
वॉशिंगटन। मिडिल ईस्ट में जारी जंग और तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक बातचीत चल रही है। दोनों देश उन 16 अरब डॉलर से ज्यादा के प्रतिबंधित ईरानी फंड को अनलॉक करने के प्रस्ताव पर गंभीर चर्चा कर रहे हैं, जो फिलहाल कतर और दुनिया के विभिन्न देशों में जमा हैं। यूरोपीय अधिकारियों और बातचीत से जुड़े सूत्रों के अनुसार यह प्रस्ताव दोनों देशों के बीच तनाव कम करने और संभावित शांति समझौते की दिशा में एक अहम कदम हो सकता है।
इसे भी पढ़ें- मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर, बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर ईरान ने दागी मिसाइलें
2023 में प्रतिबंधित हुआ था फंड
पहले अमेरिका ने इन फंड्स का सीमित इस्तेमाल केवल मानवीय जरूरतों जैसे दवाइयों और खाद्य पदार्थों की खरीद के लिए करने की अनुमति दी थी, लेकिन अक्टूबर 2023 में इजरायल-हमास युद्ध शुरू होने के बाद सुरक्षा कारणों से इन फंड्स तक ईरान की पहुंच पूरी तरह रोक दी गई थी। अब नया प्रस्ताव थोड़ा अधिक नियंत्रित तरीके का है।

इसके तहत ईरान को अपने जमे हुए फंड का इस्तेमाल करने की अनुमति मिल सकती है, लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे में रहते हुए और सख्त निगरानी के साथ। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि यह धन किसी भी प्रतिबंधित गतिविधि जैसे हथियार कार्यक्रम या आतंकवाद समर्थन में न लगे।
अमेरिकी अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि, किसी भी तरह की प्रतिबंध राहत बिना शर्त नहीं दी जाएगी। ईरान को अपने परमाणु कार्यक्रम से जुड़े वादों पर ठोस प्रगति दिखानी होगी और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े बड़े मुद्दों पर सकारात्मक कदम उठाने होंगे। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों ने बार-बार यही बात दोहराई है कि ईरान के साथ कोई भी समझौता केवल शब्दों पर नहीं बल्कि ठोस कार्रवाइयों पर आधारित होगा।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव बढ़ा
यह चर्चा ऐसे समय में हो रही है जब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव काफी बढ़ा हुआ है। दुनिया के तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी जलडमरूमध्य से गुजरता है। यदि यहां कोई बाधा उत्पन्न हुई तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है। इसी बीच क्षेत्र में कूटनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। यूरोपीय देश, चीन और रूस भी इस मुद्दे पर अपनी भूमिका निभाने की कोशिश कर रहे हैं। कुछ रिपोर्ट्स में अप्रत्यक्ष बातचीत के जरिए दोनों पक्ष एक-दूसरे की चिंताओं को समझने का प्रयास कर रहे हैं।

ईरान की ओर से अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। ईरानी अधिकारियों ने कहा है कि, वे किसी प्रस्ताव का स्वागत करेंगे, लेकिन वह प्रस्ताव ईरान की संप्रभुता, आर्थिक अधिकार और परमाणु कार्यक्रम के शांतिपूर्ण उपयोग के अधिकार का पूरा सम्मान करे। ईरान लंबे समय से अमेरिकी प्रतिबंधों को अपनी अर्थव्यवस्था की सबसे बड़ी समस्या मानता आया है। इन प्रतिबंधों के कारण ईरानी मुद्रा काफी कमजोर हुई है और आम लोगों को महंगाई का भारी सामना करना पड़ रहा है। यदि यह सौदा सफल होता है तो ईरान की अर्थव्यवस्था को तत्काल कुछ राहत मिल सकती है।
इजराइल कर रहा विरोध
मिडिल ईस्ट में तनाव कम होने की संभावना बढ़ेगी और क्षेत्रीय व्यापार व ऊर्जा सुरक्षा पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि कई विशेषज्ञ सतर्क रुख अपनाए हुए हैं। उन्होंने याद दिलाया है कि, 2015 के परमाणु समझौते (JCPOA) का अनुभव अच्छा नहीं रहा था। ऐसे में ईरान पर भरोसा करना और उसे आर्थिक राहत देना दोनों पक्षों के लिए जोखिम भरा साबित हो सकता है। इजरायल इस किसी भी तरह की राहत का खुलकर विरोध कर रहा है।

इजरायली नेतृत्व का कहना है कि ईरान को आर्थिक मदद देने से वह और अधिक आक्रामक हो सकता है। दूसरी ओर कुछ पश्चिमी देश ईरान को बातचीत की मेज पर लाकर क्षेत्र में स्थिरता लाना चाहते हैं। चीन और रूस ईरान के करीबी सहयोगी हैं और वे अमेरिका पर दबाव बना रहे हैं कि वह ईरान के साथ ज्यादा सौहार्दपूर्ण रवैया अपनाए। यह पूरा मुद्दा केवल द्विपक्षीय नहीं है। इसमें पूरी क्षेत्रीय सुरक्षा, परमाणु अप्रसार, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक अर्थव्यवस्था के हित जुड़े हुए हैं।
घरेलू मजबूरियां भी हैं
अभी यह स्पष्ट नहीं है कि यह प्रस्ताव कितना आगे बढ़ पाएगा, क्योंकि दोनों देश अपनी-अपनी घरेलू राजनीतिक मजबूरियों से बंधे हैं। अमेरिका में प्रशासन को कांग्रेस और इजरायल लॉबी का ध्यान रखना पड़ रहा है, वहीं ईरान में सख्त धड़ा किसी भी समझौते को कमजोरी के रूप में देख सकता है। फिर भी इस बातचीत का शुरू होना खुद में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है।
मिडिल ईस्ट जैसे अत्यधिक अस्थिर क्षेत्र में जहां छोटी-सी घटना भी बड़े युद्ध का रूप ले सकती है, वहां कूटनीति और संवाद का रास्ता खुलना उम्मीद जगाता है। अगले कुछ हफ्तों में इस प्रस्ताव पर आगे की प्रगति देखने को मिल सकती है और पूरी दुनिया की नजरें अमेरिका और ईरान के अगले कदमों पर टिकी हुई हैं।
इसे भी पढ़ें- ईरान पर दोबारा बड़े सैन्य हमले की तैयारी में अमेरिका, मिडिल ईस्ट में अलर्ट मोड पर हैं 50 हजार से अधिक सैनिक



