क्या है लो ओवेरियन रिजर्व, जानें क्यों 30 के बाद तेजी से घटने लगती है महिलाओं की प्रजनन क्षमता

नई दिल्ली। भारत में महिलाओं की प्रजनन क्षमता को लेकर चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। एनएफएचएस-6 रिपोर्ट में भी महिलाओं की घटती प्रजनन दर पर गहरी चिंता जाहिर की गई है। आज के दौर में जहां महिलाएं शिक्षा और करियर को प्राथमिकता देते हुए देर से मां बनने का फैसला कर रही हैं, वहीं एक ऐसी समस्या चुपचाप उनके स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही है जिसके बारे में बहुत कम बात होती है। इस समस्या का नाम है लो ओवेरियन रिजर्व।

इसे भी पढ़ें- हेल्थ टिप्स: बिना वजह खराब रहता है मूड, हो सकती है शरीर में इस ख़ास विटामिन की कमी

हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि, बिगड़ी हुई जीवनशैली, खानपान में कमी और देर से गर्भधारण की कोशिश जैसे कई कारण इस समस्या को और गंभीर बना रहे हैं। आइए विस्तार से समझते हैं कि, लो ओवेरियन रिजर्व क्या है, इसके क्या कारण हैं और इससे कैसे निपटा जा सकता है।

धीरे-धीरे कम होती है एग्स की संख्या

हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक, हर महिला के शरीर में जन्म से ही एग्स की एक निर्धारित संख्या होती है और यह संख्या उम्र के साथ-साथ धीरे-धीरे कम होती जाती है। जब किसी महिला की ओवरी में उसकी उम्र के हिसाब से एग्स की संख्या और क्वालिटी सामान्य से कम हो जाती है तो इस स्थिति को लो ओवेरियन रिजर्व कहा जाता है।

Low Ovarian Reserve

यह जरूरी नहीं है कि, इस समस्या से हमेशा गर्भधारण में परेशानी हो लेकिन इससे गर्भधारण की संभावना निश्चित रूप से कम हो जाती है। हेल्थ एक्सपर्ट का कहना है कि इस विषय पर बहुत कम बात होती है, जबकि यह भविष्य में गर्भधारण की संभावना पर गहरा असर डाल सकता है।

35 के बाद तेजी से गिरती है संख्या

चिकित्सक बताते हैं कि, जैसे-जैसे महिला की उम्र बढ़ती है, वैसे-वैसे उसके शरीर में बचे हुए एग्स की संख्या और क्वालिटी दोनों में गिरावट आने लगती है। उम्र इस पूरी प्रक्रिया में सबसे अहम और निर्णायक कारक है। 30 साल की उम्र के बाद से महिला की गर्भधारण क्षमता धीरे-धीरे गिरने लगती है और 35 के बाद यह गिरावट और तेज हो जाती है।

आज के आंकड़े बेहद चौंकाने वाले हैं, क्योंकि फर्टिलिटी ट्रीटमेंट लेने वाली बहुत सी महिलाओं में 30 साल से कम उम्र में ही अनुमान से कम एएमएच लेवल पाया गया है। यानी यह समस्या अब सिर्फ अधिक उम्र की महिलाओं तक सीमित नहीं रही बल्कि युवा महिलाएं भी इसकी चपेट में आ रही हैं।

 इन कारणों से होती है समस्या

हेल्थ एक्सपर्ट के अनुसार लो ओवेरियन रिजर्व के पीछे कई कारण हो सकते हैं। उम्र के अलावा जेनेटिक्स यानी पारिवारिक इतिहास भी इसमें अहम भूमिका निभाता है। अगर परिवार में किसी महिला को यह समस्या रही हो तो आगे आने वाली पीढ़ी में भी इसका खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा ओवरी की किसी पुरानी सर्जरी, एंडोमेट्रियोसिस जैसी बीमारी और कैंसर के इलाज में दी जाने वाली कीमोथेरेपी या रेडिएशन थेरेपी से भी एग रिजर्व पर बुरा असर पड़ता है। ऑटोइम्यून बीमारियां भी इस समस्या को बढ़ावा दे सकती हैं। बिगड़ी हुई जीवनशैली, अत्यधिक तनाव, धूम्रपान और नींद की कमी भी इस समस्या को और गंभीर बना सकते हैं।

