कीम में निवेश करने के लिए अपनी कमाई को पहले अमेरिकी डॉलर या पाकिस्तानी रुपये में बदलना पड़ता था। इस प्रक्रिया में मुद्रा विनिमय दर का जोखिम उठाना पड़ता था, जिससे कई बार निवेशकों को नुकसान का सामना करना पड़ता।

Pakistan NPC Scheme

उदाहरण के लिए, अगर दिरहम या रियाल की तुलना में डॉलर मजबूत होता तो रूपांतरण के समय मूलधन कम हो जाता। अब नई व्यवस्था के तहत यूएई में काम करने वाले पाकिस्तानी सीधे दिरहम में और सऊदी अरब में रहने वाले अपने साथी नागरिक रियाल में निवेश कर सकेंगे। यानी जिस मुद्रा में वे रोज कमाते हैं, उसी मुद्रा में बिना किसी रूपांतरण के निवेश संभव हो गया है। इससे न केवल मुद्रा विनिमय का जोखिम खत्म होता है, बल्कि निवेश की प्रक्रिया भी आसान और आकर्षक बन गई है।  सरकार को उम्मीद है कि, यह सुविधा बड़ी संख्या में प्रवासियों को आकर्षित करेगी और पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

 आकर्षक रिटर्न का लालच

नई स्कीम के तहत दिरहम में निवेश करने वालों को 3 महीने की अवधि पर 6.5 प्रतिशत से शुरू होने वाला रिटर्न मिलेगा। यह दर निवेश की अवधि बढ़ने के साथ बढ़ती जाएगी और 5 साल के निवेश पर यह 7.5 प्रतिशत तक पहुंच जाएगी। यह रिटर्न विदेशी मुद्रा में ही दिया जाएगा, जिससे निवेशक मुद्रा जोखिम से बच सकेंगे। इसी के साथ पाकिस्तानी रुपये में जारी नए पाकिस्तान सर्टिफिकेट्स पर ब्याज दरों में भी वृद्धि की गई है।

नई दरें इस प्रकार हैं

3 महीने: 11.75%
6 महीने: 12%
1 साल: 12.25%
3 साल: 12.5%
5 साल: 12.75%

ये दरें स्थानीय मुद्रा में निवेश करने वालों के लिए काफी आकर्षक मानी जा रही हैं, हालांकि मुद्रास्फीति और रुपये की अस्थिरता को देखते हुए वास्तविक रिटर्न पर निर्भर करेगा। स्कीम पहले से ही अमेरिकी डॉलर, ब्रिटिश पाउंड स्टर्लिंग और यूरो में उपलब्ध थी। डॉलर पर 6.75% से 7.75%, पाउंड पर 6.75% से 8% और यूरो पर 4.75% से 6.25% तक रिटर्न दिया जा रहा है। सभी विदेशी मुद्रा सर्टिफिकेट्स में न्यूनतम निवेश 1000 यूनिट तय किया गया है।

यूएई में रह रहे पाकिस्तानी समुदाय पर फोकस

इस योजना के केंद्र में संयुक्त अरब अमीरात में रहने वाले पाकिस्तानी हैं। अनुमान के मुताबिक, दुबई समेत पूरे यूएइ में 20 लाख से अधिक पाकिस्तानी काम कर रहे हैं। ये लोग मुख्य रूप से निर्माण, परिवहन, व्यापार और सेवा क्षेत्र में सक्रिय हैं। इनकी वार्षिक कमाई और बचत का एक बड़ा हिस्सा पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के लिए रेमिटेंस के रूप में आता है। पाकिस्तान सरकार की नजर अब इनकी बचत पर है। पहले ये लोग स्थानीय यूएई बैंकों, प्रॉपर्टी या अन्य निवेश विकल्पों में पैसा लगाते थे। नई सुविधा से सरकार चाहती है कि वे अपनी कमाई पाकिस्तान में निवेश करें।

दिरहम में सीधे निवेश की सुविधा देकर सरकार ने इस समुदाय को विशेष रूप से लक्षित किया है। इससे निवेशकों को कोई अतिरिक्त झंझट नहीं होगी और पाकिस्तान को विदेशी मुद्रा सीधे मिलेगी।

