
पटना। बिहार की सत्ताधारी पार्टी जनता दल यूनाइटेड के भीतर सांगठनिक स्तर पर एक बड़ा फेरबदल देखने को मिला है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपनी नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी के पदाधिकारियों की बहुप्रतीक्षित सूची जारी कर दी है। इस नई टीम के गठन में नीतीश कुमार ने अपने पुराने अनुभवों और भविष्य की राजनीतिक चुनौतियों के बीच एक सटीक संतुलन बनाने की कोशिश की है।
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कोर टीम तैयार
खास बात ये रही कि, हाल के दिनों में पार्टी में सक्रियता को लेकर चर्चा में आए नीतीश कुमार के इकलौते पुत्र निशांत कुमार को इस सूची में कोई स्थान नहीं दिया गया है। वहीं, नीतीश कुमार के सबसे भरोसेमंद सहयोगियों में शुमार राज्यसभा सांसद संजय झा को एक बार फिर पार्टी का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त कर यह साफ कर दिया गया है कि, आगामी चुनावों में पार्टी की कमान किसके हाथों में होगी। यह पूरी सूची बताती है कि नीतीश कुमार ने आगामी लोकसभा उप-चुनावों के मद्देनजर अपनी कोर टीम को पूरी तरह से दुरुस्त कर लिया है।

जनता दल यूनाइटेड द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, नीतीश कुमार स्वयं पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद पर बने रहेंगे। पार्टी के सांगठनिक ढांचे में दूसरे सबसे महत्वपूर्ण पद यानी राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष के लिए संजय कुमार झा के नाम पर दोबारा मुहर लगाई गई है। संजय झा को यह जिम्मेदारी मिलना पार्टी के भीतर उनके बढ़ते कद और दिल्ली से लेकर पटना तक की राजनीति में उनकी उपयोगिता को प्रमाणित करता है। संजय झा न केवल नीतीश कुमार के संकटमोचक माने जाते हैं, बल्कि भाजपा के साथ गठबंधन के समन्वय में भी उनकी भूमिका बेहद अहम रही है।
12 राष्ट्रीय महासचिव की नियुक्ति
नीतीश कुमार ने इस बार 12 राष्ट्रीय महासचिवों की नियुक्ति की है, जिसमें समाज के हर वर्ग और जाति को साधने की स्पष्ट कोशिश दिखाई देती है। इस सूची में सबसे प्रमुख नाम पूर्व आईएएस अधिकारी मनीष कुमार वर्मा का है। मनीष वर्मा को नीतीश कुमार का शैडो माना जाता है और उन्हें महासचिव बनाकर पार्टी ने यह संकेत दिया है कि संगठन के भीतर वे एक बड़ी भूमिका निभाने वाले हैं। उनके साथ ही श्याम रजक की वापसी को भी पुरस्कृत किया गया है। आरजेडी छोड़कर वापस जेडीयू में आए श्याम रजक को महासचिव बनाकर दलित वोटों को एकजुट करने की जिम्मेदारी दी गई है।
अन्य महासचिवों में आफाक अहमद खान, जो लंबे समय से संगठन में सक्रिय हैं के साथ-साथ कद्दावर नेता अशोक चौधरी को भी जगह मिली है। अशोक चौधरी का नाम नीतीश की पसंदीदा सूची में हमेशा ऊपर रहता है। इनके अलावा रमेश सिंह कुशवाहा, रामसेवक सिंह, कहकशां प्रवीण, कपिल हरिशचंद्र पाटील, राज सिंह मान, सुनील कुमार उर्फ इंजीनियर सुनील, हर्षवर्धन सिंह और मौलाना गुलाम रसूल बलियावी को भी महासचिव बनाया गया है। इन नामों के चयन में मुस्लिम, कुशवाहा, दलित और सवर्ण समुदायों के बीच एक ऐसा संतुलन बैठाया गया है, जो जेडीयू के पारंपरिक लव-कुश समीकरण और महादलित-अति पिछड़ा कार्ड को मजबूती प्रदान करता है।
चंद्रवंशी बने राष्ट्रीय उपाध्यक्ष
नई कार्यकारिणी में एक बड़ा ढांचागत बदलाव देखने को मिला है। पहले पार्टी में तीन राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हुआ करते थे, लेकिन इस बार नीतीश कुमार ने इस संख्या को घटाकर केवल एक कर दिया है। जहानाबाद के पूर्व सांसद चंदेश्वर प्रसाद चंद्रवंशी को पार्टी का एकमात्र राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है। चंद्रवंशी को यह जिम्मेदारी देकर पार्टी ने अति पिछड़ा वर्ग को एक बड़ा संदेश दिया है।
