
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में लगातार हो रही बारिश और नदियों के तेज़ी से बढ़ते जलस्तर ने कई जिलों में जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। प्रदेश के करीब 19 जिले इस समय बाढ़ और भारी बारिश की चपेट में बताए जा रहे हैं। इनमें लखीमपुर खीरी, चित्रकूट, पीलीभीत, कुशीनगर, बलरामपुर, श्रावस्ती, गोंडा, सीतापुर, हरदोई, अयोध्या, बहराइच, गोरखपुर, बदायूं, देवरिया, उन्नाव, फर्रुखाबाद, बरेली, बाराबंकी और प्रयागराज शामिल हैं। इसके साथ ही गाज़ीपुर और वाराणसी में भी नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ने के कारण प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है।
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कई नदियों का जलस्तर बढ़ा
प्रदेश में गंगा, यमुना, घाघरा, गंडक, मंदाकिनी और शारदा समेत कई प्रमुख नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। कई इलाकों में यह पानी निचले क्षेत्रों तक पहुंच चुका है, जिसके चलते प्रशासन ने संबंधित जिलों में लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। संवेदनशील इलाकों में राहत और बचाव दलों को पहले से ही तैनात किया जा चुका है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके।
प्रयागराज: रेड अलर्ट
प्रयागराज में पिछले दो दिनों से गंगा, यमुना और इनकी सहायक नदियों के जलस्तर में तेज़ी से बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। विभिन्न बैराजों और बांधों से लगातार पानी छोड़े जाने के कारण टोंस नदी का जलस्तर भी तेज़ी से बढ़ा है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए टोंस और बेलन नदी के कछारी इलाकों में रेड अलर्ट जारी किया गया है। प्रशासन इन संवेदनशील क्षेत्रों पर लगातार नज़र बनाए हुए है।

प्रयागराज के जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने खुद ग्राउंड जीरो पर पहुंचकर बाढ़ की स्थिति का जायज़ा लिया। उन्होंने बताया कि गंगा और यमुना का जलस्तर तेज़ी से बढ़ा है। हालांकि, किसी आबादी वाले क्षेत्र के प्रभावित होने की सूचना नहीं है। एहतियात के तौर पर राहत शिविरों को पहले से ही सक्रिय कर दिया गया है और एनडीआरएफ की टीमें संवेदनशील इलाकों में लगातार निगरानी कर रही हैं।
चित्रकूट: मंदाकिनी का बढ़ा जलस्तर
चित्रकूट में लगातार बारिश के बाद मंदाकिनी नदी का जलस्तर एक बार फिर बढ़ गया है। कुछ दिन पहले नदी में आई भीषण बाढ़ के बाद जलस्तर धीरे-धीरे कम होने लगा था, लेकिन रात में हुई तेज़ बारिश ने स्थिति को दोबारा गंभीर बना दिया। जिलाधिकारी पुलकित गर्ग और पुलिस अधीक्षक अरुण कुमार सिंह ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया और प्रभावित लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं जानीं। दोनों अधिकारियों ने ज़रूरतमंद परिवारों को खाद्य सामग्री भी वितरित की। प्रशासन के मुताबिक, मंदाकिनी नदी का जलस्तर खतरे के निशान से करीब 3 मीटर ऊपर पहुंच चुका था।
गाज़ीपुर: बाढ़ में फंसीं 2000 भेड़ें
गाज़ीपुर के जमानियां इलाके में गंगा का जलस्तर बढ़ने के कारण करीब 2000 भेड़ें और उनके पालक बाढ़ के पानी के बीच फंस गए। रात में परेशान भेड़ पालक ने पुलिस से मदद की गुहार लगाई, जिसके बाद पुलिस और प्रशासन तुरंत सक्रिय हो गए। पुलिस अधीक्षक डॉ. ईरज राजा ने ड्रोन की मदद से फंसे लोगों और भेड़ों की सटीक लोकेशन का पता लगाया। इसके बाद एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, नाविकों और गोताखोरों की कुल चार टीमों को रेस्क्यू अभियान में लगाया गया। करीब छह घंटे तक चले इस अभियान के बाद सभी भेड़ों को सुरक्षित तरीके से बाहर निकाल लिया गया। प्रशासन का कहना है कि, प्रभावित इलाकों में लगातार निगरानी की जा रही है और बाढ़ चौकियों तथा आश्रय स्थलों के अलावा लोगों के लिए भोजन-पानी और पशुओं के चारे की भी उचित व्यवस्था की जा रही है।
