गंगा-यमुना लिंक एक्सप्रेसवे को मिली हरी झंडी, 1204 करोड़ से 740 एकड़ जमीन का अधिग्रहण शुरू

  लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य की कनेक्टिविटी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। यमुना एक्सप्रेसवे और गंगा एक्सप्रेसवे को आपस में जोड़ने के लिए 74.3 किलोमीटर लंबे लिंक एक्सप्रेसवे (गंगा लिंक एक्सप्रेसवे) का निर्माण किया जाएगा। इस परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज करने हेतु राज्य सरकार ने यमुना एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (YEIDA) को 1204 करोड़ रुपये का बजट आवंटित कर दिया है। यह राशि विशेष रूप से यीडा क्षेत्र में 16 गांवों की लगभग 740 एकड़ जमीन खरीदने के लिए जारी की गई है।

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मिलेगी बेहतर कनेक्टिविटी 

गंगा-यमुना लिंक एक्सप्रेसवे

यह लिंक एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (UPEIDA) द्वारा विकसित किया जाएगा, जो नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करेगी। परियोजना का मुख्य उद्देश्य नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर एयरपोर्ट) को गंगा एक्सप्रेसवे से सीधे जोड़ना है, जिससे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों जैसे मेरठ, बुलंदशहर, खुर्जा और सियाना से एयरपोर्ट तक यात्रा समय काफी कम हो जाएगा।साथ ही, यह दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे, आगरा और ग्रेटर नोएडा के औद्योगिक क्षेत्रों के बीच बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करेगा।

परियोजना की डिटेल्स के अनुसार, लिंक एक्सप्रेसवे बुलंदशहर जिले के सियाना क्षेत्र के पास गंगा एक्सप्रेसवे के 44.3 किलोमीटर पॉइंट से शुरू होगा और यमुना एक्सप्रेसवे के 24.8 किलोमीटर पॉइंट पर, सेक्टर-21 फिल्म सिटी के निकट जाकर जुड़ेगा। यह पूरी तरह ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे होगा, जिसमें एक्सेस कंट्रोल्ड सुविधा होगी। यीडा क्षेत्र में इसका लगभग 20 किलोमीटर हिस्सा आएगा, जिसमें से करीब 9 किलोमीटर एलिवेटेड (उड़नपुल) निर्माण शामिल है। इससे घनी आबादी वाले इलाकों में ट्रैफिक बाधा कम होगी।

120 मीटर चौड़ा होगा कॉरिडोर

इसके अलावा, स्थानीय निवासियों की सुविधा के लिए 24 मीटर चौड़ी सर्विस रोड, दो रोड ओवर ब्रिज, कई अंडरपास और अन्य आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण किया जाएगा। पूरा कॉरिडोर 120 मीटर चौड़ा होगा, जो हाई-स्पीड ट्रैवल और सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करेगा। जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया यीडा द्वारा संचालित की जाएगी। यीडा क्षेत्र के 16 गांवों में मेहंदीपुर बांगर, भाईपुर ब्रह्मनान, रबुपूरा, भुन्नातगा, म्याना, फाजिलपुर, कल्लूपुरा और अन्य शामिल हैं।

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इन गांवों में सर्वेक्षण पूरा हो चुका है और जल्द ही मुआवजा वितरण एवं अधिग्रहण की औपचारिक प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। कुल मिलाकर यह लिंक एक्सप्रेसवे दो जिलों गौतम बुद्ध नगर और बुलंदशहर में फैले 56 गांवों से होकर गुजरेगा, जिसमें गौतम बुद्ध नगर में 16 और बुलंदशहर में बाकी गांव शामिल हैं।

लिंक एक्सप्रेसवे के फायदे

उत्तर प्रदेश सरकार के संयुक्त सचिव निर्मष कुमार शुक्ल ने 17 फरवरी 2026 को यीडा के सीईओ को इस संबंध में पत्र जारी किया, जिसमें 1204 करोड़ रुपये की राशि आवंटित करने की जानकारी दी गई। यह बजट 2025-26 वित्तीय वर्ष में मंजूर किया गया है। कुल परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 4000 करोड़ रुपये है, जिसमें भूमि अधिग्रहण के अलावा डिजाइन, टेंडरिंग और निर्माण कार्य शामिल हैं। इस लिंक एक्सप्रेसवे के बनने से कई फायदे होंगे।

  • पहला: जेवर एयरपोर्ट से मेरठ, बुलंदशहर और आसपास के क्षेत्रों से यात्रा समय काफी घट जाएगा…उदाहरण के लिए मेरठ से जेवर तक का सफर मात्र 45 मिनट में पूरा हो सकता है।
  • दूसरा:  यमुना सिटी के औद्योगिक क्षेत्रों सेक्टर 28, 29, 32, 33 में कार्गो मूवमेंट आसान होगा, जिससे लॉजिस्टिक्स और इंडस्ट्री को बढ़ावा मिलेगा।
  • तीसरा: मौजूदा यमुना एक्सप्रेसवे पर ट्रैफिक का बोझ कम होगा और ट्रैफिक जाम की समस्या से राहत मिलेगी।
  • चौथा: यह परियोजना राज्य के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों को जोड़कर आर्थिक विकास को नई गति देगी, निवेश आकर्षित करेगी और रोजगार के अवसर बढ़ाएगी।

सरकार का दावा है कि यह परियोजना न केवल बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करेगी, बल्कि पर्यावरणीय मानकों का पालन करते हुए विकसित की जाएगी।

ग्रामीणों को मिलेगा मुआवजा

स्थानीय ग्रामीणों को उचित मुआवजा दिया जाएगा और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी। यह परियोजना उत्तर प्रदेश की इंफ्रास्ट्रक्चर क्रांति का हिस्सा है, जिसमें यमुना एक्सप्रेसवे, गंगा एक्सप्रेसवे और जेवर एयरपोर्ट जैसे मेगा प्रोजेक्ट्स शामिल हैं। जल्द ही जमीन अधिग्रहण पूरा होने के बाद निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा, जिससे राज्य की इकोनॉमी को मजबूती मिलेगी। अधिकारियों का कहना है कि समयबद्ध तरीके से परियोजना पूरी की जाएगी ताकि नागरिकों को जल्द से जल्द इसका लाभ मिल सके।

 

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