
नई दिल्ली। हाल ही में भारतीय जनता पार्टी ने अपने संगठनात्मक ढांचे में बड़ा फेरबदल किया। इसके बाद अब शनिवार को नई टीम की पहली महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बताया जा रहा है कि, बैठक में नए नियुक्त किए गए राष्ट्रीय पदाधिकारियों के साथ आगामी चुनावों को लेकर विस्तृत रणनीति पर चर्चा हुई। साथ ही जमीनी स्तर पर आम जनता तक पार्टी की पहुंच को कैसे और मजबूत बनाया जाए, इस पर भी गहन विचार-विमर्श हुआ। बैठक की अध्यक्षता नितिन नबीन ने की।
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इन चीजों पर रहा फोकस
बैठक के दौरान आने वाले विधानसभा चुनावों की तैयारियों के साथ-साथ जमीनी स्तर पर लोगों को संगठित करने और उन्हें पार्टी से जोड़ने की रणनीति पर विशेष जोर दिया गया। नेताओं का ध्यान इस बात पर भी केंद्रित रहा कि केंद्र और राज्य सरकारों की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी आम जनता तक प्रभावी ढंग से कैसे पहुंचाई जाए।

पार्टी नेतृत्व का मानना है कि, सरकारी योजनाओं का लाभ जब तक जनता तक सही तरीके से नहीं पहुंचता, तब तक उनका राजनीतिक फायदा भी पार्टी को पूरी तरह नहीं मिल पाता। इसी सोच के तहत बैठक में कार्यकर्ताओं को गांव-गांव और बूथ स्तर तक सक्रिय करने की योजना पर भी चर्चा हुई।
दिन भर चलेंगी बैठकें
पार्टी सूत्रों के अनुसार, यह सिर्फ पहली बैठक थी और दिन भर इसी तरह की कई और महत्वपूर्ण बैठकें आयोजित की जानी हैं। इन आगामी बैठकों में उन राज्यों के पार्टी अध्यक्षों, संबंधित राज्य प्रभारियों और मुख्यमंत्रियों के शामिल होने की उम्मीद जताई जा रही है, जहां फिलहाल भाजपा की सरकार है। इस पूरी कवायद के जरिए पार्टी संगठन के हर स्तर पर तालमेल बिठाने और आगामी चुनावी चुनौतियों के लिए एक ठोस रणनीति तैयार करने की कोशिश कर रही है।
टीम में 51 नए चेहरे शामिल
गौरतलब है कि, इससे पहले भाजपा ने नए नेतृत्व के तहत अपनी नई राष्ट्रीय टीम की घोषणा की थी, जिसके साथ ही इस पूरी प्रक्रिया की औपचारिक शुरुआत हुई थी। इस नई टीम में कुल पैंसठ सदस्यों को शामिल किया गया है, जिनमें से 51 चेहरे पूरी तरह नए हैं। यह आंकड़ा साफ दर्शाता है कि, पार्टी नेतृत्व ने संगठन में बड़े पैमाने पर बदलाव करते हुए नई ऊर्जा और नए अनुभव को शामिल करने की कोशिश की है। नई टीम में तेरह राष्ट्रीय उपाध्यक्षों को भी जगह दी गई है, जो संगठन के शीर्ष स्तर पर फैसले लेने की प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाएंगे।
दिग्गज नेताओं को अहम जिम्मेदारी
नई टीम में कई वरिष्ठ और अनुभवी नेताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के पद पर नियुक्त किया गया है। वहीं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े रहे राम माधव को भी इसी पद की जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा केंद्र में पूर्व मंत्री रह चुकीं स्मृति ईरानी को पार्टी के आठ राष्ट्रीय महासचिवों में से एक के रूप में नियुक्त किया गया है, जो संगठन में उनकी वापसी के तौर पर देखा जा रहा है।
संगठनात्मक जिम्मेदारियों के मामले में बीएल संतोष को एक बार फिर राष्ट्रीय महासचिव यानी संगठन के पद पर बनाए रखा गया है, जो पार्टी के भीतर संगठनात्मक कामकाज को संभालने वाला सबसे अहम पद माना जाता है। इसके साथ ही विनोद तावड़े और सुनील बंसल को भी महासचिव के पद पर पूर्ववत बरकरार रखा गया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि पार्टी नेतृत्व इन नेताओं के कामकाज से संतुष्ट है और संगठनात्मक निरंतरता बनाए रखना चाहता है।
महिलाओं को भी मिली जगह
नई राष्ट्रीय टीम की एक और खास बात यह है कि, इसमें सामाजिक विविधता का भी पूरा ध्यान रखा गया है। टीम में बारह महिला नेताओं को शामिल किया गया है, जो पार्टी के भीतर महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को दर्शाता है। इसके अलावा अल्पसंख्यक समुदायों से आने वाले छह नेताओं को भी नई टीम में जगह दी गई है। इस तरह की संतुलित नियुक्तियां पार्टी की उस रणनीति का हिस्सा मानी जा रही हैं, जिसके तहत वह समाज के अलग-अलग वर्गों तक अपनी पहुंच और स्वीकार्यता को और मजबूत करना चाहती है।
कोशाध्यक्ष बनाए गए पीयूष गोयल
नई टीम में एक और उल्लेखनीय बदलाव केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल को लेकर हुआ है। उन्हें भाजपा में राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष का पद सौंपा गया है। दिलचस्प बात यह है कि, यह वही पद है, जिसे पीयूष गोयल मई 2014 में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली पहली केंद्र सरकार में मंत्री बनने से पहले संभाल चुके हैं। एक तरह से उनकी यह जिम्मेदारी करीब एक दशक बाद संगठन में उनकी पुरानी भूमिका की वापसी के तौर पर देखी जा रही है।
आईटी विभाग में भी हुआ फेरबदल
पार्टी ने अपने आईटी विभाग की कमान में भी बड़ा फेरबदल किया है। लंबे समय तक इस जिम्मेदारी को संभालने वाले अमित मालवीय को आईटी विभाग के प्रमुख पद से हटा दिया गया है और उनकी जगह छत्तीसगढ़ के दीपक म्हास्के को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह बदलाव पार्टी की डिजिटल और सोशल मीडिया रणनीति में नई सोच लाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
इसके अलावा पार्टी के युवा मोर्चा में भी नेतृत्व परिवर्तन किया गया है। गुजरात के हेमांग जोशी को अब पार्टी के युवा मोर्चा का नया अध्यक्ष बनाया गया है। वे लोकसभा सांसद तेजस्वी सूर्या की जगह लेंगे, जो अब तक इस जिम्मेदारी को संभाल रहे थे। युवा मोर्चा में हुआ यह बदलाव आने वाले चुनावों में युवा मतदाताओं तक पार्टी की पहुंच बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
संतुलित रणनीति बनाने की कोशिश
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि, भाजपा की यह पूरी संगठनात्मक कवायद आने वाले कई महत्वपूर्ण विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए की गई है। नए चेहरों को शामिल करने के साथ-साथ अनुभवी नेताओं को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां देकर पार्टी ने एक संतुलित रणनीति अपनाने की कोशिश की है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि नई टीम अपनी पहली बैठक में बनाई गई रणनीतियों को जमीनी स्तर पर किस तरह लागू करती है और आने वाले चुनावों में इसका पार्टी को कितना राजनीतिक फायदा मिलता है। आने वाले दिनों में होने वाली अन्य बैठकों पर भी राजनीतिक हलकों की नजर बनी रहेगी, क्योंकि इनसे यह स्पष्ट होगा कि पार्टी की चुनावी रणनीति किस दिशा में आगे बढ़ रही है।
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