श्रावस्ती: घरों में घुसा बारिश का पानी
श्रावस्ती में लगातार हो रही बारिश स्थानीय लोगों के लिए बड़ी परेशानी बनती जा रही है। गिलौला कस्बे में जल निकासी की पर्याप्त व्यवस्था न होने के कारण पुरानी मस्जिद के पीछे रहने वाले लोगों के घरों में पानी घुस गया।

शुरुआत में बारिश का पानी गलियों में जमा हुआ, लेकिन जल्द ही यह आसपास के मकानों तक पहुंच गया। देखते ही देखते एक दर्जन से अधिक घर जलमग्न हो गए। कई घरों में कमर तक पानी भरने की बात सामने आई है। जलभराव के कारण स्थानीय लोगों का सामान्य जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हुआ है। स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से जल्द जल निकासी और प्रभावित परिवारों को राहत उपलब्ध कराने की मांग की है।
पीलीभीत: शारदा नदी उफान पर
पीलीभीत में भी लगातार बारिश के बीच शारदा नदी का जलस्तर तेज़ी से बढ़ रहा है। परिगांव के पास नदी का पानी खतरे के निशान के काफी करीब पहुंच गया है। बताया जा रहा है कि, बनबसा बैराज से शारदा नदी में दो लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़े जाने के बाद नदी किनारे बसे इलाकों में खतरा और बढ़ गया है। स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने अलर्ट जारी कर दिया है और पूरनपुर तहसील क्षेत्र के नदी किनारे तथा निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
वाराणसी: गंगा ने पार किया खतरे के निशान
वाराणसी में भी बारिश और बाढ़ ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। यहां गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु को पार कर चुका है। मंगलवार सुबह 8 बजे तक गंगा का जलस्तर 70.27 मीटर दर्ज किया गया। लगातार बारिश के बीच वरुणा नदी के किनारे बसे 12 मोहल्लों में बाढ़ का पानी पहुंच चुका है और 150 से अधिक परिवार राहत शिविरों में शरण ले चुके हैं।
कई प्रभावित परिवार अपने परिचितों के घर या किराए के मकानों में रहने को मजबूर हैं। प्रशासन प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने का काम कर रहा है। राहत शिविरों में दिन में तीन बार भोजन के साथ-साथ बच्चों और बुज़ुर्गों के लिए दूध व केले की भी व्यवस्था की गई है।
35 साल बाद अगस्त में इतनी बारिश
वाराणसी के लिए इस बार का अगस्त महीना बारिश के लिहाज़ से बेहद असाधारण रहा है। सामान्य तौर पर अगस्त में करीब 245.1 मिलीमीटर बारिश दर्ज होती है, लेकिन इस वर्ष यहां लगभग 448 मिलीमीटर बारिश हुई, जो सामान्य से करीब 82 फीसदी अधिक है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार अगले 48 घंटों तक आसमान में बादल छाए रहने और बारिश जारी रहने की संभावना है, जिससे नदियों के जलस्तर में और बढ़ोतरी होने की आशंका बनी हुई है।
महाराजगंज और कुशीनगर में भी बढ़ी निगरानी
नेपाल में आई बाढ़ के बाद गंडक नदी का जलस्तर बढ़ने से महाराजगंज और कुशीनगर जैसे सीमावर्ती जिलों में भी प्रशासन की चिंता बढ़ गई है। इन दोनों जिलों में नदी तंत्र पर लगातार नज़र रखी जा रही है और नदी किनारे तथा निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रशासन सतर्क
उत्तर प्रदेश के अन्य बाढ़ प्रभावित जिलों में भी प्रशासन को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। गंगा, यमुना, घाघरा और गंडक नदी तंत्र के किनारे बसे इलाकों में स्थिति पर लगातार नज़र रखी जा रही है। प्रशासन ने लोगों से नदी और जलभराव वाले इलाकों से दूर रहने की अपील की है। राहत शिविरों को पूरी तरह तैयार रखा गया है और आवश्यकता पड़ने पर एनडीआरएफ व एसडीआरएफ की मदद लेने की तैयारी भी की गई है। फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती नदियों के लगातार बढ़ते जलस्तर और आने वाले घंटों में होने वाली संभावित बारिश को लेकर है।
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