
आज के समय में हम वुमन ड्रिवन सिनेमा, महिला सशक्तिकरण और गर्ल पावर जैसे शब्दों का इस्तेमाल बहुत ज्यादा करते हैं, लेकिन जब असल में ऐसी फिल्में आती हैं तो उन्हें उतना सपोर्ट नहीं मिलता जितना उन्हें मिलना चाहिए। यही वजह है कि पत्रलेखा और मानवी गगरू की फिल्म ‘हीर सारा’ उतनी चर्चा में नहीं आई जितनी कि कई दूसरी फिल्मों की ट्रोलिंग या विवाद की खबरें आती हैं, लेकिन ये फिल्म सचमुच देखने लायक है। ये सिर्फ एंटरटेनमेंट नहीं, बल्कि लड़कियों को अपनी जिंदगी पर गौर करने का मौका भी देती है।
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दो लड़कियों के इर्द-गिरफ घूमती है फिल्म
फिल्म की कहानी दो युवा लड़कियों सारा और हीर के इर्द-गिर्द घूमती है। सारा (पत्रलेखा) एक दबंग, स्वतंत्र और जिद्दी लड़की हैं जिसका सबसे बड़ा सपना अपनी मां की पुरानी मोटरसाइकिल पर पॉन्डिचेरी जाना है। उसकी मां का देहांत हो चुका है, लेकिन मां की वो बाइक सारा के लिए सिर्फ एक वाहन नहीं, बल्कि अपनी मां से जुड़ी यादों और आजादी का प्रतीक है, जिसे उसके पिता बेचना चाहते हैं, लेकिन सारा किसी भी कीमत पर अपना सफर पूरा करना चाहती है।

दूसरी तरफ हीर (मानवी गगरू) एक आम लड़की है, जो बॉडी शेमिंग का शिकार है। उसका बॉयफ्रेंड उन्हें सिर्फ इसलिए छोड़कर दूसरी शादी कर रहा है, क्योंकि हीर का वजन ज्यादा है और उसके परिवार वाले उसे स्वीकार नहीं करेंगे।
खुद को समझने और स्वीकार करने की कहानी
दिल टूटने के बाद हीर भी पॉन्डिचेरी जाने का फैसला करती हैं, अपने एक्स को रोकने के लिए। हालात कुछ ऐसे बनते हैं कि, दोनों लड़कियां अनजाने में एक-दूसरे की साथी बन जाती हैं और एक यादगार रोड ट्रिप शुरू हो जाती है। ये ट्रिप सिर्फ दो शहरों के बीच का सफर नहीं है। ये दो अलग-अलग व्यक्तित्व वाली लड़कियों की दोस्ती, उनके संघर्ष, हंसी-मजाक, आंसू और सबसे जरूरी बात खुद को समझने और स्वीकार करने की कहानी है।
फिल्म ‘जिंदगी ना मिलेगी दोबारा’ की तरह रोड ट्रिप जॉनर में है, लेकिन इसमें पुरुषों की बजाय दो महिलाओं की कहानी है। इस वजह से आने वाली चुनौतियां भी अलग तरह की हैं समाज की नजर, सुरक्षा की चिंता, भावनात्मक उतार-चढ़ाव और खुद पर भरोसा जगाने की जद्दोजहद।
सहज और आक्रामक है पत्रलेखा का रोल
फिल्म की सबसे बड़ी ताकत ये है कि ये शुरुआत से ही अपने मुद्दे पर टिकी रहती है। कोई लंबा इंट्रोडक्शन या अनावश्यक साइड ट्रैक्स नहीं। सारा का किरदार पहले एपिसोड से ही दर्शकों को बांध लेता है। वो बाइक पर सवार होकर सड़क पर निकलती है, तो स्क्रीन पर एक अलग ही एनर्जी आ जाती है। पत्रलेखा ने इस रोल को इतनी सहजता और आक्रामकता से निभाया है कि देखते ही लगता है कि ये किरदार उनके लिए बना है।
