
आज की आधुनिक और तेज़ रफ्तार वाली जीवनशैली में लोग अपने स्वास्थ्य के कई महत्वपूर्ण पहलुओं को नजरअंदाज कर रहे हैं। इनमें से एक है ओरल हेल्थ यानी मुंह की सेहत। अधिकांश लोग इसे सिर्फ दांतों की सफाई या मसूड़ों की समस्या तक सीमित मानकर चलते हैं, लेकिन हाल में प्रकाशित एक वैज्ञानिक अध्ययन ने इस आम धारणा को पूरी तरह चुनौती दी है। नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित रिसर्च में यह संकेत मिला है कि, मुंह में लंबे समय तक रहने वाली सूजन महिलाओं की प्रजनन क्षमता यानी फर्टिलिटी को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकती है।
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पूरे शरीर को प्रभावित करती है मुंह की सेहत
यह अध्ययन स्वास्थ्य जगत में काफी चर्चा का विषय बना हुआ है, क्योंकि इससे पहले ओरल हेल्थ को मुख्य रूप से दांतों और मसूड़ों की समस्या से जोड़कर देखा जाता था। अब स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि, मुंह की सेहत पूरे शरीर की सेहत से गहराई से जुड़ी हुई है। मुंह में होने वाली सूजन अगर लंबे समय तक बनी रही, तो वह सिर्फ मुंह तक सीमित नहीं रहती, बल्कि शरीर के अन्य अंगों खासकर महिलाओं के प्रजनन तंत्र पर भी अपना असर दिखा सकती है।

इस स्टडी में रिसर्चर्स ने चूहों पर प्रयोग करके देखा कि मुंह में क्रॉनिक इंफ्लेमेशन यानी लगातार सूजन रहने का क्या प्रभाव पड़ता है। प्रयोग के नतीजे काफी महत्वपूर्ण और सोचने लायक रहे। अध्ययन से पता चला कि मुंह की सूजन शरीर के इम्यून सिस्टम को सक्रिय कर देती है और यह सूजन रक्त प्रवाह के माध्यम से पूरे शरीर में फैल सकती है। खासकर महिलाओं के ओवरी यानी अंडाशय पर इसका नकारात्मक प्रभाव देखा गया।
ओवरी के टिश्यू में आती है सूजन
रिसर्च में पाया गया कि, लंबे समय तक ओरल सूजन वाली स्थिति में ओवरी के टिश्यू में सूजन संबंधी बदलाव आते हैं। साथ ही ऑक्सिडेटिव स्ट्रेस बढ़ जाता है, जो कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाता है। फॉलिकल्स का विकास प्रभावित होता है और एग यानी अंडाणु की गुणवत्ता में गिरावट आती है। फॉलिकल्स वे छोटी संरचनाएं हैं जिनमें अंडे विकसित होते हैं। इनमें किसी भी तरह का बदलाव सीधे तौर पर महिला की प्रजनन क्षमता को कम कर सकता है।
हालांकि, यह अध्ययन चूहों पर किया गया था, इसलिए स्वास्थ्य विशेषज्ञ साफ-साफ कह रहे हैं कि, इंसानों पर इस संबंध को और गहराई से समझने के लिए बड़े स्तर पर और अधिक शोध की जरूरत है। फिर भी यह स्टडी एक महत्वपूर्ण चेतावनी के रूप में सामने आई है। इससे यह साफ होता है कि, ओरल हेल्थ को नजरअंदाज करना सिर्फ दांत खराब होने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इससे बड़े स्वास्थ्य मुद्दे भी जुड़े हो सकते हैं।
बिगड़ सकता है हॉर्मोनल बैलेंस
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, मुंह में मौजूद बैक्टीरिया और सूजन से निकलने वाले हानिकारक पदार्थ खून के रास्ते पूरे शरीर में यात्रा कर सकते हैं। इससे शरीर में कम स्तर की सूजन पैदा होती है। यह सूजन हॉर्मोनल बैलेंस को बिगाड़ सकती है, जो फर्टिलिटी के लिए अत्यंत जरूरी है। महिलाओं में फर्टिलिटी हॉर्मोन, ओवुलेशन प्रक्रिया, एग की गुणवत्ता, गर्भाशय की दीवार और इम्यून सिस्टम के संतुलन पर निर्भर करती है। यदि मुंह की समस्या सालों-साल बनी रही तो इन सभी प्रक्रियाओं पर असर पड़ सकता है।
