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एआई रेट्रो फोटो ट्रेंड बन सकता है मुसीबत, साइबर क्राइम ब्यूरो ने किया आगाह

सोशल मीडिया की दुनिया में इन दिनों एक नया एआई ट्रेंड जबरदस्त तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें लोग अपनी सामान्य तस्वीरों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से 80 के दशक के रेट्रो लुक में बदलकर सोशल मीडिया पर साझा कर रहे हैं। इस ट्रेंड के तहत यूजर्स पुराने जमाने के पहनावे, तत्कालीन हेयर स्टाइल और चेहरे की बनावट में बदलाव करके नॉस्टेल्जिक अंदाज वाली तस्वीरें अपलोड कर रहे हैं, जो इंस्टाग्राम, फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से लोकप्रिय हो रही हैं। हालांकि, इस बढ़ते ट्रेंड के बीच स्टेट सीआईडी की साइबर क्राइम ब्यूरो ने आम जनता को सतर्क रहने की गंभीर चेतावनी जारी की है।

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साइबर क्राइम ब्यूरो की सख्त हिदायत

साइबर क्राइम ब्यूरो के अधिकारियों ने स्पष्ट रूप से कहा है कि, किसी भी अनजान या असत्यापित एआई एप्लिकेशन अथवा वेबसाइट पर अपने चेहरे की स्पष्ट तस्वीर अपलोड करने से पहले लोगों को पूरी जानकारी और सावधानी बरतनी चाहिए। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, आज के डिजिटल युग में जहां एआई तकनीक इतनी विकसित हो चुकी है, वहां एक साधारण सी दिखने वाली तस्वीर भी बेहद संवेदनशील डिजिटल पहचान सामग्री का रूप ले सकती है।

CYBER CRIME

विशेषज्ञों की मानें तो चेहरे की एक साफ और स्पष्ट तस्वीर का दुरुपयोग डीपफेक कंटेंट, नकली सोशल मीडिया प्रोफाइल और भ्रामक वीडियो तैयार करने में आसानी से किया जा सकता है। अधिकारियों ने बताया कि, साइबर अपराधी किसी व्यक्ति की तस्वीर को किसी अन्य व्यक्ति के चेहरे के साथ तकनीकी रूप से मिलाकर ऐसा वीडियो तैयार कर सकते हैं, जिसमें असली और नकली सामग्री के बीच फर्क कर पाना आम आदमी के लिए लगभग असंभव हो जाता है।

इंटरनेट पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध तस्वीरों का इस्तेमाल कर अपराधी पीड़ित के चेहरे का एक डिजिटल मॉडल तैयार कर लेते हैं, जिसके आधार पर वे फर्जी और आपत्तिजनक कंटेंट बनाने में सक्षम हो जाते हैं।

फर्जी प्रोफाइल बनाकर की जाती है ठगी

साइबर क्राइम विशेषज्ञों ने चेताया है कि, अपराधी सार्वजनिक सोशल मीडिया अकाउंट्स या एआई एप्लिकेशन पर अपलोड की गई तस्वीरों का इस्तेमाल कर फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल तैयार कर सकते हैं। इसके बाद ये अपराधी पीड़ित के परिचितों, रिश्तेदारों और दोस्तों को संदेश भेजकर बीमारी, दुर्घटना या किसी अन्य आपातकालीन स्थिति का बहाना बनाकर उनसे पैसों की मांग करते हैं।

कई मामलों में देखा गया है कि इस तरह के फर्जी अकाउंट का इस्तेमाल कर आपत्तिजनक सामग्री साझा की जाती है, जिससे असली व्यक्ति की सामाजिक और पारिवारिक छवि को गंभीर नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जाती है। इसके अलावा, ऐसे फर्जी वीडियो और तस्वीरों का इस्तेमाल किसी व्यक्ति को बदनाम करने, मानसिक रूप से डराने-धमकाने, आर्थिक ठगी करने या फिर ब्लैकमेलिंग करने के लिए भी किया जाता है।

विशेषज्ञों ने यह भी आगाह किया है कि,  एक बिल्कुल सामान्य दिखने वाली तस्वीर में भी एआई तकनीक के जरिए ऐसे बदलाव किए जा सकते हैं, जिससे उसे अश्लील अथवा अन्य किसी आपत्तिजनक संदर्भ में पेश किया जा सके।

