
इस्लामाबाद। अमेरिका और ईरान के बीच दशकों से चला आ रहा तनाव अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंचता हुआ नजर आ रहा है। पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में हुई पहले दौर की बातचीत के बेनतीजा रहने के बाद अब दुनिया की नजरें दूसरे दौर की वार्ता पर टिक गई हैं।
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अटकलों को मिली हवा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के हाल के बयानों ने इन अटकलों को और हवा दे दी है। इन दोनों नेताओं का कहना है कि, अमेरिका और ईरान एक बार फिर बातचीत की मेज पर बैठने के लिए तैयार हैं। इस बयान के सामने आते ही कूटनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है और माना जा रहा है कि, यदि ईरान लचीला रुख अपनाता है, तो मध्य पूर्व सहित पूरी दुनिया के लिए यह एक ऐतिहासिक समझौता साबित हो सकता है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में मीडिया से बात करते हुए कहा कि, अब ईरान बातचीत की मेज पर आने के लिए तैयार है और इसके लिए काफी उत्सुक भी दिखाई दे रहा है। ट्रंप के अनुसार, ईरान ने अमेरिका को वार्ता फिर से शुरू करने का संदेश दिया है। ट्रंप ने इस दौरान अपनी सख्त नीतियों का बचाव करते हुए कहा कि, वर्तमान में ईरान पर लगाए गए कड़े आर्थिक प्रतिबंधों और नाकाबंदी का असर दिखने लगा है।
ठप हो चुका है वैश्विक व्यापार
उन्होंने जोर देकर कहा कि, ईरान का अंतरराष्ट्रीय व्यापार पूरी तरह ठप पड़ गया है और अमेरिका ये दबाव तब तक बनाए रखेगा, जब तक कि कोई ठोस और सुरक्षित समझौता नहीं हो जाता। ट्रंप ने अपने चिर-परिचित अंदाज में दोहराया कि, उनका प्रशासन किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा। उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि, अमेरिका किसी भी देश को परमाणु ताकत के दम पर दुनिया को ब्लैकमेल करने की इजाजत नहीं दे सकता और अगर ईरान शर्तों पर सहमत नहीं होता है, तो कोई समझौता नहीं होगा।
दूसरी तरफ, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी बातचीत की संभावनाओं को लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं। एक इंटरव्यू में वेंस ने खुलासा किया कि, परमाणु मुद्दे पर ईरान ने कुछ नरमी दिखाई है और बातचीत की प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद है। वेंस ने कहा, अमेरिका इस पूरी प्रक्रिया को एक बड़े और सफल समझौते के साथ जल्द से जल्द समाप्त करना चाहता है। राष्ट्रपति ट्रंप का इरादा इस कूटनीतिक कवायद को लंबा खींचने का बिल्कुल नहीं है, बल्कि वे एक त्वरित और प्रभावी समाधान चाहते हैं।
जल्द होगी स्थान और तारीख की घोषणा
हालांकि, वेंस ने यह भी स्पष्ट किया कि, गेंद अब ईरान के पाले में है और वार्ता को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी तेहरान की है। उन्होंने साफ़ कहा कि, अगर ईरान सच में शांति चाहता है, तो उसे अपनी प्रतिबद्धताओं को साबित करने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।अमेरिकी खुफिया एजेंसी और मीडिया रिपोर्ट्स अनुसार, ट्रंप प्रशासन के भीतर दूसरे दौर की आमने-सामने की बैठक को लेकर उच्च स्तरीय तैयारी शुरू हो गई हैं। यह सक्रियता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच लागू वर्तमान सीजफायर की अवधि अगले सप्ताह समाप्त होने वाली है।
अमेरिकी अधिकारी समय सीमा समाप्त होने से पहले एक निर्णायक बैठक आयोजित करने की कोशिश में जुटे हैं। कूटनीतिक सूत्रों का कहना है कि, यदि आने वाले कुछ दिनों में क्षेत्रीय मध्यस्थों और ईरान के साथ पर्दे के पीछे चल रही बातचीत सफल रहती है, तो दूसरे दौर की बैठक की तारीख और स्थान की घोषणा जल्द ही की जा सकती है। फिलहाल अगली वार्ता के लिए स्विट्जरलैंड के जिनेवा और पाकिस्तान के इस्लामाबाद के नामों पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। इसी बीच खबर आ रही है कि तुर्किए ने भी दोनों देशों में बीच मध्देयस्शंथता दिखाने में दिलचस्पी दिखाई है और इसके लिए वह एक्टिव भी हो गया है।
अमेरिका की शर्तों के आगे झुका ईरान
रिपोर्ट के मुताबिक, इस्लामाबाद में हुई पहले दौर की वार्ता की विफलता के पीछे की मुख्य वजह यूरेनियम संवर्धन की शर्तें थीं। उस बैठक में अमेरिका ने ईरान के सामने शर्त रखी थी कि, वह अगले 20 वर्ष तक यूरेनियम संवर्धन नहीं करेगा और अपने पास मौजूद उच्च स्तर के संवर्धित भंडार को देश से बाहर भेजेगा।

वहीं, ईरान ने संवर्धन की अवधि को कम रखने और अपने भंडार को नियंत्रित तरीके से धीरे-धीरे कम करने का प्रस्ताव पेश किया था। इन दोनों प्रस्तावों के बीच बड़ी खाई होने के कारण पहले दौर की बातचीत बेनतीजा रही, लेकिन अब ताजा रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि, ईरान अपनी अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए परमाणु संवर्धन की कुछ कठोर शर्तों पर झुकने के लिए तैयार हो गया है।
एक रिपोर्ट में अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से दावा किया गया है कि, दूसरे दौर की बातचीत 16 अप्रैल के आसपास हो सकती है। हालांकि, तारीख और स्थान को लेकर आधिकारिक तौर पर कोई पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन कूटनीतिक हलचल यह बता रही है कि दोनों पक्ष किसी बड़े टकराव के बजाय संवाद के माध्यम से समाधान ढूंढने की दिशा में बढ़ रहे हैं।
वार्ता पर टिकीं दुनिया की निगाहें
अगर यह वार्ता सफल होती है, तो यह डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की सबसे बड़ी विदेश नीति की जीत मानी जाएगी। ऐसे में दुनिया भर के तमाम देशों की नजरें 16 अप्रैल पर टिक गई है। जब यह तय होगा कि, क्या अमेरिका और ईरान के बीच का दशकों पुराना कड़वा अध्याय समाप्त होगा या फिर प्रतिबंधों और धमकियों का दौर एक बार फिर से शुरू होगा।
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