जौहर ट्रस्ट पर आयकर विभाग का शिकंजा, 450 करोड़ की अघोषित आय, वसूली की तैयारी

लखनऊ। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री आजम खान व उनके परिजनों की मुश्किलें खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं। जौहर यूनिवर्सिटी विवाद के बाद अब एक और बड़ी कानूनी और वित्तीय मुश्किल खड़ी होती दिख रही है। आजम खान से जुड़े जौहर ट्रस्ट पर अब आयकर विभाग का शिकंजा कसता जा रहा है। ट्रस्ट का रजिस्ट्रेशन रद्द किए जाने के बाद आयकर विभाग ने अगला कदम उठाते हुए जुर्माने के साथ आयकर वसूलने से जुड़ी कार्रवाई का पूरा प्रकरण नई दिल्ली स्थित मुख्यालय को भेज दिया है।

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500 से अधिक धनराशि वसूलने की तैयारी

सूत्रों के हवाले से बताया जा रहा है कि, इस मामले का जल्द निस्तारण किया जाएगा, जिसके बाद जौहर ट्रस्ट से 500 करोड़ रुपये से भी अधिक की धनराशि वसूल किए जाने की तैयारी है। इस बड़ी वसूली की मुख्य वजह ट्रस्ट के पास पाई गई करीब 450 करोड़ रुपये की अघोषित आय बताई जा रही है, जिसे लेकर आयकर विभाग पहले ही अपनी जांच पूरी कर चुका है।

Azam Khan

गौरतलब है कि, राजधानी लखनऊ स्थित आयकर विभाग ने बीते दिनों जौहर ट्रस्ट का रजिस्ट्रेशन रद्द करने का बड़ा फैसला लिया था। यह कार्रवाई अचानक नहीं हुई, बल्कि विभाग द्वारा की गई लंबी जांच-पड़ताल का नतीजा थी। जांच में सामने आया कि, ट्रस्ट के संचालन में कई तरह की गंभीर वित्तीय अनियमितताएं बरती गई थीं।

सरकारी धन के दुरूपयोग का आरोप

इसके अलावा ट्रस्ट में फर्जी ट्रस्टी बनाए जाने, संदिग्ध व्यक्तियों और स्रोतों से चंदा लिए जाने और सरकारी धन का दुरुपयोग करते हुए जौहर यूनिवर्सिटी के भवन निर्माण में इस्तेमाल किए जाने जैसे गंभीर आरोप भी सामने आए। इन तमाम अनियमितताओं को आधार बनाते हुए आयकर विभाग ने ट्रस्ट के खिलाफ सख्त रुख अपनाया।

विभाग की तरफ से बताया गया है कि, जांच प्रक्रिया के दौरान जौहर ट्रस्ट को अपना पक्ष रखने का पर्याप्त मौका दिया गया था। आयकर विभाग ने कई बार ट्रस्ट प्रबंधन से आवश्यक दस्तावेज पेश करने और अपनी सफाई देने को कहा, लेकिन ट्रस्ट की ओर से इन आरोपों के खिलाफ कोई ठोस या पुख्ता प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया जा सका। दस्तावेजी साक्ष्यों के अभाव और अनियमितताओं के पुख्ता होने के बाद ही विभाग ने रजिस्ट्रेशन रद्द करने जैसा कठोर कदम उठाने का फैसला किया।

ब्याज के साथ होगी वसूली

रजिस्ट्रेशन रद्द किए जाने के बाद अब आयकर विभाग का अगला और सबसे बड़ा कदम ट्रस्ट से बकाया राशि की वसूली को लेकर है। सूत्रों के अनुसार, विभाग जौहर ट्रस्ट के पास पाई गई करीब 450 करोड़ रुपये की अघोषित आय पर 30 फीसदी की दर से जुर्माना वसूलने की तैयारी में है। इसके साथ ही इस राशि पर ब्याज भी जोड़ा जाएगा, जिससे कुल वसूली की रकम 500 करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर सकती है।  यह पूरा मामला अब आयकर विभाग के दिल्ली स्थित मुख्यालय के पास है, जहां से इस पर अंतिम फैसला लिया जाना है।  सूत्रों का कहना है कि, इस मामले में जल्द ही निर्णय लिए जाने की संभावना है, जिसके बाद वसूली की औपचारिक प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।