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‘फूले’ के बाद उन्हें इस अंदाज में देखना दर्शकों के लिए तरोताजा अनुभव है। बाइक चलाती, किसी से न डरने वाली और अपनी जिद पर अड़ी सारा का किरदार बहुत सी लड़कियों को प्रेरित करने वाला है। मानवी गगरू हीर के रोल में बिल्कुल फिट बैठती हैं। उनका किरदार भावुक, संवेदनशील और थोड़ा असुरक्षित है, लेकिन सफर के साथ-साथ वो खुद को मजबूत बनाने वाला है।
कई संवेदनशील मुद्दे को उठाती है फिल्म
बॉडी शेमिंग, सेल्फ वर्थ और रिलेशनशिप में सम्मान जैसे मुद्दों को फिल्म बहुत संवेदनशील तरीके से उठाती है। हीर का ट्रांसफॉर्मेशन फिल्म का दिल है। दोनों अभिनेत्रियों के बीच की केमिस्ट्री प्राकृतिक और विश्वसनीय लगती है। फिल्म में सपोर्टिंग रोल में श्वेता साल्वे और आरिफ जकारिया भी अच्छे लगे। आरिफ जकारिया सारा के पिता के रोल में खूब जमे हैं। उन्होंने प्यार और सख्ती के बीच के संघर्ष को बखूबी दिखाया है।
साधारण लड़कियों की कहानी है फिल्म
कार्तिक चौधरी और मनुज शर्मा की लिखी स्क्रिप्ट बहुत रिलेटेबल है। डायलॉग्स न तो बहुत फिलॉसॉफिकल हैं और न ही बेवजह ओवर ड्रामेटिक। आज के युवाओं की भाषा, उनकी समस्याएं और उनके सपनों को स्क्रिप्ट ने अच्छे से कैद किया है। कार्तिक चौधरी का डायरेक्शन क्लीन और सहज है। उन्होंने पॉन्डिचेरी की खूबसूरती को फिल्म का हिस्सा बनाया है, लेकिन कभी भी विजुअल्स कहानी पर हावी नहीं होने दिए।

बैकग्राउंड म्यूजिक और सिनेमैटोग्राफी भी फिल्म को सपोर्ट करते हैं। करीब डेढ़ घंटे की फिल्म पूरे समय अच्छे पेस में चलती है। कहीं बोर नहीं करती, कहीं खिंचती नहीं है। हंसी के पलों के साथ-साथ भावुक दृश्य भी हैं, लेकिन सब संतुलित है। फिल्म प्रैक्टिकल लगती है। इसमें कोई सुपरहीरो वाली लड़कियां नहीं हैं, बल्कि दो साधारण लड़कियां हैं जो अपनी जिंदगी की सड़क पर खुद ड्राइवर बनना चाहती हैं।
क्यों देखें ‘हीर सारा’?
ये फिल्म सिर्फ एंटरटेनमेंट नहीं देती, बल्कि जिंदगी जीने की सीख भी देती है। खुद पर भरोसा करना, दोस्ती की ताकत, शरीर को स्वीकार करना, परिवार की समझ और सबसे बड़ी बात अपनी खुशी और सपनों के लिए लड़ना। खासकर लड़कियों और युवा महिलाओं को ये फिल्म जरूर देखनी चाहिए।
अगर आप भी कभी सोचते हैं कि मैं अकेली क्या कर लूंगी या लोग क्या कहेंगे, तो ‘हीर सारा’ आपको जवाब देगी तुम अकेली नहीं हो और तुम बहुत कुछ कर सकती हो। कुल मिलाकर ‘हीर सारा’ एक सच्ची, साफ और दिल को छू लेने वाली फिल्म है। छोटे बजट में बनी ये फिल्म बड़े दिल और बड़े मैसेज के साथ आई है। क्रिटिक्स का कहना है कि फिल्म देखने वाली है और घर की हर लड़की को दिखाने वाली है।
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