फिर बढ़ी आजम खान की मुश्किल, अब इस मामले में मिली दो साल की जेल की सजा

रामपुर। उत्तर प्रदेश की सियासत में अपनी बेबाक और अक्सर विवादों में रहने वाले समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री मोहम्मद आजम खान की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। रामपुर की विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट ने शनिवार को एक बेहद कड़े और ऐतिहासिक फैसले में आजम खान को साल 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान तत्कालीन जिलाधिकारी के खिलाफ बेहद आपत्तिजनक, अमर्यादित और अपमानजनक टिप्पणी करने के मामले में दोषी करार देते हुए दो साल के कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने उन पर पांच हजार रुपये का आर्थिक जुर्माना भी लगाया है।

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प्रशासनिक अधिकारियों को कहा था ‘तनखैया’

आजम खान ने एक चुनावी जनसभा में प्रशासनिक अधिकारियों की गरिमा को ठेस पहुंचाते हुए उन्हें ‘तनखैया’ कहा था और बेहद तल्ख लहजे में धमकी दी थी कि सरकार आने पर वह इन अफसरों से अपने जूते साफ करवाएंगे। छह साल पुराने इस हाई-प्रोफाइल मामले में आया यह फैसला न केवल आजम खान के राजनीतिक करियर के ताबूत में एक और कील की तरह देखा जा रहा है, बल्कि इसने उत्तर प्रदेश की ब्यूरोक्रेसी और राजनीति के बीच के पुराने अंतर्विरोधों को भी एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

Azam Khan

यह पूरा मामला साल 2019 के आम चुनाव के प्रचार प्रसार के दौरान का है, जब रामपुर के भोट थाना क्षेत्र में आयोजित एक बड़ी चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए आजम खान ने मंच से प्रशासनिक मशीनरी को खुलेआम चुनौती दी थी। लोकसभा चुनाव की सरगर्मियों के बीच तत्कालीन जिला प्रशासन और आजम खान के बीच जबरदस्त टकराव की स्थिति बनी हुई थी।

इसी खीझ और राजनीतिक आक्रोश में बहकर आजम खान ने चुनावी मंच से मर्यादा की सारी सीमाएं लांघ दी थीं। जनसभा में मौजूद भारी भीड़ को उकसाते हुए और प्रशासनिक अधिकारियों का मनोबल गिराने के इरादे से उन्होंने कहा था कि, किसी को भी इन कलेक्टर-पलेक्टर से डरने की जरूरत नहीं है। उन्होंने ये भी कहा था कि, ये सब सरकारी तनखैया हैं और जनता को इन तनखैयों से डरने की बिल्कुल जरूरत नहीं है।

मायावती का पेश किया था उदहारण

अपने इसी भाषण में आजम खान ने उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बसपा सुप्रीमो मायावती का जिक्र करते हुए एक बेहद विवादित उदाहरण भी पेश किया था। उन्होंने जनता को संबोधित करते हुए कहा था कि, सभी ने मायावती के शासनकाल की वो तस्वीरें देखी हैं, जिनमें बड़े-बड़े आईएएस और आईपीएस अधिकारी अपनी जेबों से रुमाल निकालकर मुख्यमंत्री के जूते साफ कर रहे थे।

आजम खान ने इसी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा था कि, आज हमारा उन्हीं मायावती की पार्टी के साथ गठबंधन है और अगर अल्लाह ने चाहा, तो सूबे में हमारी सरकार आने के बाद हम इन बड़े-बड़े और घमंडी अफसरों से अपने खुद के जूते साफ करवाएंगे। इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैल गया था, जिसके बाद भोट थाने में आजम खान के खिलाफ लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम और लोक सेवक को अपमानित करने की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था।

जिस वक्त आजम खान ने रामपुर के मंच से यह जहरीला और अपमानजनक बयान दिया था, उस समय रामपुर के जिलाधिकारी के पद पर तेजतर्रार आईएएस अधिकारी आंजनेय कुमार सिंह तैनात थे। आंजनेय कुमार सिंह के कार्यकाल के दौरान ही रामपुर में आजम खान और उनके करीबियों पर जमीनों पर अवैध कब्जे, जौहर यूनिवर्सिटी विवाद और कई अन्य आपराधिक मुकदमों के तहत ताबड़तोड़ कार्रवाई की गई थी।

जेल में बंद हैं आजम खान

इसी प्रशासनिक कड़ाई से बौखलाकर आजम खान ने सीधे जिलाधिकारी को अपने निशाने पर लिया था। समय का चक्र देखिए कि तत्कालीन डीएम आंजनेय कुमार सिंह आज पदोन्नत होकर मुरादाबाद मंडल के कमिश्नर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, जबकि  आजम खान अदालतों के चक्कर काटने और जेल की सलाखों के पीछे दिन काटने को मजबूर हैं।

करीब छह साल तक चली लंबी कानूनी लड़ाई, गवाहों के बयानों और साक्ष्यों के मूल्यांकन के बाद आखिरकार विशेष अदालत ने माना कि आजम खान का बयान न केवल एक लोक सेवक की गरिमा को गिराने वाला था, बल्कि समाज में अराजकता फैलाने और चुनावी माहौल को दूषित करने का एक सोची-समझा प्रयास था।

शनिवार को जब रामपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट इस संवेदनशील मामले में अपना फैसला सुना रही थी, तब आजम खान व्यक्तिगत रूप से अदालत कक्ष में मौजूद नहीं थे। वह पहले से ही विभिन्न आपराधिक मामलों में सजायाफ्ता होने के कारण उत्तर प्रदेश की सीतापुर जेल में बंद हैं, इसलिए उन्हें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत की कार्यवाही से जोड़ा गया था।

क़ानून के शिकंजे में है परिवार

स्क्रीन पर जब जज ने उन्हें दो साल की सजा और जुर्माने का फैसला सुनाया, तो आजम खान के चेहरे पर मायूसी साफ देखी जा सकती थी। आजम खान के वकीलों ने अदालत के सामने दलीलें देकर सजा में नरमी बरतने की गुहार भी लगाई थी, लेकिन अदालत ने अपराध की गंभीरता और एक जन प्रतिनिधि द्वारा प्रशासनिक अधिकारियों के मनोबल को तोड़ने के प्रयास को देखते हुए सख्त रुख अपनाया और कानून की सर्वोच्चता को बरकरार रखते हुए सजा का ऐलान कर दिया।

यह कोई पहला मामला नहीं है जब आजम खान को किसी अदालत ने जेल की सजा सुनाई हो। इससे ठीक पहले, साल 2023 में रामपुर की अदालत ने आजम खान, उनकी पत्नी तंजीन फात्मा और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को बेटे के फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के बेहद गंभीर और धोखाधड़ी के मामले में दोषी पाते हुए सात-सात साल के कड़े कारावास की सजा सुनाई थी।

इसके अलावा अदालत ने उन्हें और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को एक अन्य मामले में फर्जी पैन कार्ड बनवाने के जुर्म में भी सात-सात साल जेल की सजा सुनाई हुई है। लगातार मिल रही कानूनी शिकस्तों और अदालती फैसलों के कारण आजम खान का पूरा परिवार इस समय जेल की सलाखों के पीछे कानूनी लड़ाइयों के भंवरजाल में फंसा हुआ है।

 

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