किसानों के मुद्दे पर बातचीत करने के लिए तैयार मोदी सरकार, रद्द हुई आपात बैठक

केंद्र सरकार की तरफ से तीनों विवादास्पद कृषि कानूनों को वापस लिए जाने के बाद भी किसान संगठनों का आंदोलन जारी है। संयुक्त किसान मोर्चा एमएसपी गारंटी कानून समेत अपनी 6 मांगों पर अड़ा हुआ है। हालांकि सरकार भी अब किसानों के सामने नरम होती हुई दिखाई दे रही है। क्योंकि सरकार चाहती है कि किसान आंदोलन जल्द से जल्द समाप्त हो और किसान अपने घर, गांव और खेतों की तरफ वापस लौट जाएं।

रद्द हो गई आपातकालीन बैठक

केंद्र की मोदी सरकार ने विवादास्पद कृषि कानूनों को वापस ले लिया है। इसके बावजूद किसान संगठनों का विरोध प्रदर्शन जारी है। इसी बीच बड़ी खबर सामने आ रही है। संयुक्त किसान मोर्चा ने 1 दिसंबर यानी की आज आपातकालीन बैठक बुलाई थी। जिसे रद्द कर दिया गया है। ऐसे में संयुक्त किसान मोर्चा की 4 दिसंबर को होने वाली बैठक में ही तमाम फैसले लिए जाएंगे। उम्मीद जताई जा रही थी कि आज की बैठक में किसान आंदोलन पर फैसला हो सकता था लेकिन अब तो यह रद्द कर दी गई है। इस बैठक में 42 किसान संगठनों के नेता शामिल होने वाले थे, जो विज्ञान भवन में सरकार से हुई बातचीत में शामिल थे। किसान नेता सतनाम सिंह अजनाला ने कहा कि मांगें पूरी हो चुकी है और अब जल्द ही आंदोलन को खत्म करने पर फैसला लिया जाएगा। वहीं दूसरी तरफ कुछ किसान नेता अभी आंदोलन को समाप्त नहीं करना चाहते हैं। इसी वजह से मतभेद खड़ा हो सकता है।

अभी भी अड़े हैं राकेश टिकैत

भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि 50-55 हज़ार मुकदमें जो आंदोलन के दौरान दर्ज़ हुए हैं वे वापस लिए जाएं, एमएसपी गारंटी क़ानून बनें, जिन किसानों ने जान गंवाई है उन्हें मुआवजा मिले, जो ट्रैक्टर बंद हैं उन्हें ट्रैक्टर दिए जाएं। अब ये हमारे मुख्य मुद्दे हैं। सरकार को बातचीत करनी चाहिए। इसके अलावा उन्होंने ट्वीट किया कि किसान जब नरेंद्र मोदी कमेटी की 2011 में बनाई रिपोर्ट को लागू करने और एमएसपी की क़ानूनी गारंटी की मांग कर रहे हैं, तो सरकार देश के आर्थिक तंत्र पर बोझ का रोना रोकर इससे बचने के रास्ते तलाश रही है… कई सत्ता पोषित अर्थशास्त्रियों को सरकार ने अपने बचाव के लिए आगे कर दिया है। इससे पहले राकेश टिकैत ने आश्वासन की बात कही थी। टिकैत ने कहा था कि सरकार हमारी मांगों पर जब तक केंद्र एमएसपी का आश्वासन नहीं देता हम नहीं छोड़ेंगे।

रायबरेली में सवारियों से भरी बस में लगी आग, 30 घायल, ओवरलोड रोडवेज पीछे से ट्रक में जा घुसी

वहीं दूसरी तरफ हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के सालभर लंबे आंदोलन के दौरान उन पर पुलिस में दर्ज मामलों को वापस लेने की किसानों की मांग पर वह सहानुभूतिपूर्वक विचार करेंगे। खट्टर ने कहा कि यह सही है कि यह राज्यों के अधिकार क्षेत्र में आता है।

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया सरकारी मंथन के Facebook पेज को LikeTwitter पर Follow करना न भूलें...

Related Articles

Back to top button