
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में राशन वितरण व्यवस्था पर इस समय संकट में है। लंबित मांगों को लेकर प्रदेश भर के हजारों कोटेदार मंगलवार को राजधानी लखनऊ पहुंचे थे और विधानसभा का घेराव करने की योजना बना रहे थे। हालांकि, पुलिस प्रशासन ने चारबाग रेलवे स्टेशन के पास ही उन्हें रोक लिया और इको गार्डन भेज दिया। इससे विधानसभा तक पहुंचने की कोटेदारों की योजना विफल हो गई। इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब कोटेदारों ने साफ शब्दों में चेतावनी दे दी है कि, अगर सरकर ने जल्द ही उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया, तो अगस्त में राशन वितरण पूरी तरह ठप कर दिया जाएगा।
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प्रदर्शन के दौरान तनावपूर्ण माहौल
मंगलवार को जब बड़ी संख्या में कोटेदार अपनी मांगों को लेकर लखनऊ पहुंचे, तो पुलिस-प्रशासन ने उन्हें चारबाग स्टेशन के पास ही रोक लिए और इको गार्डन की तरफ भेज दिया। साथ ही भारी पुलिस बल भी तैनात कर दिया गया था, ताकि कोटेदारों किसी भी हाल में विधानसभा तक न पहुंच सकें।

खबर है कि जैसे ही कोटेदारों का जत्था चारबाग पहुंचा, पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया और उन्हें इको गार्डन की ओर मोड़ दिया। इस दौरान कोटेदारों और पुलिस के बीच काफी देर तक तनाव और नोकझोंक की स्थिति बनी रही। कोटेदार अपनी मांगों को लेकर अड़े रहे और विधानसभा तक पहुंचने पर जोर देते रहे, लेकिन पुलिस प्रशासन उन्हें रोकने में सफल रहा।
इको गार्डन में रोके जाने के बाद कोटेदारों में प्रशासन के इस रवैये को लेकर भारी नाराजगी देखी गई। संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि सरकार उनकी जायज मांगों को अनदेखा कर रही है, उन्हें बार-बार सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर किया जा रहा है।
प्रदेश में 70 हजार कोटेदार
गौरतलब है कि, उत्तर प्रदेश के 75 जिलों में इस समय कुल 70 हजार कोटेदार कार्यरत हैं, जो हर महीने करीब 80 लाख कुंतल राशन का वितरण करते हैं। यह आंकड़ा इस बात की गवाही देता है कि प्रदेश की खाद्य सुरक्षा व्यवस्था में कोटेदारों की भूमिका कितनी अहम है। कोटेदारों का कहना है कि, वे राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम और प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं के तहत जरूरतमंद और गरीब परिवारों को निशुल्क राशन उपलब्ध कराने की अहम जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
हालांकि, कोटेदारों की शिकायत है कि, इतनी बड़ी जिम्मेदारी निभाने के बावजूद उन्हें मिलने वाला कमीशन देश के अन्य राज्यों की तुलना में बेहद कम है। उनका कहना है कि, यह असमानता उनके लिए आर्थिक रूप से बेहद नुकसानदायक साबित हो रही है। यही वजह है कि, वे लंबे समय से सरकार से कमीशन में बढ़ोतरी की मांग करते आ रहे हैं।
कोटेदारों की प्रमुख मांगें
कोटेदार संगठन की मांगों की सूची में सबसे ऊपर कमीशन बढ़ाने की मांग है। इसके साथ ही उन्होंने नियमित मानदेय दिए जाने, पिछले तीन महीनों से लंबित भुगतान को जल्द जारी करने और अन्य राज्यों में कोटेदारों को मिलने वाली सुविधाओं के समान सुविधाएं उत्तर प्रदेश में भी लागू करने की मांग रखी है।
कोटेदारों ने आंकड़ों के जरिए अपनी बात रखते हुए बताया कि, उत्तर प्रदेश में उन्हें फिलहाल प्रति कुंतल केवल 90 रुपए का कमीशन मिलता है, जबकि हरियाणा और गोवा जैसे राज्यों में यह दर 200 रुपए प्रति कुंतल तक है। यह अंतर लगभग दोगुने से भी अधिक का है, जिसे लेकर कोटेदार खासे नाराज हैं।
इतना ही नहीं, कोटेदारों ने यह भी बताया कि, कुछ राज्यों में तो न्यूनतम आय गारंटी योजना के तहत कोटेदारों को सालाना दो लाख रुपए तक की सुविधा भी दी जा रही है, जो उत्तर प्रदेश में फिलहाल उपलब्ध नहीं है।
कोटेदारों की आर्थिक स्थिति पर सवाल
कोटेदार संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि, जिस तरह से वे सरकार की योजनाओं को जमीनी स्तर पर लागू करने का काम कर रहे हैं, उस हिसाब से उन्हें मिलने वाला पारिश्रमिक बेहद कम है। उनका कहना है कि, दुकान का किराया, बिजली का बिल, कर्मचारियों का वेतन और अन्य खर्चों को पूरा करने के बाद उनके पास बहुत कम मुनाफा बचता है। ऐसे में वे लगातार सरकार से यह अपील करते रहे हैं कि उनका कमीशन बढ़ाया जाए ताकि वे बेहतर तरीके से अपना जीवन-यापन कर सकें।
प्रशासन का रुख
फिलहाल पुलिस और प्रशासन ने सभी कोटेदारों को इको गार्डन में ही रोक रखा है, ताकि विधानसभा के आसपास कोई अव्यवस्था न फैले, लेकिन कोटेदारों के तेवर और उनके बयानों से यह साफ झलक रहा है कि, यदि सरकार ने जल्द ही उनकी मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया, तो आने वाले दिनों में यह आंदोलन और अधिक उग्र रूप ले सकता है।

कोटेदार संगठन ने साफ कह दिया है कि यह सिर्फ एक चेतावनी है और अगर सरकार ने उनकी बात नहीं सुनी, तो वे अगस्त महीने में पूरे प्रदेश में राशन वितरण को पूरी तरह ठप करने से भी पीछे नहीं हटेंगे। यह स्थिति आम जनता, खासकर गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए बड़ी चिंता का विषय बन सकती है, क्योंकि यदि राशन वितरण रुकता है तो लाखों परिवारों के सामने खाद्य सुरक्षा का संकट खड़ा हो सकता है।
आम जनता पर पड़ सकता है असर
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में लाखों गरीब परिवार प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत मिलने वाले निशुल्क राशन पर निर्भर हैं। अगर कोटेदारों की हड़ताल की चेतावनी हकीकत में बदलती है, तो इसका सीधा असर उन परिवारों पर पड़ेगा जो हर महीने सरकारी राशन की दुकानों से अपना अनाज लेते हैं। ऐसे में यह देखना अहम होगा कि प्रदेश सरकार इस मामले में क्या रुख अपनाती है और कोटेदारों की मांगों पर किस तरह की कार्रवाई करती है, ताकि आम जनता को किसी भी तरह की
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