समीरा रेड्डी का छलका दर्द, बताया- हकलाने की वजह से बचपन में सुनने पड़े ताने, लेनी पड़ी स्पीच थेरेपी

बॉलीवुड में अपनी बेबाक पहचान और बॉडी पॉजिटिविटी के लिए मशहूर अभिनेत्री समीरा रेड्डी एक बार फिर चर्चा में हैं। अक्सर अपनी प्रेग्नेंसी के बाद बढ़े वजन, सफेद बालों और मानसिक स्वास्थ्य पर खुलकर बात करने वाली समीरा ने इस बार अपने बचपन के एक ऐसे संघर्ष को साझा किया है, जिसने उनके व्यक्तित्व को गहराई तक प्रभावित किया। समीरा ने खुलासा किया है कि, वह बचपन में हकलाने की समस्या से जूझ रही थीं, जिसके कारण उन्हें न केवल सामाजिक उपहास सहना पड़ा, बल्कि उनके आत्मविश्वास को भी भारी ठेस पहुंची।

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बचपन में मिला गहरा जख्म

बॉलीवुड की बोल्ड समीरा रेड्डी ने बॉडी शेमिंग और डिप्रेशन के बाद अब अपने बचपन के उस गहरे जख्म को उजागर किया है, जिसके कारण लोग उनका मजाक उड़ाते थे। वह थी उनकी हकलाने की समस्या, जिसने उनके आत्मविश्वास को तोड़ दिया था और इसके लिए उन्हें लंबे समय तक थेरेपी लेनी पड़ी।  इस थेरेपी ने उन्हें नया जीवन दिया।

Sameera Reddy

हाल ही में एक साक्षात्कार में अपनी आपबीती सुनाते हुए समीरा ने कहा कि, बचपन में जब वह बोलने में अटकती थीं, तो लोग उन्हें तरह-तरह के नामों से बुलाते थे। उन्होंने बताया कि समाज और स्कूल में बच्चों को दिए जाने वाले लेबल जैसे मंदबुद्धि, बुद्धू या कमजोर कितने घातक हो सकते हैं।

समीरा ने कहा, बचपन के ये लेबल बच्चे के दिमाग पर बहुत गहरा असर डालते हैं। जब किसी बच्चे को बार-बार कमजोर या बुद्धू कहा जाता है, तो वह धीरे-धीरे इस बात पर भरोसा करने लगता है कि वह वास्तव में वैसा ही है। यह भरोसा उसके आत्मविश्वास को हिला देता है और वह बच्चा कोशिश करना ही छोड़ देता है।

पेरेंटिंग के उतार रहीं सीख

समीरा ने बताया कि इस समस्या से उबरना उनके लिए आसान नहीं था। हकलाने की वजह से पैदा हुई हीन भावना को दूर करने के लिए उन्हें कई सालों तक स्पीच थेरेपी और काउंसलिंग का सहारा लेना पड़ा। उन्होंने कहा, मैं आज भी कभी-कभी हकलाती हूं। जब कोई इस पर गलत रिएक्शन देता है, तो आज भी बुरा लगता है, लेकिन अब मैंने खुद को स्वीकार करना सीख लिया है। सालों की थेरेपी के बाद मेरा खोया हुआ आत्मविश्वास वापस आया और मैंने खुद को दुनिया के सामने मजबूती से रखना शुरू किया।

 

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आज दो बच्चों की मां समीरा अपनी इस सीख को अपनी पेरेंटिंग में भी उतार रही हैं। वह नहीं चाहतीं कि, उनके बच्चों को कभी वैसी हीन भावना का सामना करना पड़े। समीरा ने बताया कि, वह अपने बच्चों के साथ हर मुद्दे पर खुलकर बात करती हैं। वह अपने बच्चों को सिखाती हैं कि किसी भी एक कमी या संघर्ष से आपकी पहचान तय नहीं होती। वह उन्हें यह भी सिखाती हैं कि, कभी किसी को नीचा नहीं दिखाना चाहिए और हर किसी की विशिष्टता का सम्मान करना चाहिए।

पोस्टपार्टम डिप्रेशन पर भी बोल चुकी हैं समीरा

यह पहली बार नहीं है जब समीरा ने अपने जीवन के काले अध्यायों पर बात की हो। इससे पहले वह पोस्टपार्टम डिप्रेशन यानी डिलीवरी के बाद होने वाला तनाव और फिल्म इंडस्ट्री के परफेक्ट लुक के दबाव पर भी बोल चुकी हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी बिना मेकअप वाली तस्वीरें और सफेद बाल दिखाकर यह संदेश दिया था कि असली होना ही सबसे बड़ी खूबसूरती है। समीरा का मानना है कि सेलिब्रिटीज को अपनी कमजोरियों पर भी बात करनी चाहिए ताकि आम लोग, जो इसी तरह की समस्याओं से जूझ रहे हैं, खुद को अकेला न महसूस करें।

समीरा की यह कहानी केवल एक अभिनेत्री के संघर्ष की नहीं है, बल्कि उन लाखों बच्चों और बड़ों की है जो किसी न किसी शारीरिक या मानसिक चुनौती के कारण समाज के तानों का शिकार होते हैं। समीरा का यह बयान शिक्षा प्रणाली और अभिभावकों के लिए भी एक सबक है कि वे बच्चों की क्षमताओं को केवल उनके बोलने या पढ़ने की गति से न आंकें।

 

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