
लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार जल संरक्षण, भूजल प्रबंधन और राज्य के हर नागरिक तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने की दिशा में निरंतर नए आयाम स्थापित कर रही है। इसी कड़ी में, राज्य में भूजल स्रोतों की स्थिति और जल गुणवत्ता की पड़ताल के मामले में यूपी ने पूरे देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। इस अभियान के तहत राज्य एवं जिला स्तरीय प्रयोगशालाओं के माध्यम से प्रदेशभर के भूजल स्रोतों, भूमिगत जलाशयों और ओवरहेड टैंकों सहित पानी के विभिन्न स्रोतों की गहन जांच की गई।
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45,361 भूजल स्रोतों का हुआ परीक्षण
जल शक्ति मंत्रालय (भारत सरकार) के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 की प्रथम छमाही के लिए उत्तर प्रदेश को 48,055 भूजल स्रोतों की जांच का लक्ष्य सौंपा गया था।

इसके जवाब में राज्य ने 45,361 स्रोतों का परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है, जो कि कुल लक्ष्य का 94.39 प्रतिशत है। 15 सितंबर 2026 तक के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय स्तर पर राज्यों की तालिका में सबसे ऊपर है।
जल गुणवत्ता पर निगरानी के निर्देश
यूपी जल निगम के प्रबंध निदेशक योगेश कुमार ने इस विषय पर जानकारी देते हुए कहा कि भूजल स्रोतों का नियमित और वैज्ञानिक परीक्षण पानी की गुणवत्ता सुनिश्चित करने तथा स्रोतों की स्थिरता की निगरानी के लिए अत्यंत आवश्यक है। केंद्र सरकार द्वारा भी स्रोतों के टिकाऊपन और जल गुणवत्ता की सख्त निगरानी पर विशेष जोर दिया जा रहा है। उत्तर प्रदेश ने इस मानक पर सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया है और आगे भी सभी नागरिकों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के प्रयास पूरी निष्ठा से जारी रहेंगे।

पंजाब और आंध्र प्रदेश को पीछे छोड़कर यूपी बना नंबर-1 भूजल परीक्षण की राज्यवार तालिका में उत्तर प्रदेश के बाद पंजाब दूसरे और आंध्र प्रदेश तीसरे स्थान पर रहे। पंजाब ने अपने निर्धारित लक्ष्य का 83.46 प्रतिशत तथा आंध्र प्रदेश ने भी 83.46 प्रतिशत काम पूरा किया। इस सूची में उत्तराखंड 82.30 प्रतिशत के साथ चौथे और केरल 81.13 प्रतिशत प्रदर्शन के साथ पांचवें पायदान पर बना हुआ है।
44% आगे निकला उत्तर प्रदेश
राष्ट्रीय औसत से 44 प्रतिशत आगे निकला उत्तर प्रदेश राज्य प्रयोगशाला प्रमुख एवं यूपी जल निगम के अधीक्षण अभियंता ज्ञानेंद्र कुमार चौधरी ने बताया कि, परीक्षण अभियानों में उत्तर प्रदेश का 94.39 प्रतिशत का प्रदर्शन, देश के राष्ट्रीय औसत 50.46 प्रतिशत से काफी आगे है। इसका सीधा अर्थ यह है कि, यूपी ने राष्ट्रीय स्तर के औसत से लगभग 44 प्रतिशत अधिक सफलता हासिल की है।
48 हजार से अधिक स्रोतों की जांच का था लक्ष्य वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राज्य को कुल 48,055 भूजल स्रोतों के परीक्षण का लक्ष्य दिया गया था। इसमें से 45,361 स्रोतों की जांच का काम खत्म हो चुका है और अब केवल 2,694 स्रोतों का परीक्षण किया जाना बाकी है। इस प्रकार प्रदेश ने पहली छमाही की समयावधि में ही अपने वार्षिक लक्ष्य का एक प्रमुख हिस्सा सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है।
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