 कैसे पहचाने समस्या

हेल्थ एक्सपर्ट की मानें तो लो ओवेरियन रिजर्व की सबसे बड़ी चुनौती यही है कि बहुत सी महिलाओं में इसका कोई स्पष्ट और दिखने वाला लक्षण नहीं होता। अधिकतर महिलाओं को तब तक इस समस्या का पता नहीं चलता जब तक वे गर्भधारण की कोशिश नहीं करतीं। हालांकि, कुछ संकेत जरूर होते हैं जिन पर ध्यान देना चाहिए। अनियमित पीरियड्स, पीरियड्स का बहुत कम या बहुत अधिक आना, लंबे समय तक गर्भधारण न होना और पीएमएस के लक्षणों में बदलाव इस समस्या के संकेत हो सकते हैं। अगर इनमें से कोई भी लक्षण नजर आए तो तुरंत किसी विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए।

समय पर करवाएं जांच

डॉक्टर बताते हैं कि, आमतौर पर ब्लड टेस्ट और अल्ट्रासाउंड स्कैन से ओवेरियन रिजर्व का आसानी से पता लगाया जा सकता है। इसके लिए एंटी-मुलेरियन हार्मोन यानी एएमएच टेस्ट किया जाता है, जो शरीर में बचे हुए एग रिजर्व की सटीक जानकारी देता है। इसके साथ ही एंट्रल फॉलिकल काउंट यानी एएफसी टेस्ट भी किया जाता है, जिसमें अल्ट्रासाउंड के जरिए ओवरी में मौजूद छोटे-छोटे फॉलिकल्स की गिनती की जाती है।

Low Ovarian Reserve

हेल्थ एक्सपर्ट कहते हैं कि, एग रिजर्व कम होने पर भी कुछ महिलाएं बिना किसी विशेष इलाज के आसानी से मां बन जाती हैं जबकि कुछ को चिकित्सीय सहायता की जरूरत पड़ती है, इसलिए समय पर जांच करवाना और सही जानकारी रखना बेहद जरूरी है ताकि सही समय पर सही निर्णय लिया जा सके।

एग प्रिजर्वेशन है एक बेहतर विकल्प

हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक जो महिलाएं अभी मां नहीं बनना चाहतीं, लेकिन भविष्य में गर्भधारण की इच्छा रखती हैं उनके लिए एग प्रिजर्वेशन एक बेहतरीन और आधुनिक विकल्प है। इस प्रक्रिया में महिला के एग्स को फ्रीज करके सुरक्षित रख लिया जाता है, जिन्हें बाद में जरूरत पड़ने पर इस्तेमाल किया जा सकता है।

यह विकल्प खासकर उन महिलाओं के लिए फायदेमंद है, जो करियर या अन्य कारणों से देर से मां बनने का फैसला कर रही हैं। इसके अलावा जिन महिलाओं को कैंसर का इलाज करवाना हो उनके लिए भी कीमोथेरेपी से पहले एग फ्रीज करवाना एक समझदारी भरा कदम हो सकता है।

सही रखें जीवनशैली

हेल्थ एक्सपर्ट का कहना है कि, हालांकि खानपान और जीवनशैली का एग रिजर्व से सीधा संबंध नहीं है, लेकिन एक स्वस्थ जीवनशैली अपनाने से गर्भधारण की संभावना जरूर बेहतर हो सकती है। संतुलित और पोषण से भरपूर आहार लेना, नियमित व्यायाम करना, तनाव से दूर रहना, धूम्रपान और शराब से परहेज करना और पर्याप्त नींद लेना ये सब मिलकर महिला के समग्र प्रजनन स्वास्थ्य को बेहतर बनाते हैं। अगर आप भविष्य में मां बनने की योजना बना रही हैं तो आज से ही अपनी जीवनशैली को दुरुस्त करना शुरू कर दें और किसी विशेषज्ञ से एक बार जरूर मिलें।

 

इसे भी पढ़ें- हेल्थ टिप्स: क्या सच में प्याज खाने से नहीं लगती लू, जानिए एक्सपर्ट की राय

Related Articles

Back to top button