‘पाकिस्तान बनाओ सर्टिफिकेट’

विदेशी मुद्रा जुटाने के लिए यह पहला प्रयास नहीं है। वर्ष 2019 में पाकिस्तान सरकार ने ‘पाकिस्तान बनाओ सर्टिफिकेट’ नाम की योजना शुरू की थी। उस समय भी मुख्य रूप से खाड़ी देशों के पाकिस्तानियों को लक्ष्य बनाया गया था और डॉलर में निवेश को बढ़ावा दिया गया था। हालांकि, मुद्रा रूपांतरण की जटिलता के कारण उस योजना को अपेक्षित सफलता नहीं मिली।

नया पाकिस्तान सर्टिफिकेट स्कीम पिछले प्रयासों का विस्तारित और सुधारा हुआ रूप है। सरकार का तर्क है कि, यदि प्रवासी पाकिस्तानी औपचारिक बैंकिंग चैनलों के जरिए पैसा भेजेंगे और निवेश करेंगे तो न केवल काला धन कम होगा, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था भी मजबूत बनेगी।

गंभीर आर्थिक संकट में है पाकिस्तान

पाकिस्तान वर्तमान में गंभीर आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है। विदेशी मुद्रा भंडार कई बार खतरे के निशान के करीब पहुंच चुके हैं। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से बार-बार कर्ज लेना पड़ रहा है। ऊर्जा संकट, औद्योगिक उत्पादन में कमी, राजनीतिक अस्थिरता और वैश्विक कारकों जैसे महंगाई और आपूर्ति श्रृंखला की समस्याओं ने स्थिति को और जटिल बनाया है। ऐसे में रेमिटेंस पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। हर साल अरबों डॉलर की राशि प्रवासियों से आती है, लेकिन ये ज्यादातर उपभोग या छोटे-मोटे खर्चों में उपयोग होती है। सरकार अब इसे उत्पादक निवेश में बदलना चाहती है। NPC स्कीम इसी रणनीति का हिस्सा है।

 सुधरेगा पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार

यदि यह योजना सफल रही, तो पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार में सुधार होगा, जिससे आयात बढ़ाने, कर्ज चुकाने और मुद्रा स्थिरता बनाए रखने में मदद मिलेगी। प्रवासियों को भी आकर्षक और सुरक्षित निवेश का विकल्प मिलेगा। हालांकि, चुनौतियां भी कम नहीं हैं। पाकिस्तानी रुपये की अस्थिरता, राजनीतिक अनिश्चितता और आर्थिक नीतियों में अचानक बदलाव निवेशकों का विश्वास प्रभावित कर सकते हैं। साथ ही, यूएई और सऊदी अरब जैसे देशों में स्थानीय निवेश विकल्प भी प्रतिस्पर्धी हैं।

सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि, निवेश की प्रक्रिया पारदर्शी, आसान और सुरक्षित हो। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से आवेदन, ट्रैकिंग और मैच्योरिटी पर आसान निकासी की सुविधा बढ़ाई जाए तो स्कीम की सफलता की संभावनाएं बढ़ जाएंगी।

गहरे होंगे आर्थिक सबंध

पाकिस्तान अब दुबई, रियाद और अन्य खाड़ी शहरों में काम कर रहे अपने नागरिकों की जेब से सीधे विदेशी मुद्रा निकालकर देश की अर्थव्यवस्था में लगाने का रास्ता बना रहा है।  ‘नया पाकिस्तान सर्टिफिकेट’ स्कीम इस दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। यदि प्रवासी पाकिस्तानी इस योजना पर भरोसा करते हैं और बड़े पैमाने पर निवेश करते हैं तो न केवल पाकिस्तान की विदेशी मुद्रा स्थिति मजबूत होगी, बल्कि देश और उसके नागरिकों के बीच आर्थिक संबंध भी और गहरे होंगे।

यह योजना पाकिस्तान के लिए एक उम्मीद की किरण साबित हो सकती है, बशर्ते कि इसे कुशलतापूर्वक लागू किया जाए और निवेशकों के हितों की पूरी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। आर्थिक सुधारों के साथ-साथ ऐसी योजनाएं पाकिस्तान को स्थिरता की राह पर ले जा सकती हैं।

 

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