बांकीपुर उपचुनाव: नितिन नवीन के गढ़ पर प्रशांत की नजर, क्या मिलेगा विपक्ष का साथ?

बिहार। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी को मिली बड़ी जीत के बाद देश में विपक्षी एकता की कोशिशें एक बार फिर तेज होती नजर आ रही हैं। पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों के साथ-साथ उन तमाम राज्यों में भी, जहां कांग्रेस सत्ता से बाहर है और क्षेत्रीय दल भी जीत के समीकरण से काफी दूर खड़े नजर आते हैं। वहां कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्ष के महाजुटान की थ्योरी पर तेजी से काम शुरू हो चुका है। इसी बीच बिहार से एक दिलचस्प राजनीतिक घटनाक्रम सामने आ रहा है, जो आने वाले दिनों में विपक्षी एकता की दिशा तय कर सकता है।

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दिलचस्प होगा बांकीपुर सीट का मुकाबला 

राष्ट्रीय जनता दल के भीतर बांकीपुर विधानसभा सीट को लेकर एक बड़े राजनीतिक प्रयोग की चर्चा जोरों पर है, जो विपक्ष के महाजुटान की वजह बन सकता है। दिलचस्प बात यह है कि, राजद के भीतर इस महाजुटान की चर्चा की मुख्य वजह जनसुराज पार्टी के प्रमुख प्रशांत किशोर बने हुए हैं।

Jansuraj Party

राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि, अगर प्रशांत किशोर ने बांकीपुर सीट से चुनाव लड़ने का फैसला किया, तो महागठबंधन अपना उम्मीदवार खड़ा करने से परहेज करते हुए उन्हें समर्थन देने की राह चुन सकता है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि, बांकीपुर विधानसभा सीट को लेकर विपक्ष किस तरह की चुनावी रणनीति और समीकरण तैयार करता है।

बांकीपुर से उम्मीदवार उतारेगी जनसुराज

बांकीपुर विधानसभा सीट को लेकर प्रशांत किशोर पूरी तरह गंभीर नजर आ रहे हैं। इस बात की पुष्टि हो चुकी है कि, आगामी उपचुनाव में जनसुराज पार्टी अपना उम्मीदवार जरूर उतारेगी। हालांकि, उम्मीदवार का नाम अभी तक सस्पेंस बना हुआ है। प्रशांत किशोर की इस मामले में गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने बांकीपुर विधानसभा चुनाव के लिए विधिवत रूप से एक टीम का गठन कर दिया है।

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इस सीट की कमान पूर्व एमएलसी प्रो. रामबली चंद्रवंशी के नेतृत्व में सौंपी गई है, जिसमें कुल 25 सदस्यों की एक कमेटी बनाई गई है जो पूरे चुनावी संग्राम की रणनीति तैयार करेगी। खास बात यह है कि प्रो. चंद्रवंशी इससे पहले राष्ट्रीय जनता दल से ही एमएलसी रह चुके हैं, जिससे यह प्रयोग और भी दिलचस्प हो जाता है।

पीके को दिख रहा है जीत का मौका

जनसुराज पार्टी के मुखिया प्रशांत किशोर बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव को अपनी पार्टी के लिए जीत का एक बड़ा मौका मान रहे हैं। उनका मानना है कि इस उपचुनाव के जरिए जनता के पास भारतीय जनता पार्टी को हराने का सबसे बड़ा अवसर मौजूद है। पीके इसे इसलिए भी एक बेहतरीन मौका करार दे रहे हैं क्योंकि अगर इस सीट पर बीजेपी को हार का सामना करना पड़ता है, तो इससे दिल्ली स्थित पार्टी के आलाकमान तक यह संदेश जाएगा कि बिहार में बीजेपी का मजबूत किला अब कमजोर पड़ने लगा है। यही वजह है कि प्रशांत किशोर इस सीट पर पूरी ताकत झोंकने की तैयारी में जुटे हुए हैं।

भरत तिवारी एनकाउंटर बनेगा बड़ा मुद्दा

प्रशांत किशोर का हाल ही में बिलौटी गांव का दौरा करना और भरत तिवारी के परिवार से मुलाकात करना, यह साफ संकेत दे रहा है कि बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में एनकाउंटर से जुड़ा मामला एक बेहद गर्म मुद्दा बनने जा रहा है। आइए समझते हैं कि इस चुनाव में और कौन-कौन से मुद्दे प्रमुखता से उठाए जाने की तैयारी है।

Bharat Tiwari encounter case A

सबसे पहले, भरत तिवारी एनकाउंटर मामले को जनसुराज पार्टी जनता की आंखें खोलने वाले मुद्दे के तौर पर पेश करने की रणनीति बना रही है। इसके साथ ही प्रश्न पत्र लीक मामले को भी एक बड़े चुनावी मुद्दे के रूप में उठाने की तैयारी पूरी हो चुकी है, और इसके लिए छात्र वर्ग तक पहुंचने का काम भी शुरू कर दिया गया है।

प्रशांत को मिलेगा विपक्ष का साथ?

इसके अलावा राज्य में बिगड़ते कानून व्यवस्था के हालात और औद्योगिकीकरण के मोर्चे पर मिली नाकामी को भी प्रमुखता से उठाया जाएगा। साथ ही, भारतीय जनता पार्टी के भीतर चल रहे आंतरिक मतभेदों को भी प्रशांत किशोर एक बड़ा चुनावी हथियार बनाने की योजना बना रहे हैं।

बांकीपुर सीट को लेकर अभी भी कई अहम सवाल उठ रहे हैं।  जैसे- क्या पूरा विपक्ष वाकई एक मंच पर आकर एकजुट हो पाएगा?   क्या तेजस्वी यादव समेत अन्य विपक्षी नेता खुलकर जनसुराज और प्रशांत किशोर के पीछे खड़े होने का फैसला करेंगे? अगर इन दोनों सवालों का जवाब हां में मिलता है, तो निश्चित तौर पर यह मुकाबला बेहद कड़ा और दिलचस्प होने वाला है।

नितिन नवीन ने हराया था रेखा को

इसकी एक बड़ी वजह पिछले चुनाव के नतीजे भी हैं। पिछली बार हुए चुनाव में बीजेपी उम्मीदवार नितिन नवीन को कुल 98,299 वोट हासिल हुए थे, जबकि राजद उम्मीदवार रेखा कुमारी को सिर्फ 46,363 वोट ही मिल पाए थे। यानी यह मुकाबला करीब 51,936 वोटों के बड़े अंतर से हारा गया था।

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किसी भी विधानसभा चुनाव में 50 हजार वोटों से हार-जीत होना अपने आप में एक बड़ी बात मानी जाती है। ऐसे में यह देखना अभी बाकी है कि बांकीपुर विधानसभा की जनता किस जातीय समीकरण के आधार पर अपना फैसला सुनाती है और किसे विधानसभा भेजती है।

 

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