
गोरखपुर। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव का समय जैसे-जैसे नजदीक आता जा रहा है। वैसे-वैसे सियासत भी गरमाती जा रही है। जातीय समीकरणों को लेकर बयानबाजी भी तेज हो गई है। आगामी चुनावों को देखते हुए समाजवादी पार्टी ब्राह्मण वोटरों को अपने पाले में लाने के लिए भरसक प्रयास कर रही है। इसी कड़ी में पार्टी ने अयोध्या से पवन पांडेय को अपना पहला उम्मीदवार घोषित करते हुए एक बड़ा संदेश देने की कोशिश की है।
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सपा के इस कदम को लेकर अब भारतीय जनता पार्टी के सांसद रवि किशन ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि ब्राह्मण समाज कोई खिलौना नहीं है, जिसे कोई भी पीडीए यानी पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक के नाम पर आसानी से बरगला सके। रवि किशन के इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है और इसे सीधे तौर पर समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव पर निशाना माना जा रहा है।
पीडीए की परिभाषा पर उठाए सवाल
गोरखपुर से बीजेपी सांसद रवि किशन ने समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि, यह लोग बार-बार पीडीए की परिभाषा को अपनी सुविधा के हिसाब से बदल रहे हैं। रवि किशन के मुताबिक, कभी सपा नेताओं के लिए पीडीए का मतलब दलित, पिछड़ा और अल्पसंख्यक होता है, तो वहीं जब चुनावी माहौल बनता है तो यही लोग पीडीए में शामिल P अक्षर को पंडित यानी ब्राह्मण समाज से जोड़ने लगते हैं।

उन्होंने इस पूरे रवैये पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि, इस तरह बार-बार परिभाषा बदलना समाज को गुमराह करने जैसा है। रवि किशन ने आगे कहा कि वह अखिलेश यादव से यह स्पष्ट रूप से कहना चाहते हैं कि, ब्राह्मण समाज कोई खिलौना नहीं है, जिसे इतनी आसानी से बरगलाया जा सके।
स्वाभिमानी और राष्ट्रभक्त होता है ब्राह्मण समाज
अपने बयान में रवि किशन ने ब्राह्मण समाज की विशेषताओं का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ब्राह्मण समाज स्वभाव से ही स्वाभिमानी और राष्ट्रभक्त रहा है। यह समाज किसी के बहकावे या छलावे में आने वाला नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि, ब्राह्मणों के बारे में कुछ भी बोल देना बेहद आसान माना जाता है, लेकिन असल में यह समाज इतना सरल नहीं है कि उसे राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल किया जा सके।
रवि किशन ने अपने बयान में धार्मिक संदर्भ का भी सहारा लिया और कहा कि, ब्राह्मण समाज को ब्रह्म के मुख से उत्पन्न माना जाता है, इसलिए इस समाज को आसानी से गुमराह नहीं किया जा सकता। उनके मुताबिक, यह समाज हमेशा से राष्ट्रभक्ति और स्वाभिमान के साथ अपनी पहचान बनाए रखता आया है।
कांग्रेस शासनकाल का किया जिक्र
रवि किशन ने अतीत का हवाला देते हुए कांग्रेस सरकार के कार्यकाल का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जब देश में कांग्रेस की सरकार हुआ करती थी, तब ब्राह्मण समाज के साथ किस तरह का व्यवहार किया जाता था, यह बात किसी से छिपी नहीं है और यह अब इतिहास का हिस्सा बन चुकी है। रवि किशन ने तंज कसते हुए कहा कि अब जब चुनाव नजदीक आ रहे हैं, तो अचानक सभी राजनीतिक दलों को ब्राह्मण समाज की याद आने लगी है।
उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि, पूरे देश में ब्राह्मण समाज की आबादी महज तीन प्रतिशत के आसपास है। इसके बावजूद यह समाज एक बुद्धिजीवी वर्ग माना जाता है, जो हर फैसला बेहद सोच-समझकर लेता है। उनके मुताबिक, इसी वजह से इस समाज को किसी भी राजनीतिक रणनीति के जरिए आसानी से प्रभावित नहीं किया जा सकता।
योगी आदित्यनाथ की चुटकी पर भी दिया जवाब
इस पूरे मामले के बीच जब रवि किशन से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा ली गई एक चुटकी को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने संक्षिप्त लेकिन आस्था से भरा जवाब देते हुए इसे महादेव का आशीर्वाद बताया। उनके इस जवाब से साफ झलकता है कि वह इस पूरे मुद्दे को हल्के-फुल्के अंदाज में भी लेने से नहीं हिचकिचाते, भले ही राजनीतिक स्तर पर वह अपनी बात को पूरी गंभीरता से रखते हों।
अखिलेश यादव का बीजेपी पर पलटवार
गौरतलब है कि, यह पूरा विवाद कोई नया नहीं है, बल्कि यह लंबे समय से चली आ रही राजनीतिक बयानबाजी का ही एक हिस्सा है।सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव लगातार भाजपा पर यह आरोप लगाते रहे हैं कि, बीजेपी शासनकाल में ब्राह्मण समाज की लगातार उपेक्षा की जा रही है। अखिलेश यादव का दावा है कि, वर्तमान बीजेपी सरकार में ब्राह्मण समाज को वह सम्मान और भागीदारी नहीं मिल पा रही है, जिसका वह हकदार है।

अपने इसी रुख को आगे बढ़ाते हुए हाल ही में अखिलेश यादव ने सपा के संस्थापक सदस्यों में शुमार रहे जनेश्वर मिश्र की जयंती भी बेहद धूमधाम के साथ मनाई थी। माना जा रहा है कि, यह आयोजन भी सपा की उसी रणनीति का हिस्सा था, जिसके तहत पार्टी ब्राह्मण समाज के बीच अपनी पैठ मजबूत करने में जुटी हुई है।
तेज हुई जातीय राजनीति
खैर, उत्तर प्रदेश की राजनीति में जातीय समीकरणों को साधने की कवायद फिर से तेज हो गई है। जहां एक ओर सपा ब्राह्मण समाज को अपने पीडीए फॉर्मूले के दायरे में लाने की कोशिश कर रही है। वहीं दूसरी ओर बीजेपी नेता इसे महज एक चुनावी रणनीति करार देते हुए इस पर कड़ा एतराज जता रहे हैं।
रवि किशन का यह बयान इसी बड़ी राजनीतिक जंग का एक हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें दोनों प्रमुख दल अपने-अपने तरीके से ब्राह्मण वोट बैंक को साधने में जुटे हुए हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस बयानबाजी का असर आगामी चुनावी नतीजों पर किस तरह पड़ता है।
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