वहीं, पिछले कार्यकाल में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रहे भगवान सिंह कुशवाहा का नाम इस सूची से नदारद है। हालांकि, राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि उन्हें संगठन से बाहर रखकर सरकार के आगामी मंत्रिमंडल विस्तार में मंत्री पद की जिम्मेदारी दी जा सकती है। इसी तरह, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रहे अन्य नेताओं को भी अन्य भूमिकाओं में स्थानांतरित किया गया है या प्रतीक्षा सूची में रखा गया है।
पूरी दुनिया की नजर इस बात पर थी कि क्या नीतीश कुमार अपने बेटे निशांत कुमार को राजनीति में आधिकारिक एंट्री देंगे। कुछ महीने पहले जब निशांत ने पार्टी के कुछ कार्यक्रमों में शिरकत की थी, तब यह अटकलें तेज थीं कि उन्हें राष्ट्रीय पदाधिकारी बनाया जा सकता है। लेकिन नई सूची में उनका नाम न होना यह दर्शाता है कि नीतीश कुमार फिलहाल विरोधियों के ‘परिवारवाद’ वाले आरोपों को कोई मौका नहीं देना चाहते। उन्होंने निशांत को संगठन से बाहर रखकर खुद को लालू यादव की राजनीति से अलग दिखाने का प्रयास किया है। हालांकि, पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि निशांत बिना किसी पद के भी संगठन की मजबूती के लिए काम करते रहेंगे।
अनुभवी चेहरों को मिली जगह
नीतीश कुमार ने प्रवक्ताओं की टीम में भी अनुभवी चेहरों को जगह दी है। राजीव रंजन प्रसाद को पार्टी का राष्ट्रीय सचिव और आधिकारिक प्रवक्ता बनाया गया है। राजीव रंजन मीडिया में पार्टी का पक्ष रखने में माहिर माने जाते हैं। उनके साथ सचिवों की टीम में रविंद्र प्रसाद सिंह, विद्यासागर निषाद, दयाशंकर राय, संजय कुमार, मोहम्मद निसार, रूबी लागून और निवेदिता कुमारी को शामिल किया गया है। वहीं, गोपालगंज से सांसद डॉ. आलोक कुमार सुमन को राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। आलोक सुमन की स्वच्छ छवि और उनकी प्रशासनिक पकड़ को देखते हुए उन्हें पार्टी के वित्तीय प्रबंधन की कमान दी गई है।

यह नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी केवल पदों का बंटवारा नहीं है, बल्कि यह नीतीश कुमार का वह चुनावी चक्रव्यूह है जिसे उन्होंने आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए रचा है। संजय झा को कार्यकारी अध्यक्ष बनाकर उन्होंने सवर्ण और शहरी मतदाताओं को साधे रखा है, वहीं अशोक चौधरी और मनीष वर्मा जैसे नामों के जरिए उन्होंने प्रशासनिक पकड़ और दलित-पिछड़ा वोट बैंक पर अपना दावा मजबूत किया है। आफाक अहमद खान और गुलाम रसूल बलियावी के जरिए मुस्लिम समुदाय के भीतर अपनी पैठ बनाए रखने की कोशिश की गई है।
कई बड़े नाम कटे
कुल मिलाकर, जेडीयू की यह नई टीम नीतीश कुमार के उस भरोसे को दर्शाती है जो वे अपने पुराने और परखे हुए साथियों पर करते हैं। संगठन में बड़े नामों की छुट्टी और नए रणनीतिकारों की एंट्री यह बताती है कि नीतीश कुमार अब एक नई और आक्रामक राजनीति के लिए तैयार हैं। जहां एक ओर विपक्ष लगातार जेडीयू के कमजोर होने का दावा कर रहा है, वहीं नीतीश कुमार ने इस मजबूत कार्यकारिणी के जरिए यह संदेश दे दिया है कि संगठन पूरी तरह से एकजुट और युद्ध स्तर पर सक्रिय है। अब देखना यह होगा कि नीतीश की यह नई ‘टीम 2026’ बिहार की सियासी जमीन पर कितनी सफल साबित होती है।
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