सोनभद्र में मिला एल्युमिनियम सिलिकेट का बड़ा भंडार, बदल जाएगी जिले की तस्वीर

सोनभद्र। सोनभद्र जिले में एल्युमिनियम सिलिकेट अयस्क, जिसे एंडालुसाइट के नाम से जाना जाता है, का एक विशाल भंडार मिला है। भारतीय खान ब्यूरो यानी आईबीएम की 2024 की रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर प्रदेश और झारखंड की सीमा से सटे इलाके में एंडालुसाइट के छह नए ब्लॉक चिन्हित किए गए हैं। इस पूरे भंडार का करीब 91 प्रतिशत हिस्सा, यानी लगभग 114.25 मिलियन टन अकेले सोनभद्र जिले में मौजूद होने का अनुमान लगाया गया है। यह इतनी बड़ी मात्रा है कि, इसे देश का सबसे बड़ा एंडालुसाइट भंडार माना जा रहा है।

इसे भी पढ़ें- अल्ट्राटेक के चेक डैम से सोनभद्र के झपरा और बिल्ली मरकुंडी गाँवों के किसानों को बड़ी राहत मिली

भारत के लिए बड़ी उपलब्धि

गौरतलब है कि दुनिया में ब्राजील और श्रीलंका जैसे देश एंडालुसाइट के प्रमुख उत्पादकों में गिने जाते हैं। ऐसे में भारत के लिए यह खोज खनिज क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया यानी जीएसआई की ओर से कोन-विंढमगंज क्षेत्र से जुड़े करीब 48 वर्ग किलोमीटर के इलाके में चार अलग-अलग चरणों में सर्वेक्षण किया गया था।

aluminum silicate

इस सर्वेक्षण से जो परिणाम मिले, वे काफी उत्साहजनक रहे, जिसके बाद अब इस क्षेत्र में विस्तृत शोध, ड्रिलिंग और संभावित खनन को लेकर प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ाई जा रही है। यह खोज न केवल भूगर्भीय दृष्टिकोण से बल्कि आर्थिक दृष्टिकोण से भी क्षेत्र के लिए काफी अहम साबित हो सकती है।

भू-वैज्ञानिक कई बार कर चुके हैं सर्वे

लखनऊ विश्वविद्यालय और बीएचयू यानी बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के भू-वैज्ञानिकों की टीम भी कई बार जिले के इन खनिज भंडारों का सर्वे कर चुकी है। इस सर्वेक्षण के दौरान रेणुकूट वन प्रभाग में स्थित जमतिहवा नाला की लगभग 180 करोड़ वर्ष पुरानी प्राचीन चट्टानों से लेकर रजखड़ और दुद्धी के उत्तर में मौजूद पहाड़ियों तक एंडालुसाइट की परतें मिलने की मजबूत संभावनाएं सामने आई हैं, जो इस क्षेत्र के भूगर्भीय महत्व को और बढ़ाती हैं।

छह फ्री होल्ड डिपॉजिट ब्लॉक हुए चिन्हित

जीएसआई ने वर्ष 2012-13 से लेकर 2020-21 तक की अवधि में चार चरणों में झारखंड से सटे कोन-विंढमगंज क्षेत्र, जिसे सलईडीह-हरवरिया क्षेत्र भी कहा जाता है, के लगभग 48 वर्ग किलोमीटर इलाके का गहन सर्वेक्षण किया था। भारतीय खान ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार 1 अप्रैल 2020 तक जीएसआई द्वारा किए गए इस सर्वेक्षण के आधार पर उत्तर प्रदेश और झारखंड में एंडालुसाइट के कुल छह फ्री होल्ड डिपॉजिट यानी ब्लॉक चिन्हित किए गए हैं।

एंडालुसाइट का औसत ग्रेड 24 से 26 प्रतिशत 

इन छह ब्लॉकों में सोनभद्र जिले के सलईडीह-हरवरिया, फुलवार समेत कुल पांच ब्लॉक शामिल हैं, जहां अनुमान के अनुसार 114.25 मिलियन टन यानी कुल भंडार का 91 प्रतिशत हिस्सा मौजूद है। वहीं झारखंड के गढ़वा जिले के नगर-उंटारी क्षेत्र में 11.8 मिलियन टन यानी 9 प्रतिशत भंडार मिलने का अनुमान है।

