
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में पिछले दिनों पेपर लीक मामले को लेकर छात्रों द्वारा किए गए आंदोलन के बाद अब एक नया विवादास्पद आंदोलन जोर पकड़ता नजर आ रहा है। इस बार ‘आरक्षण हटाओ आंदोलन’ के बैनर तले भारी संख्या में लोग जंतर-मंतर पर एकत्रित होने लगे हैं। ये प्रदर्शनकारी आरक्षण व्यवस्था को पूरी तरह समाप्त किए जाने की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे हैं।
हालांकि, दिल्ली पुलिस ने इस पूरे मामले में अपना रुख बिल्कुल स्पष्ट कर दिया है और साफ तौर पर कहा है कि जंतर-मंतर पर किसी भी प्रकार के प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोग जंतर-मंतर की ओर पहुंचते रहे, जिसके चलते पुलिस प्रशासन को मौके पर सुरक्षा के बेहद कड़े इंतजाम करने पड़े।
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मौके पर भारी पुलिस बल तैनात
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जंतर-मंतर पर भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई है। इस दौरान नई दिल्ली जिले के डीसीपी सचिन शर्मा भी खुद मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। दिल्ली पुलिस की ओर से शुरुआत में लाउडस्पीकर के माध्यम से प्रदर्शनकारियों को यह स्पष्ट रूप से सूचित किया गया था कि, उन्हें इस स्थान पर प्रदर्शन करने की अनुमति नहीं दी गई है।

इसके बाद पुलिस प्रशासन ने एक कदम और आगे बढ़ते हुए जंतर-मंतर पर जगह-जगह पोस्टर भी लगा दिए, ताकि प्रदर्शनकारियों को स्पष्ट रूप से यह जानकारी मिल सके कि यहां प्रदर्शन करना पूरी तरह प्रतिबंधित है। हालांकि, इसी बीच पुलिस प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों को एक विकल्प भी दिया।
पुलिस ने 21 अगस्त को रामलीला मैदान में दोपहर 4 बजे तक शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन करने के लिए आधिकारिक अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) जारी किया। हालांकि यह भी स्पष्ट किया गया कि रामलीला मैदान में होने वाला यह प्रदर्शन भी संबंधित विभागों की पूर्व अनुमति और कुछ निर्धारित शर्तों के अधीन ही आयोजित किया जा सकेगा।
जंतर-मंतर पर बैरिकेड्स में की गई वेल्डिंग
सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने के उद्देश्य से जंतर-मंतर के दोनों तरफ लगाए गए बैरिकेड्स में विशेष रूप से वेल्डिंग की गई है। वेल्डिंग का काम कर रहे कर्मचारियों के अनुसार, दिल्ली पुलिस की ओर से स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि सभी बैरिकेड्स को आपस में मजबूती से जोड़ा जाए, ताकि उन्हें आसानी से तोड़ा न जा सके। इसके साथ ही मौके पर मल्टी लेवल बैरिकेडिंग की व्यवस्था भी की गई है, जो सुरक्षा की दृष्टि से एक और महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
गौरतलब है कि, इस पूरी सुरक्षा व्यवस्था में केवल दिल्ली पुलिस के जवान ही नहीं, बल्कि पैरामिलिट्री फोर्सेस के जवान भी मौके पर तैनात किए गए हैं। इतनी बड़ी संख्या में सुरक्षाबलों की तैनाती इस बात का स्पष्ट संकेत है कि प्रशासन इस आंदोलन को लेकर किसी भी प्रकार की चूक की गुंजाइश नहीं छोड़ना चाहता।
पिछली घटना से सबक लेकर बढ़ाई गई सुरक्षा
दरअसल, दिल्ली पुलिस द्वारा इस बार इतनी सख्त और मजबूत सुरक्षा व्यवस्था अपनाए जाने के पीछे एक अहम वजह भी है। इससे पहले हुए एक प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड्स को तोड़ते हुए संसद भवन की दिशा में पहुंचने की कोशिश की थी, जिसने प्रशासन के लिए एक गंभीर चुनौती खड़ी कर दी थी। उसी पुरानी घटना से सबक लेते हुए इस बार दिल्ली पुलिस ने पहले से ही एहतियाती कदम उठाते हुए सुरक्षा व्यवस्था को कई गुना ज्यादा मजबूत और चाकचौबंद बना दिया है, ताकि इस तरह की कोई भी अप्रिय घटना दोबारा न हो सके।
आरक्षण हटाने की मांग पर अड़े हैं प्रदर्शनकारी
इस पूरे मामले में एबीपी न्यूज की टीम ने मौके पर पहुंचकर विस्तृत ग्राउंड रिपोर्ट तैयार की, जिसमें यह स्पष्ट रूप से सामने आया कि प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर पूरी तरह अड़े हुए हैं। प्रदर्शन में शामिल लोगों का साफ कहना है कि, वे किसी भी परिस्थिति में जंतर-मंतर स्थल को खाली नहीं करेंगे, भले ही पुलिस प्रशासन ने उन्हें रामलीला मैदान में प्रदर्शन की अनुमति दिए जाने का पूरा आश्वासन दिया हो।

रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस प्रशासन की ओर से लगातार प्रदर्शनकारियों से जंतर-मंतर खाली करने की अपील की जाती रही, लेकिन प्रदर्शनकारी अपने रुख पर कायम रहे। इस पूरी स्थिति के बीच एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम यह भी सामने आया कि, जंतर-मंतर पर सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह मजबूत करने के बाद अंततः प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर परिसर में जाने की अनुमति दे दी है।
बढ़ रही हलचल
इस पूरे घटनाक्रम ने राजधानी दिल्ली में एक बार फिर आरक्षण जैसे संवेदनशील मुद्दे को लेकर बहस को हवा दे दी है। पेपर लीक मामले को लेकर हुए छात्र आंदोलन के ठीक बाद आरक्षण हटाओ आंदोलन का उभरना यह दर्शाता है कि, दिल्ली में विभिन्न मुद्दों को लेकर सामाजिक और राजनीतिक असंतोष लगातार सतह पर आता जा रहा है।
प्रशासन के लिए यह स्थिति एक बड़ी चुनौती के रूप में सामने आई है, क्योंकि एक तरफ उसे कानून व्यवस्था बनाए रखनी है, तो दूसरी तरफ प्रदर्शनकारियों के अधिकारों का भी सम्मान करना है। हालांकि, जिस तरह से जंतर-मंतर पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और बैरिकेडिंग को मजबूत किया गया है, उससे यह स्पष्ट है कि प्रशासन किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।
आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या प्रदर्शनकारी पुलिस के आश्वासन के अनुसार रामलीला मैदान का रुख करते हैं, या फिर जंतर-मंतर पर उनका यह धरना आगे भी जारी रहता है। फिलहाल स्थिति पूरी तरह तनावपूर्ण बनी हुई है, और प्रशासन की निगाहें लगातार इस पूरे घटनाक्रम पर टिकी हुई हैं।
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