ईरान पर दोबारा बड़े सैन्य हमले की तैयारी में अमेरिका, मिडिल ईस्ट में अलर्ट मोड पर हैं 50 हजार से अधिक सैनिक

वाशिंगटन। मिडिल ईस्ट में फैले बारूद के ढेर पर कभी भी महाविस्फोट हो सकता है, क्योंकि खबर आ रही है कि, अमेरिका अगले हफ्ते ईरान पर दोबारा से बड़े सैन्य हमले करने की अंतिम तैयारी में जुट गया है। पेंटागन ने इसके लिए कई आक्रामक विकल्प तैयार कर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की मेज पर रख दिए हैं, जिन पर आखिरी मुहर लगना बाकी है।

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जमीन पर उतरेंगी स्पेशल फोर्सेज

इस सैन्य योजना की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि, अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने भी स्पष्ट कर दिया है कि जरूरत पड़ने पर सैन्य कार्रवाई का दायरा बढ़ाने का पूरा रोडमैप तैयार है। इन संभावित हमलों में न केवल ईरान के प्रमुख सैन्य और इंफ्रास्ट्रक्चर ठिकानों पर विनाशकारी हवाई हमले शामिल हैं, बल्कि अमेरिकी स्पेशल ऑपरेशन फोर्सेज को जमीन पर उतारकर इस्फहान परमाणु साइट के भीतर दबे एनरिच्ड यूरेनियम पर कब्जा करने जैसा एक बेहद आत्मघाती और जोखिम भरा जमीनी विकल्प भी खुला रखा गया है।

Middle East

पेंटागन की इस योजना के सामने आते ही वैश्विक राजनीति में हड़कंप मच गया है। अमेरिका ने ईरान को चारों तरफ से घेरने के लिए मिडिल-ईस्ट में अपने 50 हजार से अधिक मुस्तैद सैनिकों की तैनाती को और मजबूत कर दिया है। इसके साथ ही समुद्र में दो विशाल एयरक्राफ्ट कैरियर, एक दर्जन से ज्यादा नेवी डेस्ट्रॉयर और आसमान में आधुनिक लड़ाकू विमानों का बेड़ा पूरी तरह एक्टिव मोड में है। इसके अलावा, आदेश मिलते ही किसी भी मोर्चे पर कूदने के लिए 5 हजार जांबाज मरीन और 82वीं एयरबोर्न डिवीजन के 2 हजार पैराट्रूपर्स अलर्ट पर रखे गए हैं।

चीनी राष्ट्रपति से अहम मुलाक़ात

युद्ध की इस भीषण सुगबुगाहट के बीच बीजिंग में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच एक बेहद अहम मुलाकात हुई। इस बैठक में दोनों महाशक्तियां इस बात पर तो सहमत दिखीं कि, मौजूदा युद्ध हर हाल में खत्म होना चाहिए और होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही बिना किसी बाधा के खुली रहनी चाहिए, लेकिन चीन ने इस संकट को सुलझाने में कोई बड़ी या सीधी भूमिका निभाने के संकेत नहीं दिए हैं।

इस बीच, अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने एक नया दावा किया है कि, इस तनाव के माहौल में चीन अब अमेरिका से कच्चे तेल की खरीद बढ़ा सकता है। हालांकि, चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने साफ लहजे में दुनिया को आगाह किया है कि, होर्मुज संकट का स्थायी समाधान केवल कूटनीति, बातचीत और स्थायी युद्धविराम से ही संभव है, न कि सैन्य ताकत के बल पर।

वहीं, वैश्विक स्तर पर भी इस मुद्दे को लेकर असमंजस बरकरार है। नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में इस मुद्दे पर कोई साझा राय नहीं बन सकी और इसके साझा बयान में साफ स्वीकार किया गया कि, ईरान युद्ध को लेकर सभी सदस्य देशों की सोच बिल्कुल अलग-अलग है। दूसरी तरफ, जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्त्ज ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा है कि, वह परमाणु हथियार बनाने की जिद छोड़े और तुरंत बातचीत की टेबल पर आए।

घुटने टेकने के मूड में नहीं ईरान

इस भारी अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच ईरान भी घुटने टेकने के मूड में नहीं दिख रहा है। ईरान की संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रमुख इब्राहिम अजीजी ने घोषणा की है कि ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा और जहाजों के आवागमन को नियंत्रित करने के लिए एक बिल्कुल नया और कड़ा सिस्टम तैयार कर लिया है।

इस नए नियम के तहत जहाजों को केवल ईरान द्वारा तय किए गए खास रूट से ही गुजरने की इजाजत होगी और इसका सीधा लाभ सिर्फ उन्हीं कमर्शियल जहाजों को मिलेगा जो ईरान के साथ पूरा सहयोग करेंगे। इसके साथ ही, ईरानी सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई के करीबी सलाहकार मोहम्मद मोखबर ने कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात को सीधे शब्दों में अंजाम भुगतने की धमकी दी है।

उन्होंने कहा कि, इन देशों ने अपनी जमीन और हवाई क्षेत्र को ईरान के दुश्मनों के हवाले कर अपनी आजादी तक बेच दी है। मोखबर ने चेताया कि ईरान का संयम हमेशा के लिए नहीं है और पिछले हमलों में ईरान ने सिर्फ अमेरिकी ठिकानों को मामूली निशाना बनाया था, लेकिन अगर दोबारा जरूरत पड़ी तो यह पलटवार बेहद खौफनाक होगा। इन तमाम बाहरी चुनौतियों के साथ-साथ ईरान इस वक्त अपनी अंदरूनी आर्थिक बदहाली से भी जूझ रहा है।

डिजिटल मोर्चा भी खुला

इस महासंकट के बीच एक नया और खतरनाक डिजिटल मोर्चा भी खुल गया है। अमेरिका के कई राज्यों में गैस स्टेशनों के ऑटोमैटिक फ्यूल टैंक मॉनिटरिंग सिस्टम पर एक बड़ा साइबर हमला हुआ है, जिसकी सुई सीधे ईरानी हैकर्स की तरफ घूम रही है। हालांकि, इस हैकिंग से कोई बड़ा भौतिक नुकसान नहीं हुआ, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इन घुसपैठों के जरिए तेल की वास्तविक रीडिंग बदलकर किसी बड़े गैस लीक को छिपाने की साजिश रची जा सकती थी। अमेरिकी खुफिया रिपोर्टों के मुताबिक, यह हमला एफबीआई के डायरेक्टर काश पटेल के ईमेल हैक होने की कड़ी का ही हिस्सा हो सकता है।

 

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