राहुल के आरोप पर हरदीप सिंह पुरी का जवाब, कहा- 3-4 बार मिला हूं एपस्टीन से, वह सिर्फ…

नई दिल्ली। संसद के बजट सत्र में विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच तीखी बहस छिड़ गई है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को चर्चित ‘एपस्टीन फाइल्स’ का जिक्र करते हुए केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और व्यवसायी अनिल अंबानी पर गंभीर आरोप लगाए। राहुल ने पूछा कि, अनिल अंबानी को जेल क्यों नहीं भेजा गया और हरदीप पुरी को पता है कि एपस्टीन से उनकी मुलाकात किसने कराई।

इसे भी पढ़ें- संसद में नरवणे की किताब को लेकर हंगामा, राहुल ने सत्ता पक्ष को घेरा, मोदी का भाषण टला

इस पर हरदीप पुरी ने तुरंत पलटवार किया और स्पष्ट किया कि उनकी एपस्टीन से मुलाकात सिर्फ 3-4 बार हुई थी, वह भी अंतरराष्ट्रीय पीस इंस्टीट्यूट (IPI) के एक प्रतिनिधिमंडल के हिस्से के रूप में। पुरी ने राहुल के आरोपों को ‘बेबुनियाद’ बताते हुए कहा कि एपस्टीन फाइल्स गलत कामों और आपराधिक मामलों से जुड़ी हैं, लेकिन उनकी बातचीत का इससे कोई लेना-देना नहीं।

देश के हितों को बेंचने का आरोप

राहुल

यह विवाद लोकसभा में बजट चर्चा के दौरान शुरू हुआ, जब राहुल गांधी ने सरकार पर देश के हितों को बेचने का आरोप लगाया।   कांग्रेस नेता ने ‘एपस्टीन फाइल्स’ का हवाला देते हुए कहा, एक बिजनेसमैन हैं, जिनका नाम अनिल अंबानी है। उन्हें जेल क्यों नहीं भेजा जा रहा है? ऐसा इसलिए क्योंकि उनका नाम एपस्टीन फाइल्स में है। उन्होंने कहा, मैं केन्द्रीय मंत्री हरदीप पुरी से भी पूछना चाहता हूं कि अनिल अंबानी को एपस्टीन से किसने मिलवाया था। उन्होंने कहा, हरदीप पुरी भी जानते हैं कि किसने उन्हें मिलवाया था। राहुल गांधी के इस बयान से सदन में हंगामा मच गया। सत्ता पक्ष के सदस्यों ने जोरदार विरोध किया। वहीं, विपक्षी सदस्यों ने राहुल का समर्थन किया।

केन्द्रीय मंत्री ने की प्रेस कांफ्रेंस

अब केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल के आरोपों का विस्तार से जवाब दिया। उन्होंने कहा, “युवा नेता (राहुल गांधी) को पता होना चाहिए कि, एपस्टीन फाइल्स गलत कामों और आपराधिक मामलों से संबंधित हैं। एपस्टीन पर आरोप थे कि उनके पास एक द्वीप था, जहां वे लोगों को उनकी यौन कल्पनाओं को पूरा करने के लिए ले जाते थे। उन पर बाल यौन शोषण के आरोप थे और पीड़ितों ने अधिकारियों के खिलाफ मामले दर्ज कराए थे। मेरी बातचीत का इससे कोई लेना-देना नहीं था।

डिप्लोमेटिक के तौर पर हुई थी मुलाकात

प्रेस कांफ्रेंस में पुरी ने अपनी मुलाकातों को स्पष्ट करते हुए बताया कि, साल 2009 में जब मैं अमेरिका में राजदूत था, तब मेरी मुलाकात एपस्टीन से हुई थी। इसकी सारी सच्चाई पब्लिक डोमेन में मौजूद है। मैं उनसे तीन से चार बार मिला हूं। इस वाकये के 8 साल बाद मैं मंत्री बना। पुरी ने आगे कहा कि, एपस्टीन से उनकी मुलाकात केवल अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल के तहत हुई थी। नवंबर 2014 में मैं एक आम नागरिक था।

एपस्टीन के लिए राइट पर्सन नहीं था मैं 

राहुल

एपस्टीन के संपर्क के एक शख्स ने हमारी मुलाकात लिंक्डइन के संस्थापक रीड हॉफमैन से अमेरिका के वेस्ट कोस्ट में करवाई थी। किसी ने कहा कि वे भारत को देखना चाहते हैं। मैंने अपने ईमेल में कहा था कि, आज भारत एक शानदार अवसर प्रस्तुत करता है और रीड हॉफमैन को भारत आकर आने वाले बदलावों को देखना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि, एपस्टीन ने उन्हें ‘टू-फेस्ड’ कहा था, क्योंकि उन्होंने एपस्टीन की गतिविधियों में कोई रुचि नहीं दिखाई। पूरी के कहा, मैंने एपस्टीन की गतिविधियों में कोई दिलचस्पी नहीं ली,  उनके लिए मैं ‘राइट पर्सन’ नहीं था।

