
नई दिल्ली: हिंदू पंचांग में बसंत पंचमी का विशेष महत्व है। यह पर्व विद्या, बुद्धि और कला की देवी मां सरस्वती को समर्पित होता है, इसलिए इसे सरस्वती जयंती या सरस्वती पूजा के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन मां सरस्वती का प्राकट्य हुआ था, जिस कारण बसंत पंचमी से शिक्षा, ज्ञान और रचनात्मक कार्यों की शुरुआत को बेहद शुभ माना जाता है। यह दिन वर्ष के सबसे मंगल अवसरों में शामिल है, जब बिना किसी मुहूर्त के नया कार्य आरंभ किया जा सकता है। वर्ष 2026 में बसंत पंचमी का पर्व 23 जनवरी को मनाया जाएगा।
मां सरस्वती के प्राकट्य से जुड़ी पौराणिक कथा
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार जब भगवान ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना की तो उन्हें अपनी सृजना नीरस और शांत प्रतीत हुई। संसार में चेतना और मधुरता का अभाव देखकर ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल से जल छिड़का, जिससे एक दिव्य और अलौकिक देवी प्रकट हुईं। देवी के चार हाथ थे, जिनमें वीणा, पुस्तक और माला सुशोभित थीं, जबकि एक हाथ वर मुद्रा में था। जैसे ही देवी ने वीणा का मधुर नाद किया, संपूर्ण सृष्टि में जीवन, संगीत और चेतना का संचार हो गया। यह दिव्य घटना बसंत पंचमी के दिन घटी थी, इसलिए इसी तिथि को मां सरस्वती का जन्म दिवस मानकर पूजा-अर्चना की जाने लगी।
ऋतुराज बसंत के स्वागत का प्रतीक है यह पर्व
बसंत पंचमी को ऋतुराज बसंत के आगमन का पर्व भी कहा जाता है। इस दिन से ठंड की विदाई और वसंत ऋतु की शुरुआत मानी जाती है। पेड़ों पर नई कोंपलें फूटने लगती हैं, खेतों में सरसों के पीले फूल लहराने लगते हैं और प्रकृति चारों ओर रंगीन हो उठती है। धरती पर पीले रंग की बहुलता के कारण इस दिन पीले वस्त्र पहनना, पीले पकवान बनाना और देवी को पीले फूल अर्पित करना शुभ माना जाता है।
कामदेव और रति की पूजा की परंपरा
देश के कुछ हिस्सों में बसंत पंचमी के दिन प्रेम के देवता कामदेव और उनकी पत्नी रति की भी पूजा की जाती है। इसी वजह से बसंत ऋतु को प्रेम और उल्लास की ऋतु कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन प्रेम, सौहार्द और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
अबूझ मुहूर्त का विशेष महत्व
बसंत पंचमी को अबूझ मुहूर्त माना गया है। इस दिन ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति अत्यंत शुभ होती है, इसलिए विवाह, गृह प्रवेश, विद्यारंभ, व्यवसाय की शुरुआत और अन्य मांगलिक कार्य बिना किसी विशेष मुहूर्त के किए जा सकते हैं। यही कारण है कि यह पर्व धार्मिक के साथ-साथ सामाजिक जीवन में भी खास स्थान रखता है।



