किसी को गिफ्ट में लड्डू गोपाल देना चाहिए या नहीं, जान लें क्या कहता है शास्त्र

हिंदू धर्म में त्योहारों, विवाह या किसी भी मांगलिक अवसर पर भगवान की प्रतिमा उपहार में देना एक पुरानी परंपरा रही है। लोग इसे आशीर्वाद और शुभता का प्रतीक मानते हैं, माना जाता है कि भगवान की प्रतिमा गिफ्ट करने से व्यक्ति पर उनकी कृपा बनी रहेगी, लेकिन जब बात भगवान श्री कृष्ण के बाल स्वरूप लड्डू गोपाल की आती है, तो ज्योतिष शास्त्र और धर्म गुरु कुछ विशेष सावधानियां बरतने की सलाह देते हैं।

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केवल मूर्ति नहीं है, घर का बच्चा हैं लड्डू गोपाल

लड्डू गोपाल को केवल एक मूर्ति नहीं, बल्कि घर का एक जीवित सदस्य और बच्चा माना जाता है। ऐसे में किसी को लड्डू गोपाल भेंट करना जितना पुण्य का काम है, नियमों की अनदेखी करने पर उतना ही दोषपूर्ण माना जाता है। आइए जानते हैं, लड्डू गोपाल को गिफ्ट में देना कब सही होता है और कब यह आपके लिए परेशानियों का कारण बन सकता है।

सनातन परंपरा में लड्डू गोपाल की सेवा को सबसे कठिन और सबसे फलदायी माना गया है। घर में लड्डू गोपाल की स्थापना का अर्थ है कि, आपने साक्षात श्री कृष्ण को अपने घर के बच्चे के रूप में स्वीकार कर लिया है। उनकी सेवा पूजा नहीं, बल्कि वात्सल्य सेवा कहलाती है। उन्हें समय पर जगाना, स्नान कराना, नए वस्त्र पहनाना, दिन में कई बार भोग लगाना और रात को सुलाना ये सभी कार्य एक माता-पिता की तरह करने होते हैं। यही कारण है कि, उन्हें किसी को उपहार में देने से पहले कई बार सोचना पड़ता है।

 मन्दिर में रखे लड्डू गोपाल नहीं देना चाहिए गिफ्ट

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, यह सबसे बड़ी गलती मानी जाती है। अगर आपके घर के मंदिर में लड्डू गोपाल पहले से स्थापित हैं और आप उनकी सेवा कर रहे हैं, तो उन्हें कभी भी किसी दूसरे व्यक्ति को उपहार में न दें। धार्मिक मान्यता है कि, घर में स्थापित लड्डू गोपाल उस परिवार के साथ जुड़ जाते हैं। उन्हें किसी और को देने का अर्थ है अपने घर की सुख-समृद्धि, बरकत और खुशियों को विदा कर देना। ऐसा करने से न केवल आपके घर की शांति भंग हो सकती है, बल्कि कान्हा का वियोग आपको मानसिक और आर्थिक कष्ट भी दे सकता है।

किसे भूलकर भी न दें लड्डू गोपाल?

उपहार देते समय व्यक्ति की पात्रता देखना बेहद जरूरी है। लड्डू गोपाल को कभी भी ऐसे व्यक्ति को न दें, जो भावहीन हो यानी जिसे भक्ति के मार्ग में तनिक भी रुचि न हो या जो उसे केवल सजावट की वस्तु समझे।

ऐसे लोग जो नौकरी या काम के सिलसिले में इतने व्यस्त रहते हैं कि, वे समय पर कान्हा को भोग नहीं लगा सकते और शयन नहीं करा सकते।

धार्मिक शास्त्रों में कहा गया है कि, जिस घर में मांस-मदिरा का सेवन होता हो या जहां साफ-सफाई का ध्यान न रखा जाता हो, वहां लड्डू गोपाल को भेंट करना उनका घोर अपमान माना जाता है। ऐसे घर में कान्हा को भेजने से देने वाले व्यक्ति पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ते हैं।

हालांकि, इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि आप लड्डू गोपाल गिफ्ट नहीं कर सकते। यदि आप बाजार से नई प्रतिमा खरीदकर लाते हैं, तो उसे आशीर्वाद के रूप में दूसरों को भेंट करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

खासकर गर्भवती महिलाओं को लड्डू गोपाल की प्रतिमा उपहार में देना बहुत फलदायी होता है। माना जाता है कि, इससे होने वाला बच्चा कृष्ण जैसा तेजस्वी और गुणवान होता है। इसके अलावा, यदि कोई नवविवाहित जोड़ा या कोई ऐसा भक्त है, जो लंबे समय से कान्हा की सेवा करना चाहता है, तो उन्हें लड्डू गोपाल भेंट करना आपके लिए भी पुण्य का द्वार खोलता है।

जब भी आप किसी को लड्डू गोपाल उपहार में दें, तो केवल मूर्ति थमाकर अपनी जिम्मेदारी पूरी न समझें। उनसे कुछ विनम्र आग्रह अवश्य करें जैसे  कि…

उन्हें समझाएं कि लड्डू गोपाल को प्रतिदिन स्नान कराना और साफ-सुथरे वस्त्र पहनाना अनिवार्य है।

जिस घर में लड्डू गोपाल हों, वहां तामसिक भोजन यानी प्याज-लहसुन और मांसाहार से परहेज करना चाहिए।

उन्हें बताएं कि, छोटे बच्चे की तरह लड्डू गोपाल को घर में कभी अकेला नहीं छोड़ना चाहिए। यदि परिवार कहीं बाहर जा रहा है, तो कान्हा को भी साथ ले जाएं या किसी पड़ोसी/रिश्तेदार को उनकी सेवा सौंपकर जाएं।

लड्डू गोपाल का उपहार देना प्रेम और सद्भावना का प्रतीक है, लेकिन यह उपहार सामने वाले के लिए एक बड़ी जिम्मेदारी भी लेकर आता है। यदि आपको लगता है कि, सामने वाला व्यक्ति पूरी निष्ठा और शुद्धता के साथ सेवा कर पाएगा, तभी उन्हें यह दिव्य उपहार दें। याद रखें, कान्हा भाव के भूखे हैं और उनके अपमान का अर्थ है अपने जीवन में समस्याओं को न्योता देना। सही पात्र को दिया गया यह उपहार आपके और लेने वाले, दोनों के जीवन को खुशियों से भर सकता है।

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