कुछ स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि, पेरियोडॉन्टल डिजीज यानी मसूड़ों की गंभीर बीमारी महिलाओं में प्रीमैच्योर बर्थ, कम वजन वाले बच्चे के जन्म और फर्टिलिटी संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ा सकती है। इसके अलावा क्रॉनिक सूजन इंसुलिन रेसिस्टेंस को बढ़ावा दे सकती है, जो पीसीओडी जैसी स्थितियों को और बदतर बना सकती है।
एंटीऑक्सीडेंट्स की कमी भी एग की सेहत के लिए हानिकारक साबित हो सकती है। खराब ओरल हेल्थ के खतरे केवल बांझपन तक ही सीमित नहीं हैं। इससे हृदय रोग, डायबिटीज टाइप-2, सांस की बीमारियां, जोड़ों की समस्या और कुछ प्रकार के कैंसर का खतरा भी बढ़ जाता है। मुंह को शरीर का गेटवे माना जाता है।
दो बार सही तरीके से करें ब्रश
अगर गेटवे ही संक्रमित है, तो अंदर जाने वाले हर चीज पर इसका असर पड़ना स्वाभाविक है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ अच्छी ओरल हेल्थ बनाए रखने के लिए कुछ व्यावहारिक और आसान उपाय सुझाते हैं। सबसे पहले दिन में कम से कम दो बार सही तरीके से ब्रश करना चाहिए। फ्लोराइड युक्त टूथपेस्ट का इस्तेमाल फायदेमंद होता है। रोजाना फ्लॉसिंग करके दांतों के बीच की सफाई करनी चाहिए। एंटीसेप्टिक माउथवॉश का नियमित उपयोग बैक्टीरिया को नियंत्रित रखता है।
संतुलित और पौष्टिक आहार लेना भी बहुत जरूरी है। ज्यादा चीनी, कोल्ड ड्रिंक्स और प्रोसेस्ड फूड से परहेज करना चाहिए। फल, सब्जियां, दही, हरी पत्तेदार सब्जियां और पर्याप्त पानी का सेवन बढ़ाना चाहिए। धूम्रपान, तंबाकू और गुटखा का पूरी तरह त्याग कर देना चाहिए क्योंकि ये मसूड़ों की बीमारियों को तेजी से बढ़ाते हैं। हर छह महीने में एक बार डेंटिस्ट से जांच करानी चाहिए। अगर मसूड़ों से खून आना, सूजन, दर्द, बदबू या दांतों में हिलना जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
ओरल हेल्थ पर भी ध्यान दें महिलाएं
समय पर इलाज न करने से छोटी समस्या बड़ी बीमारी का रूप ले सकती है। यह स्टडी हमें एक बार फिर याद दिलाती है कि, स्वास्थ्य को अलग-अलग हिस्सों में बांटकर नहीं देखना चाहिए। शरीर के हर अंग का अपना महत्व है और एक अंग की समस्या पूरे सिस्टम को प्रभावित कर सकती है। खासकर वे महिलाएं जो गर्भधारण की योजना बना रही हैं या जिन्हें फर्टिलिटी संबंधी कोई समस्या है, उन्हें अपनी ओरल हेल्थ का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
अच्छी ओरल हेल्थ न सिर्फ चमकदार मुस्कान और आत्मविश्वास देती है बल्कि स्वस्थ प्रजनन, बेहतर इम्यूनिटी और लंबी उम्र के लिए भी आधार तैयार करती है, इसलिए अब समय आ गया है कि हम अपनी दिनचर्या में ओरल हाइजीन को प्राथमिकता दें। छोटी-छोटी आदतों में बदलाव लाकर हम न सिर्फ दांतों को स्वस्थ रख सकते हैं बल्कि पूरे शरीर को कई गंभीर बीमारियों से बचा सकते हैं। आने वाले समय में और अधिक शोध से इस विषय पर और स्पष्ट जानकारी मिलने की उम्मीद है, लेकिन फिलहाल उपलब्ध अध्ययन हमें सतर्क रहने का संदेश देते हैं। अच्छी ओरल हेल्थ समग्र स्वास्थ्य की कुंजी है।
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