शादाब खान का नाबाद 113, रिव्यू पर छिड़ी बहस, जानें पूरा मामला

लाहौर। क्रिकेट में कुछ मैच आंकड़ों से नहीं, एक पल से याद रखे जाते हैं। रविवार रात गद्दाफी स्टेडियम में खेले गए पाकिस्तान-इंग्लैंड मुकाबले में ऐसा ही हुआ। एक समय पाकिस्तान का स्कोर नौ विकेट पर 154 था और जीत की उम्मीद लगभग खत्म हो चुकी थी। इसके बाद शादाब खान ने नाबाद शतक जमाकर टीम को एक विकेट की रोमांचक जीत दिलाई। जीत के साथ ही मैदान के बाहर एक विवाद भी खड़ा हो गया है।

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जीत की पूरी कहानी

इंग्लैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 241 रन बनाए। बेन डकेट ने शतक जड़ा, जबकि शाहीन अफरीदी ने चार विकेट लिए। पाकिस्तान ने 47.1 ओवर में 243 रन बनाकर लक्ष्य पूरा कर लिया। शादाब ने 96 गेंदों में नाबाद 113 रन बनाए। यह उनका वनडे करियर का पहला शतक है।

Shadab Khan

आखिरी विकेट के लिए उन्होंने हारिस रऊफ के साथ 89 रन जोड़े। रऊफ ने 19 गेंदें खेलकर नाबाद 7 रन बनाए और जीत का चौका भी उन्होंने ही लगाया। यह वनडे इतिहास में सफल रन चेज के दौरान आखिरी विकेट की सबसे बड़ी साझेदारी बताई गई है।
क्रिक इन्फो के अनुसार वनडे इतिहास में आठवें या उससे नीचे के क्रम पर बल्लेबाजी करते हुए इतना बड़ा स्कोर पहले किसी ने नहीं बनाया।

जब लगा कि मैच खत्म हो गया

मैच का सबसे नाटकीय मोड़ पारी के 45वें ओवर में आया। पाकिस्तान को आखिरी पांच ओवरों में सिर्फ 27 रन चाहिए थे। गस एटकिंसन के ओवर की पहली गेंद पर शादाब ने छक्का जड़ा। दूसरी गेंद यॉर्कर थी, जो उनके पैर पर लगी और LBW की जोरदार अपील हुई। मैदानी अंपायर ने उंगली उठा दी।

क्रिकइन्फो के मुताबिक, यह आउट इतना साफ दिख रहा था कि, एटकिंसन ने जश्न मनाते हुए अपील की और शादाब पवेलियन की ओर चल पड़े। गुस्से में उन्होंने बल्ला जमीन पर पटका। ब्रॉडकास्टर के ग्राफिक में इंग्लैंड को 20 रन से विजेता दिखा दिया गया। मैदान पर हाथ मिलाने और गले मिलने जैसी औपचारिकताएं शुरू हो चुकी थीं।

रिव्यू ने पलट दी बाजी

रिपोर्ट के अनुसार साथी बल्लेबाज हारिस रऊफ शादाब के पास दौड़कर आए और उनसे रिव्यू लेने को कहा। कुछ अन्य रिपोर्ट्स में कहा गया है कि शादाब ने खुद अनुमान के आधार पर रिव्यू मांगा। रिव्यू लिया गया। DRS में गेंद और बल्ले के बीच बेहद हल्का संपर्क यानी इनसाइड एज दिखाई दिया। अल्ट्रा-एज में गेंद बल्ले के पास स्पाइक करती दिखी, इसलिए बॉल ट्रैकिंग तक बात पहुंची ही नहीं।

फैसला पलटा तो अंपायर भी हैरान दिखे और मुस्कुरा उठे। इंग्लैंड के खिलाड़ियों के चेहरे उतर गए। बताया जा रहा है कि, अंपायर के आउट देने के बाद जो रूट शादाब को पारी की बधाई देने आगे बढ़े थे, पर फैसला बदलते ही उनकी निराशा साफ दिखी।
उस समय शादाब 97 रन पर थे। पाकिस्तान को जीत के लिए 21 रन और चाहिए थे। इसके बाद शादाब ने मैच को अंजाम तक पहुंचाया।

फिर क्यों उठा बवाल

मैच के बाद सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने दावा किया कि, शादाब ने रिव्यू का इशारा करते हुए कैमरे पर नहीं दिखाया, फिर भी फैसला रिव्यू कर लिया गया। इसी आधार पर कुछ यूजर्स ने गड़बड़ी और मैच फिक्सिंग के आरोप तक लगा दिए।

इन बातों पर ध्यान देना जरूरी

रिव्यू का नियम

क्रिकेट के नियमों में बल्लेबाज दूसरे छोर के साथी से सलाह लेकर रिव्यू मांग सकता है। रिव्यू तय समय के भीतर मांगना होता है।

बयानों में फर्क

अलग-अलग रिपोर्ट्स में रिव्यू मांगने वाले को लेकर अलग बातें लिखी हैं। कहीं साथी बल्लेबाज की सलाह का जिक्र है, कहीं शादाब के खुद इशारा करने का।

आरोपों का आधार

मैच फिक्सिंग के आरोप सोशल मीडिया पर लग रहे हैं। किसी आधिकारिक संस्था, आईसीसी या मैच अधिकारी की ओर से ऐसी किसी जांच या शिकायत की खबर सामने नहीं आई है।

फैसला तकनीक से आया

रिव्यू में गेंद का बल्ले से लगना दिखा और फैसला उसी आधार पर बदला। गेंद का संपर्क कैमरे पर साफ दर्ज हुआ।

इंग्लैंड की हार, लेकिन मुकाबला दमदार

इंग्लैंड के लिए यह हार दिल तोड़ने वाली रही। गस एटकिंसन ने नाबाद 36 रन बनाए और आखिरी विकेट के लिए 40 रन की साझेदारी करके इंग्लैंड को प्रतिस्पर्धी स्कोर तक पहुंचाया। कप्तान हैरी ब्रूक ने हार के बाद अपनी टीम की कोशिश की सराहना की।

Shadab Khan

तीन लगातार हार के बाद इंग्लैंड ट्राई सीरीज की अंक तालिका में सबसे नीचे है। अब उसे फाइनल में पहुंचने के लिए किसी चमत्कार की जरूरत है। स्काई स्पोर्ट्स के मुताबिक इंग्लैंड को श्रीलंका के खिलाफ जीत जरूर दर्ज करनी होगी।

पाकिस्तान फाइनल में

पाकिस्तान, इंग्लैंड और श्रीलंका के बीच खेली जा रही इस ट्राई सीरीज में पाकिस्तान अब तक अजेय है। यह उसकी लगातार तीसरी जीत है। इसके साथ ही उसने फाइनल में जगह पक्की कर ली है। फाइनल 31 अक्टूबर को लाहौर के गद्दाफी स्टेडियम में खेला जाएगा। पाकिस्तान का ग्रुप चरण का आखिरी मैच श्रीलंका से है।

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

इस मैच ने फिर साबित किया कि क्रिकेट में आखिरी गेंद फेंके जाने तक कुछ भी तय नहीं होता। DRS जैसी तकनीक ने इस बार एक बल्लेबाज की पारी, एक टीम की जीत और एक मैच की कहानी बदल दी। जहां तक आरोपों का सवाल है, जब तक कोई ठोस सबूत या आधिकारिक जांच सामने नहीं आती, तब तक इसे सिर्फ सोशल मीडिया की बहस ही माना जाएगा।

 

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