पाटा पिच पर खूब बरसे रन, गंभीर बोले- ‘यह क्रिकेट नहीं, सिर्फ बल्लेबाजी है’

गुवाहाटी। भारत और वेस्टइंडीज के बीच खेले गए वनडे में रनों की ऐसी बरसात हुई कि हर कोई देख कर दंग रह गया। दोनों टीमों ने मिलकर 811 रनों का विशाल स्कोर खड़ा कर दिया। वेस्टइंडीज के 405 रनों के जवाब में भारत ने 406 का लक्ष्य महज 43.3 ओवर में हासिल कर लिया और जीत दर्ज की। इस मुकाबले में शुभमन गिल ने नाबाद 233 और रोहित शर्मा ने 101 रन बनाए। पाटा पिच पर गेंदबाज जिस तरह से बेबस दिखे, उसे लेकर भारत के हेड कोच गौतम गंभीर ने कहा, ‘यह क्रिकेट नहीं है, यह सिर्फ बल्लेबाजी है।’

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 कभी मैच जिताने की गारंटी माना जाता था ये स्कोर

वेस्टइंडीज का 405/7 उसके वनडे इतिहास का सबसे बड़ा स्कोर था। एक दौर था, जब इतना बड़ा स्कोर मैच जिताने की गारंटी माना जाता था, लेकिन गुवाहाटी में जिस तरह से धुआंधार बल्लेबाजी हो रही थी, यह स्कोर बचाव के लिए नाकाफी साबित हुआ। 811 रनों के इस रन-महोत्सव के बीच एक सवाल जो तेजी से उठ रहा है वह है, क्या यह बल्लेबाजों का टैलेंट था या गेंदबाजों के खिलाफ पिच  ने खुली बगावत कर दी थी? अगर 405 रन भी सुरक्षित नहीं हैं, तो गेंदबाज के पास आखिर बचता क्या है?

गिल-रोहित ने मचाया धमाल

इस सवाल का जवाब शुभमन गिल और रोहित शर्मा ने बल्ले से दिया। गिल ने 133 गेंदों में नाबाद 233 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया। इस पारी में उन्होंने 26 चौके और 8 छक्के भी लगाए। यह वनडे का सबसे तेज दोहरा शतक भी है। दूसरी तरफ रोहित ने 75 गेंदों में 101 रन बनाए, जिसमें 10 चौके और 6 छक्के भी शामिल थे। दोनों ने पहले विकेट के लिए 255 रन जोड़कर वेस्टइंडीज के गेंदबाजी आक्रमण की कमर तोड़ दी।

Guwahati ODI

गिल और रोहित की बल्लेबाजी की चमक पर कोई सवाल नहीं है। 233 और 101 रन किसी भी पिच पर बड़ी पारी मानी जाएगी। मगर इस मुकाबले की तस्वीर सिर्फ बल्लेबाजों के कौशल से पूरी नहीं होती। उसके फ्रेम में पिच को भी रखना होगा।

पिच से गायब थे सीम और उछाल

गुवाहाटी में गेंद को हवा से खास मदद नहीं मिली। पिच से सीम गायब थी और बल्लेबाज को असहज करने वाला उछाल भी नहीं था। गेंद आराम से बल्ले तक आती रही और बल्लेबाज उसे अपनी मर्जी से खेलते रहे। ऐसे हालात में गेंदबाज की छोटी सी गलती की कीमत बढ़ जाती है और बल्लेबाज के लिए आक्रमण के रास्ते खुल जाते हैं। नतीजा यह रहा कि, एक टीम ने 405 रन बनाए और दूसरी ने 406। दोनों पारियों के बीच मुकाबले की जगह मानो एक ही सवाल था कि कौन ज्यादा तेजी से रन बनाएगा।

गंभीर ने पकड़ी समस्या

811 रनों के आंकड़े को आसानी से वनडे क्रिकेट का उत्सव बताकर आगे बढ़ा जा सकता था, लेकिन भारत के हेड कोच गौतम गंभीर ने इसी चमकदार तस्वीर में गेंदबाजों की बेबसी देखी। सीरीज जीतने के बाद ब्रॉडकास्टर से बातचीत में गंभीर ने कहा कि, बल्ले और गेंद के बीच ज्यादा मुकाबला होना चाहिए। उन्होंने साफ कहा, ‘यह क्रिकेट नहीं है, यह सिर्फ बल्लेबाजी है।’