यहां पाए गए एंडालुसाइट का औसत ग्रेड 24 से 26 प्रतिशत के बीच आंका गया है, जो इसे व्यावसायिक दृष्टि से काफी उपयोगी बनाता है। इसके अलावा छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा और रायपुर, ओडिशा के मलकानगिरी, राजस्थान के झुंझुनू, नागौर और टोंक जिलों के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में भी एंडालुसाइट मौजूद होने के संकेत मिले हैं, जो दर्शाता है कि यह खनिज भंडार सिर्फ सोनभद्र तक ही सीमित नहीं है।

सिलिमेनाइट के भी बड़े भंडार होने के संकेत

सर्वेक्षण रिपोर्ट में एक और महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। सोनभद्र जिले की दक्षिणी सीमा पर छत्तीसगढ़ से सटे बभनी-बीजपुर क्षेत्र में सिलिमेनाइट, जो कि एक एल्युमिनो सिलिकेट खनिज है, चट्टानों में बिखरे हुए क्रिस्टल के रूप में पाया गया है। यह पूरा क्षेत्र 600 मीटर से भी ज्यादा चौड़ा है और पूर्व दिशा में आसनडीह से लेकर पश्चिम में बाजिया तक छह किलोमीटर से भी अधिक दूरी में फैला हुआ है।

इस पूरी बेल्ट के मध्य भाग में स्थित छिपिया गांव के नजदीक करीब 200 मीटर चौड़े क्षेत्र में सिलिमेनाइट के बड़े आकार के क्रिस्टल मिलने के भी संकेत मिले हैं। रिपोर्ट में यह संभावना भी जताई गई है कि, इस बेल्ट के भीतर 10 से 25 मीटर चौड़े कुछ ऐसे क्षेत्र मौजूद हैं, जहां 16 से 32 प्रतिशत, यानी औसतन करीब 25 प्रतिशत तक सिलिमेनाइट मौजूद है। इसका कुल अनुमानित भंडार लगभग 10 मिलियन टन आंका गया है।

कई उद्योगों में होता है एंडालुसाइट का इस्तेमाल

एंडालुसाइट खनिज की एक खासियत यह है कि, इसका उपयोग रत्न के रूप में भी किया जाता है। हालांकि, औद्योगिक क्षेत्र में इसका सबसे प्रमुख उपयोग इस्पात, सीमेंट और कांच उद्योगों में होता है, जहां इसका इस्तेमाल उच्च तापमान वाली भट्टियों की लाइनिंग के लिए अग्निरोधी ईंटें और ब्लॉक बनाने में किया जाता है। इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि, यह अत्यधिक तापमान और रासायनिक दबाव को बिना पिघले आसानी से सहन कर सकता है, जिसकी वजह से उद्योग जगत में इसकी मांग लगातार बनी रहती है।

aluminum silicate

इसके अलावा एंडालुसाइट का इस्तेमाल ऑटोमोबाइल स्पार्क प्लग, उच्च गुणवत्ता वाले सिरेमिक उत्पाद, धातु ढलाई के सांचे और कोर बनाने में भी किया जाता है। साथ ही पारदर्शी और रंगीन एंडालुसाइट को तराश कर आकर्षक और कीमती रत्न भी तैयार किए जाते हैं। वहीं सिलिमेनाइट का उपयोग इस्पात, कांच, सिरेमिक, इंसुलेटर, उच्च वोल्टेज स्पार्क प्लग, सीमेंट भट्टियों और पेट्रोकेमिकल रिफाइनरियों में बड़े पैमाने पर किया जाता है।

व्यावसायिक दृष्टि से उपयोगी

लखनऊ विश्वविद्यालय के भू-विज्ञान विभाग की प्रोफेसर विभूति राय का कहना है कि सोनभद्र में एंडालुसाइट का यह भंडार व्यावसायिक दृष्टि से काफी उपयोगी साबित हो सकता है। उनके मुताबिक अगर यहां विस्तृत सर्वेक्षण और खनन कार्य शुरू किया जाता है, तो इससे जिले में बड़े पैमाने पर औद्योगिक निवेश आने और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होने की प्रबल संभावनाएं विकसित हो सकती हैं। कुल मिलाकर यह खोज सोनभद्र और आसपास के क्षेत्र के आर्थिक विकास के लिए एक नई उम्मीद की किरण बनकर सामने आई है।

 

इसे भी पढ़ें- कमीश्नरेट नोएडा के बाद सोनभद्र की पुलिस लाइन को भी मिला आईएसओ 9001:2015 सर्टिफिकेट

Related Articles

Back to top button