साध नगर की बहुमंजिला इमारत में भीषण आग, नौ लोग जिन्दा जले, जान बचाने के लिए बच्चों को खिड़की से फेंका

नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली के पालम इलाके से बुधवार की सुबह एक ऐसी रूह कंपा देने वाली खबर सामने आई, जिसने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है। यहां एक बहुमंजिला इमारत में भीषण आग लग गई और देखते ही देखते श्मशान में तब्दील हो गई। भीषण आग और दम घोंटने वाले काले धुएं के बीच अपनों को बचाने की जद्दोजहद और मासूम बच्चों को जान बचाने के लिए खिड़कियों से नीचे फेंके जाने का मंजर देख प्रत्यक्षदर्शियों की रूह कांप गई।  प्रशासन की जांच और मुआवजे के वादों के बीच अब पालम के साध नगर में सिर्फ मातम और सिसकियां बची हैं।

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 भयंकर तबाही मची

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राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली का दक्षिण-पश्चिमी जिला बुधवार को एक बड़े हादसे का गवाह बना। पालम इलाके के साध नगर स्थित राम चौक बाजार की एक बहुमंजिला इमारत में सुबह तड़के लगी भीषण आग ने भयंकर तबाही मचाई। इस दर्दनाक हादसे में तीन मासूम बच्चों सहित एक ही परिवार के नौ लोग जिन्दा जल गये।

आग इतनी भयावह थी कि, दमकल विभाग की 30 गाड़ियों को मोर्चा संभालना पड़ा और घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद ही लपटों पर काबू पाया जा सका। इस घटना ने दिल्ली के घनी आबादी वाले रिहायशी इलाकों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों और अग्नि सुरक्षा मानकों की पोल खोलकर रख दी है।

हादसे की शुरुआत बुधवार सुबह लगभग 6:40 बजे हुई। साध नगर की गली नंबर-2 में स्थित इस बहुमंजिला इमारत के ग्राउंड फ्लोर पर कॉस्मेटिक और कपड़ों की दुकान थी। शुरुआती जांच के अनुसार, आग की शुरुआत इसी दुकान से हुई। चूंकि दुकान में कपड़े, प्लास्टिक और अन्य ज्वलनशील कॉस्मेटिक सामान भरा हुआ था, इसलिए आग ने पलक झपकते ही विकराल रूप धारण कर लिया।

गैलरी और सीढ़ियों पर भरा धुआं

जिस समय आग लगी, इमारत की ऊपरी मंजिलों पर रह रहे लोग गहरी नींद में सो रहे थे। जब तक उन्हें कुछ समझ आता, तब तक पूरी सीढ़ी और गैलरी काले धुएं के गुबार से भर चुकी थी। इमारत के अंदर धुएं का इतना घना गुबार बन गया कि वहां फंसे लोग बाहर नहीं निकल पाए और अपनी जान बचाने के लिए मदद की गुहार लगाने लगे।

आग की लपटें जब ऊपर की ओर बढ़ने लगीं और दम घुटने का खतरा मंडरा रहा था, तब अंदर फंसे परिवार के सदस्यों ने अपनी जान जोखिम में डालकर एक ऐसा फैसला लिया जिसे सुनकर किसी का भी दिल दहल जाए। दो छोटे बच्चों की जान बचाने के लिए उन्हें पहली मंजिल से नीचे की ओर फेंक दिया गया। नीचे खड़े स्थानीय लोगों ने मुस्तैदी दिखाते हुए उन बच्चों को सुरक्षित लपक लिया और तुरंत अस्पताल पहुंचाया। हालांकि, परिवार के अन्य नौ सदस्य इतने भाग्यशाली नहीं रहे और वे आग की लपटों और जहरीले धुएं के बीच फंस गए।

दमकल की देरी पर फूटा गुस्सा

हादसे के बाद स्थानीय लोगों में भारी रोष देखा गया। प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि अग्निशमन सेवाओं (Fire Brigade) की प्रतिक्रिया में भारी देरी हुई। लोगों का कहना है कि फायर ब्रिगेड को घटनास्थल पर पहुंचने में लगभग 40 से 45 मिनट की देरी हुई, जिसने बचाव कार्यों में बड़ी बाधा उत्पन्न की। स्थानीय निवासियों का दावा है कि यदि दमकल की गाड़ियां समय पर पहुंच जातीं, तो शायद कई और जिंदगियां बचाई जा सकती थीं। दमकल विभाग के अनुसार, उन्हें सुबह 7 बजे के करीब सूचना मिली थी, जिसके बाद 30 गाड़ियां मौके पर भेजी गईं।

मुख्यमंत्री ने दिए जांच के आदेश

इस भीषण कांड के बाद दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए मामले की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दे दिए हैं। मुख्यमंत्री ने एक्स पर अपनी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए लिखा कि आवासीय भवन में आग लगने की घटना हृदयविदारक है। उन्होंने जिला प्रशासन, दिल्ली अग्निशमन सेवा और दिल्ली पुलिस को राहत कार्यों में तेजी लाने और पीड़ितों को हर संभव सहायता मुहैया कराने के निर्देश दिए हैं।

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वहीं, उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने भी इस घटना पर शोक जताया है। उन्होंने कहा कि पालम मेट्रो के पास हुई इस त्रासदी से वे बेहद दुखी हैं और बचाव कार्यों पर कड़ी नजर रखी जा रही है। एलजी ने आश्वासन दिया है कि, प्रभावित लोगों को सभी आवश्यक सहायता प्रदान की जा रही है।

सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर सवाल

शुरुआती जांच में दिल्ली पुलिस और दमकल विभाग ने आग का कारण शॉर्ट सर्किट बताया है। यह इमारत कपड़ों और कॉस्मेटिक्स के कई स्टोरों के अलावा दूसरी और तीसरी मंजिल पर रिहायशी फ्लैटों के लिए भी इस्तेमाल हो रही थी। मिक्स्ड लैंड यूज वाली ऐसी इमारतों में अक्सर अग्नि सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जाती है, जो इस तरह के बड़े हादसों को निमंत्रण देती है। संकरी गलियों ने भी दमकल की गाड़ियों के पहुंचने में चुनौती पैदा की।

अस्पताल में भर्ती दो अन्य लोगों की हालत भी चिंताजनक बनी हुई है, जिन्होंने जान बचाने के लिए इमारत से छलांग लगा दी थी। पालम का यह हादसा दिल्ली के लिए एक बड़ी चेतावनी है कि, रिहायशी इलाकों में अवैध तरीके से चल रहे गोदाम और सुरक्षा मानकों के प्रति लापरवाही कितनी घातक साबित हो सकती है। फिलहाल, पूरा इलाका पुलिस छावनी में तब्दील है और फॉरेंसिक टीमें साक्ष्य जुटाने में लगी हैं ताकि हादसे की असली वजह और जिम्मेदारी तय की जा सके।

 

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