
लखनऊ। नौतपा की चुभती गर्मी और लू की मार झेल रहे उत्तर प्रदेश के लोगों के लिए मौसम राहत के साथ-साथ नई मुसीबत भी लेकर आया है, जहां एक ओर पश्चिमी विक्षोभ और चक्रवाती हवाओं के कारण तापमान में 6 से 8 डिग्री की गिरावट होने जा रही है। वहीं दूसरी ओर 100 किलोमीटर प्रति घंटे तक की तेज हवाओं, मूसलाधार बारिश, भारी ओलावृष्टि और आकाशीय बिजली का खतरा मंडरा रहा है।
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प्रदेश में हाई अलर्ट
भारतीय मौसम विभाग ने पूरे प्रदेश में हाई अलर्ट जारी कर दिया है। खासतौर पर सहारनपुर, शामली समेत पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 12 जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश का रेड अलर्ट है, जबकि करीब 60 जिलों में ओलावृष्टि का खतरा बताया गया है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि, अगले 48 से 72 घंटे बेहद चुनौतीपूर्ण रहने वाले हैं। गुरुवार शाम से ही प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में मौसम का मिजाज बदलना शुरू हो गया था।

गाजियाबाद, मथुरा, कासगंज, संभल और फर्रुखाबाद में तेज बारिश दर्ज की गई। मेरठ में घने काले बादल छाए रहे, जबकि शाहजहांपुर में धूल भरी आंधी के बाद बारिश ने दस्तक दी। झांसी और बदायूं में ओले गिरे, जिससे स्थानीय किसानों में चिंता फैल गई। देर रात कानपुर, मुरादाबाद, बरेली और लखनऊ सहित कई शहरों में तेज हवाओं के साथ जमकर बारिश हुई। इससे तापमान में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई और लोगों को गर्मी से कुछ राहत मिली, लेकिन यह राहत महंगी साबित हो सकती है।
नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय
भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक, उत्तर भारत में एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो गया है। इसके साथ ही दक्षिण बिहार और आसपास के क्षेत्रों में ऊंचाई पर चक्रवाती हवाओं का सर्कुलेशन बना हुआ है। इन दोनों सिस्टम्स के संयुक्त प्रभाव से उत्तर प्रदेश में तेज हवाओं, गरज-चमक के साथ बारिश और ओलावृष्टि की स्थिति बन रही है। लखनऊ स्थित मौसम वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह ने बताया कि इस सिस्टम के कारण अधिकतम तापमान में काफी गिरावट आने की संभावना है, लेकिन इसके साथ ही खतरनाक मौसम की घटनाएं भी बढ़ेंगी।
मौसम विभाग ने बांदा, चित्रकूट, कौशाम्बी, प्रयागराज, फतेहपुर, प्रतापगढ़, सोनभद्र, मिर्जापुर, संत रविदास नगर, लखीमपुर खीरी, हरदोई, फर्रुखाबाद, कन्नौज, कानपुर देहात, कानपुर नगर, उन्नाव, रायबरेली, सहारनपुर, शामली, मुजफ्फरनगर, मथुरा, हाथरस, कासगंज, एटा, आगरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, इटावा, औरैया, बिजनौर, अमरोहा, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली, पीलीभीत, शाहजहांपुर, संभल, बदायूं, जालौन, हमीरपुर, महोबा, झांसी और ललितपुर जैसे जिलों के लिए सबसे गंभीर चेतावनी जारी की है।
बिना वजह घर से न निकलें
इन क्षेत्रों में हवा की औसत रफ्तार 80-90 किलोमीटर प्रति घंटे रहने का अनुमान है, जबकि कुछ स्थानों पर झोंकों की गति 100 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। विभाग ने इसे बेहद खतरनाक स्थिति बताया है और लोगों से घरों के अंदर सुरक्षित रहने की अपील की है। पूर्वांचल और मध्य यूपी के जिलों में भी स्थिति गंभीर बनी हुई है।

