
कोलकाता। इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) में दिल्ली कैपिटल्स की ओर से खेलने वाले बंगाल के युवा क्रिकेटर अभिषेक पोरेल को पश्चिम बंगाल के हुगली जिले की पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। उन पर एक महिला के साथ शादी का वादा कर कथित तौर पर यौन संबंध बनाने और उनके निजी पलों को बिना सहमति के रिकॉर्ड करने का गंभीर आरोप लगा है। इस गिरफ्तारी की पुष्टि मंगलवार को एक पुलिस अधिकारी ने की, जिसके बाद क्रिकेट जगत और आम लोगों में हड़कंप मच गया।
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पुलिस अधिकारी ने की पुष्टि
हुगली (ग्रामीण) के पुलिस अधीक्षक कुनार भूषण सिंह ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि, क्रिकेटर के खिलाफ पहले ही मामला दर्ज किया जा चुका था और अदालत ने उनकी गिरफ्तारी का आदेश दिया था।

उन्होंने बताया कि पोरेल को सोमवार देर रात गिरफ्तार किया गया। उन्हें मंगलवार को अदालत में पेश किया जाना था। पुलिस अधीक्षक के इस बयान ने इस मामले की गंभीरता को स्पष्ट कर दिया, जिसमें एक जाने-माने युवा क्रिकेटर के खिलाफ अदालत के आदेश पर गिरफ्तारी की कार्रवाई की गई।
देर रात हुई गिरफ्तारी
पुलिस सूत्रों के अनुसार, अभिषेक पोरेल को मोगरा पुलिस थाने की टीम ने सोमवार देर रात गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के बाद उन्हें मंगलवार को चिनसुरा स्थित अदालत में पेश किए जाने की प्रक्रिया शुरू की गई। पुलिस के मुताबिक, क्रिकेटर के खिलाफ बीएनएस के कई प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया है। इनमें बीएनएस की धारा 69 भी शामिल है, जो शादी का झूठा वादा कर संबंध बनाने जैसे मामलों में लगाई जाती है। इसके अतिरिक्त सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (आईटी एक्ट) के प्रावधानों के तहत भी उनके खिलाफ कार्रवाई की गई है, जो निजी पलों को अनुचित तरीके से रिकॉर्ड करने और उससे जुड़े डिजिटल अपराधों से संबंधित हैं।
मेडिकल छात्रा ने दर्ज कराई थी शिकायत
इस पूरे मामले की शुरुआत 23 जून को हुई थी, जब कर्नाटक की एक मेडिकल छात्रा ने मोगरा पुलिस थाने में अभिषेक पोरेल के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में महिला ने आरोप लगाया था कि, वह और पोरेल पिछले करीब साढ़े तीन साल से एक रिश्ते में थे और दोनों शादी करने की योजना बना रहे थे। महिला के अनुसार, इसी रिश्ते और शादी के वादे की आड़ में उनके साथ अनुचित संबंध बनाए गए। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत जांच शुरू कर दी।
कई बार खाली हाथ लौटी पुलिस
शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस टीमें आरोपों की पुष्टि और बयान दर्ज करने के लिए कई बार चंदननगर स्थित पोरेल के आवास पर पहुंचीं, लेकिन हर बार क्रिकेटर वहां नहीं मिले। इस कारण जांच प्रक्रिया में कुछ समय तक देरी हुई। हालांकि, पुलिस ने अपनी जांच जारी रखी और सभी जरूरी सबूत और बयान इकट्ठा करने के बाद अदालत से गिरफ्तारी का आदेश हासिल किया। अदालत का आदेश मिलते ही पुलिस ने रणनीति बनाकर सोमवार देर रात क्रिकेटर को गिरफ्तार कर लिया।
क्रिकेट जगत में हलचल
अभिषेक पोरेल हाल के वर्षों में IPL में अपनी आक्रामक बल्लेबाजी और विकेटकीपिंग के लिए चर्चा में रहे हैं। बंगाल के इस युवा खिलाड़ी ने घरेलू क्रिकेट के साथ-साथ IPL में दिल्ली कैपिटल्स के लिए भी अच्छा प्रदर्शन किया है, जिसके चलते उन्हें युवा और उभरते हुए क्रिकेटरों में गिना जाता रहा है। ऐसे में उनके खिलाफ इस तरह के गंभीर आरोप और गिरफ्तारी की खबर ने क्रिकेट प्रशंसकों और खेल जगत को स्तब्ध कर दिया है। हालांकि, इस मामले पर अभी तक न तो दिल्ली कैपिटल्स फ्रेंचाइजी की ओर से और न ही बंगाल क्रिकेट संघ की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है।
प्रतिक्रिया का इंतजार
अब तक अभिषेक पोरेल या उनके परिवार की ओर से इन आरोपों को लेकर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तारी से पहले भी परिवार या क्रिकेटर की ओर से जांच में सहयोग करने से जुड़ी कोई विशेष प्रतिक्रिया नहीं मिली थी। अब जब मामला अदालत में पहुंच चुका है, तो यह देखना अहम होगा कि आरोपी पक्ष अदालत में इन आरोपों पर क्या रुख अपनाता है। कानूनी प्रक्रिया के तहत आरोपी को अपना पक्ष रखने और सफाई देने का पूरा अवसर मिलेगा। अंतिम फैसला अदालत की सुनवाई पर निर्भर करेगा।
गंभीर श्रेणी के अपराध
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, भारतीय न्याय संहिता की धारा 69 उन मामलों में लगाई जाती है जहां किसी व्यक्ति पर शादी का झूठा वादा कर या पहचान छिपाकर किसी महिला से शारीरिक संबंध बनाने का आरोप होता है। यह धारा गंभीर अपराधों की श्रेणी में आती है और दोष सिद्ध होने पर कठोर सजा का प्रावधान है।

वहीं आईटी एक्ट के तहत लगाई गई धाराएं आमतौर पर निजी और आपत्तिजनक सामग्री को बिना सहमति के रिकॉर्ड करने, संग्रहीत करने या साझा करने से जुड़े मामलों में इस्तेमाल की जाती हैं। दोनों कानूनों के एक साथ लागू होने से यह स्पष्ट होता है कि पुलिस इस मामले को बेहद गंभीरता से ले रही है।
मामला कोर्ट में विचाराधीन
फिलहाल ये मामला अभी अदालत में विचाराधीन है और सभी आरोप फिलहाल शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए हैं, जिनकी पुष्टि जांच और अदालती प्रक्रिया के दौरान होनी बाकी है। कानून के अनुसार, जब तक अदालत में दोष सिद्ध नहीं हो जाता, तब तक किसी भी व्यक्ति को निर्दोष माना जाता है। ऐसे में इस पूरे मामले पर अंतिम निर्णय अदालती सुनवाई और जांच के निष्कर्षों पर ही निर्भर करेगा। क्रिकेट प्रशंसकों के साथ-साथ पूरे बंगाल में इस मामले को लेकर लोगों की निगाहें अब आगामी अदालती कार्यवाही पर टिकी हुई हैं।
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