बच्चों और महिलाओं की तस्वीरों को लेकर विशेष सतर्कता जरूरी

साइबर क्राइम ब्यूरो ने आम जनता को सलाह दी है कि यदि किसी के साथ ऐसी कोई घटना होती है, जहां उसकी तस्वीर का दुरुपयोग किया गया हो, तो उसे तुरंत सबूत सुरक्षित रखने चाहिए और बिना देर किए पुलिस या साइबर अपराध संबंधी तंत्र को इसकी सूचना देनी चाहिए। खासतौर पर बच्चों, महिलाओं और परिवार के अन्य सदस्यों की निजी तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा करते समय अतिरिक्त सतर्कता बरतने की जरूरत पर बल दिया गया है, क्योंकि यह वर्ग साइबर अपराधियों के निशाने पर सबसे ज्यादा रहता है।

विशेषज्ञों की सलाह है कि लोगों को अपने सार्वजनिक सोशल मीडिया अकाउंट पर निजी तस्वीरों की संख्या सीमित रखनी चाहिए और अपनी प्रोफाइल की गोपनीयता सेटिंग को यथासंभव मजबूत बनाना चाहिए, ताकि अनजान लोग आसानी से उनकी तस्वीरों तक न पहुंच सकें।

CYBER CRIME

इसके साथ ही मोबाइल फोन में किसी भी नए एआई फोटो एडिटिंग एप्लिकेशन को इंस्टॉल करने से पहले उसके डेवलपर की जानकारी, अन्य उपयोगकर्ताओं की समीक्षा और एप द्वारा मांगी जा रही अनुमतियों की बारीकी से जांच करनी चाहिए। जो एप बिना किसी ठोस कारण के अत्यधिक अनुमतियां मांगते हैं, उनसे दूरी बनाकर रखनी चाहिए। साथ ही, एक बार इस्तेमाल के बाद उस एप को दी गई गैरजरूरी अनुमतियों को तुरंत बंद कर देना चाहिए, ताकि वह एप बैकग्राउंड में उपयोगकर्ता का डेटा एकत्र न कर सके।

डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित रखना बेहद जरूरी

साइबर क्राइम ब्यूरो ने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया है कि यदि किसी व्यक्ति की तस्वीर का दुरुपयोग करते हुए उसके साथ ठगी, ब्लैकमेलिंग या फर्जी प्रोफाइल बनाने जैसी कोई घटना सामने आती है, तो पीड़ित को घबराने के बजाय तुरंत सभी संबंधित डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखना चाहिए।

इनमें संदिग्ध चैट की बातचीत, स्क्रीनशॉट, फर्जी प्रोफाइल का लिंक, संबंधित मोबाइल नंबर, बैंक लेनदेन का विवरण और आपत्तिजनक फोटो या वीडियो शामिल हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट रूप से आगाह किया है कि ऐसे साक्ष्यों को गुस्से या शर्मिंदगी में डिलीट करने के बजाय तुरंत पुलिस अथवा साइबर अपराध विभाग को उपलब्ध कराना चाहिए, क्योंकि यही साक्ष्य आगे की जांच में अहम भूमिका निभाते हैं।

यदि किसी व्यक्ति के साथ आर्थिक साइबर ठगी की घटना घटित होती है, तो ऐसी स्थिति में बिना किसी देरी के राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर तुरंत शिकायत दर्ज करानी चाहिए। यह हेल्पलाइन विशेष रूप से साइबर अपराध और ऑनलाइन आर्थिक धोखाधड़ी की शिकायतों के त्वरित निवारण के लिए स्थापित की गई है।

 मनोरंजन से पहले सुरक्षा जरूरी

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले इस तरह के एआई ट्रेंड्स मनोरंजन की दृष्टि से भले ही आकर्षक लगें, लेकिन इनके पीछे छिपे संभावित खतरों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। तकनीक जितनी तेजी से आगे बढ़ रही है, साइबर अपराधी भी उतनी ही तेजी से उसका दुरुपयोग करने के नए-नए तरीके खोज रहे हैं।

ऐसे में जरूरी है कि आम नागरिक किसी भी नए ट्रेंड में शामिल होने से पहले उससे जुड़े जोखिमों को समझें और अपनी डिजिटल पहचान की सुरक्षा को प्राथमिकता दें। विशेषज्ञों की मानें तो सतर्कता और जागरूकता ही इस तरह के साइबर खतरों से बचने का सबसे कारगर उपाय है।

 

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