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बीसीसीआई की वैकेंसी के लिए किया आवेदन, 31 टेस्ट का अनुभव बन सकता है सबसे बड़ी ताकत
भारतीय क्रिकेट टीम का अगला मुख्य चयनकर्ता कौन होगा। इस सवाल ने क्रिकेट जगत में हलचल तेज कर दी है। पूर्व दिग्गज बल्लेबाज वसीम जाफर ने बीसीसीआई की तरफ से चयन समिति में खाली पड़े पद के लिए आवेदन किया है। 48 साल के जाफर ने खुद इसकी पुष्टि की है। उनके आवेदन के बाद चीफ सेलेक्टर की दौड़ दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गई है, क्योंकि फिलहाल यह जिम्मेदारी अंतरिम तौर पर प्रज्ञान ओझा संभाल रहे हैं। सवाल यह है कि, क्या जाफर का अनुभव उन्हें इस कुर्सी तक पहुंचा पाएगा या बोर्ड के भीतर का समर्थन ओझा को बनाए रखेगा।
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जाफर ने मुख्यचयनकर्ता के लिए किया आवेदन
मीडिया से हुई बातचीत में जाफर ने स्पष्ट किया कि, उन्होंने मुख्य चयनकर्ता के पद के लिए अर्जी दी है। अब सबकी नजर क्रिकेट एडवाइजरी कमेटी (CAC) पर टिक गई हैं। यही समिति टीम इंडिया के चयनकर्ताओं का चुनाव करती है, यानी जाफर का भविष्य अब उसके फैसले पर निर्भर करेगा।

अगर सीएसी उनके नाम पर मुहर लगाती है, तो वे चयन समिति के सबसे अनुभवी सदस्य होने के नाते सीधे मुख्य चयनकर्ता की कुर्सी तक पहुंच सकते हैं। जाफर की यह पुष्टि इसलिए भी अहम है कि, इसके बाद इस पद को लेकर चल रही अटकलों पर काफी हद तक विराम लग गया है और एक ठोस दावेदार सामने आ गया है।
टेस्ट अनुभव बना सबसे बड़ा पैमाना
चयन समिति में परंपरा रही है कि, जिस सदस्य ने सबसे ज्यादा टेस्ट मैच खेले हों, उसे ही मुख्य चयनकर्ता बनाया जाता है। इसी पैमाने पर जाफर का दावा मजबूत दिखता है। उन्होंने भारत के लिए 31 टेस्ट खेले हैं, जबकि अंतरिम चीफ सेलेक्टर प्रज्ञान ओझा के नाम 24 टेस्ट दर्ज हैं। यानी जाफर के समिति में आते ही अनुभव का पलड़ा उनकी ओर झुक जाएगा और इस परंपरा के हिसाब से वे नए चीफ सेलेक्टर होंगे। सात टेस्ट का यह अंतर कागज पर भले छोटा लगे, लेकिन चयन समिति के भीतर वरिष्ठता तय करने में यही आंकड़ा निर्णायक साबित हो सकता है।
पार्थिव पटेल ने नहीं किया आवेदन
इस पद के लिए पहले पूर्व विकेटकीपर पार्थिव पटेल का नाम भी चर्चा में था, लेकिन रिपोर्ट्स के अनुसार उन्होंने इस पद के लिए आवेदन ही नहीं किया। ऐसे में दौड़ से एक बड़ा नाम बाहर हो गया है और जाफर प्रमुख दावेदार के रूप में उभरकर सामने आए हैं। पटेल के पीछे हटने से मुकाबला अब मुख्य रूप से जाफर और ओझा के बीच सिमटता दिख रहा है।
ओझा को मिल रहा है बड़ा समर्थन
हालांकि, मामला इतना सीधा नहीं है। खबरों की मानें तो प्रज्ञान ओझा को बीसीसीआई के शीर्ष अधिकारियों का काफी समर्थन हासिल है। इसी वजह से माना जा रहा है कि, वे चीफ सेलेक्टर की कुर्सी पर बने रह सकते हैं। यह समर्थन सिर्फ ओझा तक सीमित नहीं रहेगा। इसका असर पांचवें चयनकर्ता की नियुक्ति प्रक्रिया पर भी पड़ सकता है। यानी नियमों और अनुभव के पैमाने के बावजूद बोर्ड की पसंद-नापसंद इस फैसले में निर्णायक भूमिका निभा सकती है। ऐसे में जाफर के लिए चुनौती सिर्फ आंकड़ों की नहीं, बल्कि बोर्ड के भीतर के समीकरणों की भी है।
रमेश पवार की एंट्री से बदलेगा समीकरण?
चयन समिति में खाली पद वेस्ट जोन का है। इसी आधार पर चर्चा है कि पूर्व स्पिनर रमेश पवार भी इस पद के दावेदार हो सकते हैं। पवार ने भारत के लिए सिर्फ 2 टेस्ट खेले हैं और वे वेस्ट जोन से ही आते हैं। अगर उनकी नियुक्ति होती है, तो समिति में सबसे ज्यादा टेस्ट अनुभव ओझा के पास ही रहेगा और प्रज्ञान मुख्य चयनकर्ता बने रहेंगे। इस लिहाज से पवार का नाम ओझा के पक्ष वाले समीकरण को मजबूती देता है। अब तक यह सिर्फ अटकलें हैं और पवार की ओर से आवेदन की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन अगर वे मैदान में उतरते हैं तो जाफर की राह मुश्किल हो सकती है।
सीएसी करेगी आकलन
आवेदन आने के बाद सीएसी उनका आकलन करेगी। समिति यह भी देखेगी कि बीसीसीआई किस उम्मीदवार को तरजीह देना चाहता है। इसके बाद ही चयन समिति में आखिरी खाली पद पर नियुक्ति की पुष्टि होगी। यानी जाफर का आवेदन भले ही सुर्खियों में हो, लेकिन अंतिम फैसला सीएसी की प्रक्रिया और बोर्ड के रुख पर निर्भर करेगा। इस पूरी प्रक्रिया में यह भी तय होगा कि चयन समिति का अंतिम स्वरूप क्या होगा और उसकी अगुवाई कौन करेगा।
फिलहाल तस्वीर साफ नहीं है। एक तरफ अनुभव की परंपरा जाफर के पक्ष में है, तो दूसरी तरफ बोर्ड अधिकारियों का भरोसा ओझा के साथ बताया जा रहा है। रमेश पवार जैसे नामों की चर्चा ने मुकाबले को और उलझा दिया है। चयन समिति की इस खाली कुर्सी पर होने वाली नियुक्ति टीम इंडिया के भावी फैसलों की दिशा भी तय करेगी, इसलिए इस पर क्रिकेट प्रेमियों की निगाहें टिकी हैं। आने वाले दिनों में सीएसी की बैठक और आवेदनों के आकलन के बाद ही तय होगा कि भारतीय क्रिकेट का अगला चीफ सेलेक्टर कौन बनेगा। तब तक क्रिकेट जगत की निगाहें इस नियुक्ति पर टिकी रहेंगी।
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