सरकारी धन के दुरुपयोग पर भी होगी अलग से कार्रवाई

इस पूरे प्रकरण में एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि, जांच के दौरान यह भी सामने आया कि, जौहर यूनिवर्सिटी की कई इमारतों के निर्माण में सरकारी विभागों के धन का इस्तेमाल किया गया था। यानी जिन भवनों का निर्माण होना चाहिए था निजी या ट्रस्ट के अपने संसाधनों से, उनमें सरकारी खजाने से मिली धनराशि खर्च कर दी गई।

सूत्रों के मुताबिक, इस मामले में राज्य सरकार अलग से कार्रवाई करते हुए इस दुरुपयोग की गई सरकारी धनराशि की भी वसूली कर सकती है। इसका मतलब यह है कि, आयकर विभाग की कार्रवाई से अलग, राज्य सरकार के स्तर पर भी जौहर ट्रस्ट और जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े वित्तीय मामलों की एक स्वतंत्र वसूली प्रक्रिया शुरू हो सकती है। इस तरह देखा जाए तो आजम खान और उनके परिवार को एक साथ दो अलग-अलग मोर्चों पर वित्तीय कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।

कई कानूनी मामलों में उलझे हैं आजम खान

गौरतलब है कि, पूर्व मंत्री आजम खान और उनका परिवार पहले से ही कई कानूनी मामलों में उलझा हुआ है। जौहर यूनिवर्सिटी और उससे जुड़े ट्रस्ट को लेकर पिछले कुछ वर्षों में कई तरह की जांच एजेंसियां सक्रिय रही हैं, जिनमें भूमि अधिग्रहण से जुड़ी अनियमितताएं, फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल तथा अन्य वित्तीय गड़बड़ियों से जुड़े मामले शामिल रहे हैं।

ऐसे में जौहर ट्रस्ट पर आयकर विभाग की यह नई और बड़ी कार्रवाई आजम खान के लिए एक और गंभीर झटका मानी जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि, यह प्रकरण आने वाले समय में और अधिक तूल पकड़ सकता है, खासकर तब जब दिल्ली मुख्यालय से अंतिम फैसला आ जाएगा।

जौहर ट्रस्ट और यूनिवर्सिटी की पृष्ठभूमि

जौहर ट्रस्ट, आजम खान द्वारा स्थापित जौहर यूनिवर्सिटी के संचालन से जुड़ा एक प्रमुख संगठन रहा है। यह ट्रस्ट रामपुर स्थित इस विश्वविद्यालय के प्रशासनिक और वित्तीय कामकाज की देखरेख करता रहा है। बीते वर्षों में इस ट्रस्ट और यूनिवर्सिटी को लेकर कई विवाद सामने आए हैं, जिनमें भूमि अधिग्रहण, पशुपालन विभाग की जमीन के इस्तेमाल, और चंदे के स्रोतों को लेकर सवाल शामिल रहे हैं। अब आयकर विभाग की ताजा कार्रवाई ने इस पूरे मामले को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है।

दिल्ली मुख्यालय में लंबित है मामला

फिलहाल पूरा मामला आयकर विभाग के दिल्ली मुख्यालय के पास लंबित है, जहां से अंतिम निर्णय आना बाकी है। एक बार निर्णय आने के बाद ट्रस्ट से वसूली की औपचारिक प्रक्रिया शुरू हो जाएगी, जिसमें जुर्माना और ब्याज मिलाकर कुल राशि 500 करोड़ रुपये से अधिक होने का अनुमान है। इसके साथ ही राज्य सरकार की ओर से सरकारी धन के दुरुपयोग को लेकर अलग से की जाने वाली कार्रवाई भी इस मामले को और जटिल बना सकती है।

आयकर विभाग और राज्य सरकार दोनों के स्तर पर जौहर ट्रस्ट के खिलाफ शुरू हुई यह कार्रवाई आजम खान और उनके परिवार के लिए आने वाले समय में कानूनी और वित्तीय दोनों मोर्चों पर बड़ी चुनौती साबित हो सकती है। आने वाले दिनों में इस मामले में दिल्ली मुख्यालय से मिलने वाले फैसले पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी।

 

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