यूपी में सियासी बवाल, STF ने सपा प्रवक्ता मनोज यादव को लिया हिरासत में, पार्टी बोली-‘आवाज दबाने की साजिश’

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में आज उस वक्त बड़ी हलचल मच गई, जब लखनऊ एसटीएफ की एक विशेष टीम ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता मनोज यादव को बाराबंकी जिले के सफदरगंज इलाके से हिरासत में ले लिया। मनोज यादव पिछले दो दिन से लापता बताए जा रहे थे। इसे लेकर उनकी पार्टी में सोशल मीडिया पर भी चिंता जताई थी और सरकार व पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए थे।

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आज 13 फरवरी 2026 को सुबह हुई मनोज की गिरफ्तारी से प्रदेश में सियासी पारा चढ़ गया है। समाजवादी पार्टी ने इसे युवाओं की आवाज दबाने की साजिश करार दिया है।

ये है घटनाक्रम

मनोज यादव

बताया जा रहा है कि, मनोज यादव अपने कुछ साथियों के साथ सफदरगंज क्षेत्र से गुजर रहे थे, तभी लखनऊ से आई एसटीएफ की टीम ने उन्हें रोककर हिरासत में ले लिया। गिरफ्तारी के तुरंत बाद उन्हें बड़ागांव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) ले जाया गया, जहां उनका अनिवार्य मेडिकल चेकअप कराया गया। मेडिकल जांच के बाद कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच उन्हें लखनऊ ले जाया गया, लेकिन बाद में बाराबंकी पुलिस को सुपुर्द कर दिया गया। पुलिस सूत्रों ने बताया कि, उन्हें आज ही बाराबंकी कोर्ट में पेश किया जाएगा, जहां रिमांड या जमानत पर सुनवाई हो सकती है।

लगे हैं ये आरोप

बाराबंकी पुलिस के मुताबिक, यह कार्रवाई थाना सफदरगंज में 11 फरवरी को दर्ज एक मुकदमे के आधार पर की गई। मुकदमे में धमकी देने, जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करने और सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा जा रहा है कि, आरोप छेड़छाड़ और एससी-एसटी एक्ट से जुड़े हो सकते हैं, हालांकि आधिकारिक तौर पर पुलिस ने सभी धाराओं का खुलासा नहीं किया है। एसटीएफ की भूमिका इसलिए प्रमुख रही क्योंकि मामला संवेदनशील होने के कारण विशेष टीम को लगाया गया।

परिवार ने दर्ज कराई थी गुमशुदगी की रिपोर्ट

सपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता मनोज यादव के परिजनों का कहना है कि, वे काकोरी में एक परिचित के तिलक समारोह में शामिल होने के लिए गये थे, लेकिन घर वापस नहीं लौटे। उनके फोन भी स्विच ऑफ़ हैं, जिससे उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है। परिजनों ने लखनऊ के गोमती नगर विस्तार थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने मोबाइल लोकेशन, सीसीटीवी फुटेज और कॉल डिटेल्स के आधार पर जांच शुरू की थी। पार्टी स्तर पर भी उनकी तलाश की अपील की गई थी, जिसमें कहा गया था कि यह “अत्यंत चिंताजनक” मामला है और पुलिस को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए।

पुलिस की कार्यशैली पर सवाल

मनोज यादव

समाजवादी पार्टी ने इस गिरफ्तारी को राजनीतिक प्रतिशोध और भाजपा की साजिश करार दिया है। पार्टी के प्रवक्ता राजकुमार भाटी ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट कर लिखा कि यह “अनैतिक गिरफ्तारी” है और विपक्षी नेताओं की आवाज को दबाने की कोशिश है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर तंज कसते हुए कहा, किस मुंह से लोकतंत्र के दावे करते हैं, जबकि तानाशाही और पुलिसिया गुंडाराज फैला रहे हैं। मनोज यादव को तुरंत रिहा किया जाए।

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पार्टी के अन्य नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भी सोशल मीडिया पर इसे लोकतंत्र पर हमला बताया। कई पोस्ट्स में दावा किया गया कि दो दिनों तक गायब रखने के बाद अब औपचारिक गिरफ्तारी दिखाई जा रही है, जो पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रही है। समाजवादी पार्टी के युवा नेताओं ने इसे ‘आवाज दबाने’ की साजिश करार दिया है। उनका कहना है कि ‘हौसले कैद नहीं हो सकते।

कानूनी आधार पर हुई कार्रवाई

बाराबंकी पुलिस ने स्पष्ट किया कि ये कार्रवाई किसी राजनीतिक दवाब में नहीं बल्कि कानूनी आधार पर हुई है। मुकदमा पुराने विवाद से जुड़ा बताया जा रहा है, जिसमें सोशल मीडिया पर की गई टिप्पणियां शामिल हैं। हालांकि, एसटीएफ ने इसे लेकर अभी तक विस्तृत बयान जारी नहीं किया है। पुलिस का कहना है कि, जांच जारी है और कोर्ट में पेशी के बाद आगे की प्रक्रिया तय होगी।

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनावों से पहले समाज वादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता के साथ हुई इस कानूनी कार्रवाई से राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। सपा-भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप दौर भी जोर पकड़ने लगा है। सपा जहां इसे  ‘विपक्ष दमन’ का उदाहरण बता रही है। वहीं सत्ताधारी पक्ष इसे ‘कानून का राज’ करार दे रहे हैं।

सरकार की नीतियों पर तीखी टिप्पणी करते हैं मनोज  

आपको बता दें कि,  मनोज यादव सपा के प्रमुख टीवी पैनलिस्ट और सोशल मीडिया पर सक्रिय प्रवक्ता हैं, जो अक्सर सरकार की नीतियों पर तीखी टिप्पणियां करते रहे हैं। आज मनोज यादव को कोर्ट में पेश किया जायेगा। आग उन्हें कोर्ट से जमानत मिल जाती है तो मामला और गरमाएगा। साथ ही राजनीतिक बयानबाजी में इजाफा हो सकता है। यह घटना उत्तर प्रदेश की सियासत में नया मोड़ ला सकती है, जहां विपक्ष पुलिस कार्रवाई को राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहा है।

 

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