चंदौली, वाराणसी, जौनपुर, गाजीपुर, आजमगढ़, मऊ, बलिया, देवरिया, गोरखपुर, संत कबीर नगर, बस्ती, कुशीनगर, महाराजगंज, सिद्धार्थनगर, गोंडा, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच, सीतापुर, लखनऊ, बाराबंकी, अमेठी, सुल्तानपुर, अयोध्या, अंबेडकर नगर, बागपत, मेरठ, गाजियाबाद, हापुड़, गौतमबुद्ध नगर, बुलंदशहर और अलीगढ़ में 70-80 किलोमीटर प्रति घंटे की हवाएं चलने और 90 किलोमीटर तक के झोंके आने की संभावना जताई गई है।
बारिश और ओलावृष्टि का खतरा
सहारनपुर, शामली, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, अमरोहा, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली, पीलीभीत, शाहजहांपुर, संभल और बदायूं में भारी से बहुत भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया गया है। इन इलाकों में कुछ ही घंटों में इतनी तेज बारिश हो सकती है कि, निचले इलाकों में जलभराव, सड़कों पर पानी जमा होना और बिजली आपूर्ति बाधित होने जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। स्थानीय प्रशासन को पहले से ही अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दे दिए गए हैं। सबसे ज्यादा चिंता ओलावृष्टि को लेकर है।
मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश के करीब 60 जिलों में भारी ओले गिरने की आशंका है। पश्चिमी यूपी से लेकर बुंदेलखंड और मध्य यूपी तक यह खतरा फैला हुआ है। किसान पहले ही भीषण गर्मी से परेशान थे। अब ओलावृष्टि से खेतों में खड़ी गेहूं की बची-खुची फसल, आम के बागान और सब्जियों को भारी नुकसान पहुंचने की आशंका है। कई जगहों पर आम की फसल पकने की कगार पर थी, लेकिन ओले गिरने से पूरा का पूरा बागान बर्बाद हो सकता है।
कृषि विभाग के अधिकारी लगातार किसानों से संपर्क में हैं और उन्हें सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं। पूरे प्रदेश में मेघगर्जन और बिजली गिरने का खतरा भी बना हुआ है। मौसम विभाग ने लोगों खासकर किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों के निवासियों को खुली जगहों, ऊंचे पेड़ों, बिजली के खंभों और मोबाइल फोन चार्जिंग से दूर रहने की सख्त सलाह दी है। पिछले कुछ वर्षों के आंकड़ों में देखा गया है कि, मई-जून के दौरान आकाशीय बिजली से होने वाली दुर्घटनाएं काफी बढ़ जाती हैं।
31 मई तक रहेगा असर
मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि, यह सिस्टम 31 मई तक सक्रिय रह सकता है। इस दौरान रुक-रुक कर बारिश, धूल भरी आंधी और ओलावृष्टि के दौर जारी रह सकते हैं। हालांकि, गर्मी और लू से मिल रही राहत आम जनजीवन के लिए सुखद है, लेकिन तेज हवाओं, पानी भराव और बिजली गिरने से जान-माल की हानि का खतरा भी मौजूद है। यातायात विभाग ने भी हाईवे और एक्सप्रेसवे पर सतर्कता बरतने के निर्देश जारी किए हैं। स्कूलों और कॉलेजों में आउटडोर गतिविधियों पर अस्थायी रोक लगाई जा सकती है।

प्रदेश सरकार के आपदा प्रबंधन विभाग ने सभी जिलाधिकारियों को तैयार रहने को कहा है। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें हाई अलर्ट पर हैं। लोगों से अपील की गई है कि वे मौसम की खबरें नियमित रूप से देखते रहें और किसी भी आपात स्थिति में हेल्पलाइन नंबरों पर संपर्क करें। यह मौसम परिवर्तन जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभाव की एक और मिसाल है, जहां एक तरफ लंबे समय तक सूखा और गर्मी का कहर है तो दूसरी तरफ अचानक भारी बारिश और तूफान।
ओलावृष्टि से खराब हो सकती हैं फसलें
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि, यदि ओलावृष्टि हुई तो न सिर्फ इस सीजन की फसल प्रभावित होगी बल्कि आने वाले मौसम की तैयारी भी बाधित हो सकती है। प्रदेशवासियों से अनुरोध है कि, अगले कुछ दिनों तक अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलें, खासकर शाम और रात के समय। मजबूत इमारतों में रहें, खिड़कियां और दरवाजे बंद रखें।
किसान भाई अपने खेतों में मौजूद मशीनरी और उपकरणों को सुरक्षित स्थान पर रखें। बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें। मौसम विभाग लगातार निगरानी कर रहा है और जरूरत पड़ने पर अलर्ट को और अपडेट किया जाएगा। फिलहाल स्थिति पर नजर बनाए रखना और सतर्क रहना ही सबसे बड़ा बचाव है।
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