अखिलेश की चेतावनी: बंगाल-बिहार जैसी लूट हुई, तो UP में कभी नहीं होंगे चुनाव, गरमाई सियासत

कासगंज। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कासगंज में शुक्रवार 12 जून को मीडिया से बातचीत करते हुए भाजपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने विपक्षी दलों पर हो रही कथित चुनावी अनियमितताओं को लेकर चेतावनी देते हुए कहा कि यदि उत्तर प्रदेश में भी पश्चिम बंगाल और बिहार जैसी लूट और बेईमानी हुई तो भविष्य में कभी चुनाव नहीं होंगे। अखिलेश यादव का यह बयान राजनीतिक गलियारों में काफी चर्चा का विषय बन गया है।

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अखिलेश यादव ने कहा, बीजेपी ने पश्चिम बंगाल का चुनाव लूटा है और बिहार के चुनाव में बेईमानी की है। अगर यही लूट और यही बेईमानी उत्तर प्रदेश में हो गई तो इसके बाद भविष्य में कभी चुनाव नहीं होगा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र की भाजपा सरकार महिला आरक्षण के नाम पर डिलिमिटेशन का रास्ता तैयार कर रही है ताकि अपने हिसाब से लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की नई सीमाएं बनाई जा सकें, जिनमें विपक्षी उम्मीदवार जीत न पाएं।

विकास के मुद्दे पर सरकार को घेरा

अखिलेश यादव ने कासगंज और एटा जिले के विकास मुद्दे पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि, समाजवादी पार्टी की सरकारों ने हमेशा इन क्षेत्रों के विकास के लिए काम किया है, लेकिन वर्तमान में डबल इंजन वाली भाजपा सरकार के शासन में इन जिलों को विकास की दौड़ में पीछे छोड़ दिया गया है।

उन्होंने आगे कहा, आज अगर आप तुलना करेंगे तो एटा-कासगंज को विकास में काफी पीछे छोड़ दिया गया है। यहां का किसान दुखी है, आम लोग महंगाई की वजह से परेशान हैं। विकास आते-आते डबल इंजन की सरकार का धुआं निकल गया है। उन्होंने पीडीए परिवार को एकजुट होने का आह्वान करते हुए दावा किया कि भाजपा को सत्ता से हटाने के लिए पूरा पीडीए परिवार पूरी तरह तैयार है।

योगी सरकार पर तंज

सपा अध्यक्ष ने सीएम योगी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा, मैं कई बार सुनता हूं कि, मुख्यमंत्री कहते हैं कि 2017 से पहले उत्तर प्रदेश की कोई पहचान नहीं थी। सच्चाई तो ये है कि मुख्यमंत्री की कोई पहचान 2017 से पहले नहीं थी। 2017 से पहले वो कासगंज भी नहीं आए होंगे। 2017 से पहले एटा भी कभी नहीं आए होंगे, जिन्हें अपनी पहचान 2017 के बाद मिली है, वो ये कह रहे हैं कि यूपी की पहचान नहीं थी।

अखिलेश यादव ने यह बयान देकर स्पष्ट रूप से यह संदेश दिया कि योगी आदित्यनाथ की लोकप्रियता और पहचान 2017 के बाद बनी, जबकि पूरे उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और सामाजिक पहचान बहुत पुरानी है।

12 सालों में सिर्फ महंगाई बढ़ी

केंद्र सरकार के 12 वर्षों के शासन पर अखिलेश यादव ने कहा कि, इस दौरान भाजपा सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि सिर्फ महंगाई है। इनकी 12 सालों की उपलब्धि यही है कि डीजल-पेट्रोल, खाद, रसोई गैस और कमर्शियल सिलेंडर ऐतिहासिक महंगाई के साथ बिक रहे हैं। उन्होंने आम जनता की परेशानियों को गिनाते हुए कहा कि, किसान खाद की महंगाई से परेशान हैं, गृहिणियां रसोई गैस के बढ़े दामों से जूझ रही हैं और नौजवान बेरोजगारी के साथ महंगाई की दोहरी मार झेल रहे हैं।

विपक्ष को कमजोर कर रही बीजेपी

अखिलेश यादव ने कहा कि, भाजपा विपक्ष को कमजोर करने के लिए हर हथकंडा अपना रही है। महिला आरक्षण बिल के साथ-साथ डिलिमिटेशन का मुद्दा उठाकर पार्टी नए चुनावी क्षेत्रों का गठन करना चाहती है, ताकि विपक्षी दलों के मजबूत नेता चुनाव न जीत सकें। उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए खतरा बताया। उन्होंने विपक्षी एकता पर जोर देते हुए कहा कि अगर उत्तर प्रदेश में भी बंगाल और बिहार जैसी स्थिति बनी तो लोकतंत्र की मूल भावना खत्म हो जाएगी। उन्होंने कहा, अगर लोकतंत्र को बचाना है तो लोगों को जागरूक होना होगा और भाजपा की इन चालों को समझना होगा।

 पलायन कर रहे युवा 

कासगंज और एटा के स्थानीय मुद्दों को उठाते हुए सपा मुखिया ने कहा कि, इन क्षेत्रों में किसानों की आय नहीं बढ़ रही है, बेरोजगारी बढ़ रही है और युवा रोजगार की तलाश में पलायन कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि, समाजवादी पार्टी सत्ता में आई तो इन क्षेत्रों में विकास के नए आयाम स्थापित किए जाएंगे। सपा अध्यक्ष ने पार्टी कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे घर-घर जाकर लोगों तक सच्चाई पहुंचाएं। उन्होंने कहा कि पीडीए का फॉर्मूला पूरे उत्तर प्रदेश में काम कर रहा है और आगामी चुनावों में यह गठबंधन भाजपा के लिए बड़ी चुनौती साबित होगा।

 ‘लोकतंत्र बचाओ’ का दिया नारा

आपको बता दें कि पूर्व मुख्यमंत्री का ये  बयान ऐसे समय में आया है, जब देश में डिलिमिटेशन और महिला आरक्षण को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो रही है। अखिलेश यादव का यह आक्रामक अंदाज सपा की आगामी रणनीति का संकेत देता है। कासगंज और एटा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के महत्वपूर्ण जिले हैं, जहां सपा और भाजपा के बीच सीधी टक्कर रहती है।

अखिलेश यादव की इस यात्रा को स्थानीय स्तर पर पार्टी को मजबूत करने और जनता को जोड़ने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। अखिलेश यादव ने अपने भाषण और मीडिया इंटरैक्शन में बार-बार लोकतंत्र बचाओ का नारा दिया। उन्होंने कहा कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहनी चाहिए, अन्यथा लोकतंत्र सिर्फ नाम का रह जाएगा।

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