क्या है ‘एपस्टीन फाइल्स’ 

बता दें कि, जेफरी एपस्टीन एक अमेरिकी फाइनेंशियर थे और उन पर सेक्स ट्रैफिकिंग और बाल यौन शोषण के गंभीर आरोप थे। इसके लिए उन्हें जेल हुई थी, जहां साल 2019 में उनकी मौत हो गई थी। कुछ लोगों ने उनकी मौत को आत्महत्या तो कुछ ने हत्या करार दिया था। उनकी मौत के 6 साल बाद अब अमेरिकी न्याय विभाग ने उनके हजारों दस्तावेज रिलीज किए हैं, जिनमें कई हाई-प्रोफाइल नाम शामिल हैं। इन फाइल्स में अनिल अंबानी का नाम भी है, जहां एपस्टीन ने अंबानी से संबंधित ईमेल्स में ‘यंग ब्लोंड्स’ की प्राथमिकताओं और भारत-अमेरिका संबंधों पर चर्चा की है।

इसे भी पढ़ें-   संसद में राहुल गांधी के ‘चीन राग’ से मचा हंगामा, भाजपा बोली- देश से माफी मांगे कांग्रेस

किरेन रिजिजू ने दिया जवाब

अनिल के अलावा हरदीप पुरी का नाम भी कुछ ईमेल्स में है, लेकिन पुरी का दावा है कि, यह सिर्फ प्रोफेशनल मीटिंग्स तक सीमित था। फाइल्स में करीब 3 मिलियन ईमेल्स हैं, जो पब्लिक डोमेन में उपलब्ध हैं। राहुल गांधी के आरोपों ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। कांग्रेस इसे सरकार की ‘कॉर्पोरेट फ्रेंडली’ नीतियों से जोड़कर देख रही है। राहुल ने कहा कि, ये फाइल्स अभी भी लॉक हैं और इनमें और भी नाम हो सकते हैं। उन्होंने सरकार पर दबाव डालने का आरोप लगाया कि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कॉर्पोरेट्स का ‘चोकहोल्ड’ है। वहीं, भाजपा राहुल के बयानों को ‘गुमराह करने वाला’ बता रही है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सभी आरोपों को प्रमाणित किया जाना चाहिए और राहुल के बयानों के गंभीर परिणाम होंगे।

ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है जब एपस्टीन फाइल्स भारतीय राजनीति को प्रभावित कर रही है। इससे पहले 2024 में भी फाइल्स के कुछ पन्ने रिलीज हुए थे, तब भी कई अंतरराष्ट्रीय नामों पर बहस हुई थी। तब भी अनिल अंबानी का नाम ईमेल्स में आया था, जहां एपस्टीन ने मोदी के यूएस विजिट के लिए ‘असिस्टेंस’ और भारत-अमेरिका टाइज पर ‘गाइडेंस’ की बात की थी।

नहीं सिद्ध हुए आरोप

हालांकि, कोई आपराधिक आरोप सिद्ध नहीं हुए थे। हरदीप पुरी, जो 2009-2014 तक यूएस में भारतीय राजदूत थे, ने स्पष्ट किया कि उनकी भूमिका सिर्फ डिप्लोमैटिक थी। सोशल मीडिया पर यह मुद्दा ट्रेंड कर रहा है। कई यूजर्स ने राहुल के आरोपों का समर्थन किया, जबकि भाजपा समर्थक इसे ‘राजनीतिक स्टंट’  बता रहे हैं। एक ट्वीट में लिखा गया, राहुल गांधी ने एपस्टीन फाइल्स में अनिल अंबानी और हरदीप पुरी का नाम लेकर सरकार को घेरा।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद बजट सत्र को प्रभावित कर सकता है, जहां पहले से ही इंडिया-यूएस ट्रेड डील पर बहस चल रही है। पूर्व सेना प्रमुख की अप्रकाशित किताब का हवाला देकर गलवान घाटी में हुए संघर्ष का जिक्र करके सरकार को घेरने की कोशिश से सदन में पहले से ही हंगामा मचा हुआ है।

सदन में छिड़ी है बहस 

राहुल गांधी ने ट्रेड डील को ‘एकतरफा’ बताते हुए कहा कि सरकार ने किसानों, आईटी सेक्टर और ऊर्जा सुरक्षा को बेच दिया है। हरदीप पुरी ने राहुल से अपील की कि वे ईमेल्स पढ़ें और तथ्यों की जांच करें। उन्होंने कहा, राहुल गांधी को बेबुनियाद आरोप लगाने की आदत है। वहीं, कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि यह सरकार की पारदर्शिता पर सवाल उठाता है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गर्माने की संभावना है, क्योंकि विपक्ष इसे कॉर्पोरेट-सरकार नेक्सस से जोड़ रहा है।

 

इसे भी पढ़ें- संसद में हंगामे के साथ शुरू हुई कार्यवाही, PM मोदी पर कांग्रेस के नारे से भड़की BJP

Related Articles

Back to top button