गंभीर ने युवा गेंदबाजों की स्थिति का उदाहरण दिया। उनका सवाल था कि, ऐसी पिच पर कोई युवा गेंदबाज क्या कर सकता है, जहां विपक्षी टीम 400 रन बना दे और फिर उसकी अपनी टीम भी 400 का पीछा कर ले। रिकॉर्ड, दर्शकों और ब्रॉडकास्टर के नजरिए से ऐसा मैच शानदार हो सकता है, लेकिन एक क्रिकेट फैन और कोच के तौर पर गेंदबाजों के प्रति भी सहानुभूति होनी चाहिए।

बल्ले और गेंद की असली टक्कर

बल्लेबाजों के लिए ऐसी पिच स्वर्ग हो सकती है, लेकिन क्रिकेट में गेंदबाज सिर्फ संख्या पूरी करने के लिए नहीं होता। उसे हवा से कुछ मिलना चाहिए, पिच से कुछ मिलना चाहिए, उछाल में थोड़ा धोखा मिलना चाहिए या बल्लेबाज को अपनी तकनीक पर दोबारा सोचने की मजबूरी आनी चाहिए। यही तो बल्ले और गेंद की असली टक्कर है। जब ये सारे सवाल पिच से गायब हो जाएं, तो जवाब देना बल्लेबाज का काम रह जाता है।

गिल और रोहित ने वही किया। ऐसी परिस्थितियों में दुनिया का कोई भी शीर्ष बल्लेबाज कुछ समय के लिए ब्रैडमैन का अवतार नजर आ सकता है। यहां ब्रैडमैन का जिक्र किसी की महानता तय करने के लिए नहीं, बल्कि उस असंतुलन को समझाने के लिए है, जिसमें बल्लेबाज के पास विकल्पों की भरमार हो और गेंदबाज के पास हथियार सीमित।

असाधारण माना जाता था 400 का आंकड़ा 

वनडे क्रिकेट में 400 का आंकड़ा कभी असाधारण माना जाता थ,लेकिन गुवाहाटी के मैदान में दोनों टीमों ने  आसानी से इसे पार कर लिया। फर्क बस इतना रहा कि, वेस्टइंडीज 405 पर रुक गया और भारत ने 406 तक पहुंचकर भी 39 गेंद बचा ली।

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इसका मतलब यह नहीं कि, हर 400 पार का स्कोर पिच की वजह से बनता है या हर बड़ी पारी को सिर्फ विकेट का उपहार मान लिया जाए। गिल की 233 और रोहित की 101 रनों की पारी में उनका कौशल, आक्रामकता और शॉट चयन भी शामिल है। लेकिन जब एक ही मैच में दोनों टीमें 400 पार कर जाएं, तो पिच की भूमिका पर सवाल उठना स्वाभाविक है। गंभीर ने यही सवाल उठाया है कि रिकॉर्ड चाहिए, लेकिन मुकाबले की कीमत पर नहीं।

स्कोरबोर्ड से बाहर की बहस

भारत ने सीरीज 2-0 से अपने नाम कर ली। गिल ने रिकॉर्ड बुक में अपना नाम लिखवा लिया, रोहित ने शतक के साथ अपनी छाप छोड़ी और 406 का रन चेज इतिहास में दर्ज हो गया, किन्तु गुवाहाटी की असली बहस स्कोरबोर्ड से बाहर है। क्रिकेट में बल्लेबाज को रन बनाने का मौका मिलना चाहिए, लेकिन गेंदबाज को विकेट लेने का मौका भी मिलना चाहिए। वरना 400 रन का पहाड़ भी पाटा पिच पर रेत की दीवार साबित होगा।

गिल की 233 रनों की पारी शानदार थी, इसमें कोई शक नहीं। मगर सवाल यह भी है कि उन्हें रोकने के लिए गेंदबाजों के पास कितना मौका था। जब पिच से स्विंग, सीम या उछाल की मदद ही न मिले, तो बल्लेबाज के लिए रन बनाना काफी आसान हो जाता है। ऐसे में गिल की पारी के साथ पिच और गेंदबाजों की मजबूरी पर बात करना भी जरूरी है।

 

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