यूपी में 25 हजार करोड़ का निवेश अधर में, रद्द हो सकता है पुच एआई का MoU, सीएम योगी हुए सख्त

लखनऊ। उत्तर प्रदेश को निवेश का हब बनाने की दिशा में जुटी राज्य सरकार के सामने एक असहज स्थिति उत्पन्न हो गई है। पिछले सप्ताह इन्वेस्ट यूपी ने पुच एआई नामक एक निजी कंपनी के साथ प्रदेश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पार्क स्थापित करने के लिए 25 हजार करोड़ रुपये के निवेश का समझौता ज्ञापन (MoU) साझा किया था।

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विवाद में आया एमओयू

 हालांकि, यह समझौता अब अपनी तार्किक परिणति तक पहुंचने से पहले ही विवादों की भेंट चढ़ता नजर आ रहा है। जैसे ही इस भारी-भरकम निवेश की खबर सार्वजनिक हुई, कंपनी की वास्तविक वित्तीय क्षमता और उसकी पृष्ठभूमि को लेकर गंभीर सवाल खड़े होने लगे। सोशल मीडिया से लेकर प्रशासनिक गलियारों तक इस बात की चर्चा तेज हो गई कि, आखिर एक इतनी कम पूंजी वाली कंपनी इतने बड़े प्रोजेक्ट को कैसे धरातल पर उतारेगी।

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शुरुआती जांच और सार्वजनिक दस्तावेजों के माध्यम से यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि, पुच एआई की अधिकृत पूंजी मात्र 42.9 लाख रुपये है। एक ऐसी कंपनी जिसकी कुल हैसियत 50 लाख रुपये भी नहीं है, उसके द्वारा 25 हजार करोड़ रुपये के निवेश का दावा करना प्रथम दृष्टया संदिग्ध प्रतीत हुआ। इस विसंगति के सामने आते ही विपक्षी दलों ने सरकार की कार्यप्रणाली को आड़े हाथों लेना शुरू कर दिया।

सपा ने की आलोचना

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर सरकार की आलोचना करते हुए इसे एक बड़ी प्रशासनिक चूक करार दिया। उन्होंने तर्क दिया कि, यदि एमओयू साइन करने से पहले कंपनी की वित्तीय साख और तकनीकी अनुभव की सामान्य जांच भी कर ली जाती, तो आज प्रदेश सरकार को इस स्थिति का सामना नहीं करना पड़ता। विपक्ष का आरोप है कि, निवेश के आंकड़ों को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने के चक्कर में बुनियादी सत्यापन की प्रक्रिया को नजरअंदाज किया गया। इस पूरे प्रकरण ने इन्वेस्ट यूपी और निवेश प्रस्तावों की जांच करने वाली सरकारी मशीनरी की जवाबदेही पर भी सवालिया निशान लगा दिया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि, इतने बड़े स्तर के प्रस्तावों में केवल कागजी दावों पर भरोसा करने के बजाय ड्यू डिलिजेंस यानी गहन मूल्यांकन की एक सख्त प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए। आमतौर पर बड़े निवेश प्रस्तावों में कंपनी का टर्नओवर, पिछले प्रोजेक्ट्स का अनुभव और निवेश की फंडिंग के स्रोतों का विवरण अनिवार्य होता है।

कंपनी ने पेश की गलत नजीर

पुच एआई के मामले में इन मानकों की अनदेखी ने भविष्य के लिए एक गलत नजीर पेश की है। मामला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संज्ञान में आने के बाद सरकार ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश में निवेश की प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता के साथ संचालित हो रही है और इसमें किसी भी प्रकार की अनियमितता या लापरवाही को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

मुख्यमंत्री के कड़े निर्देशों के बाद ‘इन्वेस्ट यूपी’ ने अब इस समझौते को निरस्त करने की औपचारिक प्रक्रिया शुरू कर दी है। विभाग ने कंपनी को अंतिम अवसर देते हुए बृहस्पतिवार तक सभी आवश्यक वित्तीय दस्तावेज और स्पष्टीकरण पेश करने का निर्देश दिया है। अधिकारियों का कहना है कि, यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर कंपनी अपनी वित्तीय सक्षमता साबित करने वाले संतोषजनक दस्तावेज उपलब्ध नहीं करा पाती है, तो एमओयू को स्वतः ही रद्द मान लिया जाएगा।

फिलहाल कंपनी की ओर से कोई ठोस जवाब न आने के कारण मामला और अधिक संदिग्ध हो गया है। प्रशासन अब इस बात की भी आंतरिक जांच कर रहा है कि आखिर फाइल किन स्तरों से होकर गुजरी और किस आधार पर इतनी कम पूंजी वाली कंपनी को इतने बड़े प्रोजेक्ट की मंजूरी दी गई।

अधर में 25 हजार करोड़ का निवेश

यह घटनाक्रम उत्तर प्रदेश के आगामी निवेश अभियानों के लिए एक बड़े सबक के रूप में देखा जा रहा है। जहां एक ओर सरकार प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए प्रयासरत है, वहीं पुच एआई जैसे मामले प्रक्रियात्मक खामियों को उजागर करते हैं। विशेषज्ञों का सुझाव है कि भविष्य में इस तरह की स्थिति से बचने के लिए निवेश मित्र पोर्टल और संबंधित विभागों को कंपनियों के वित्तीय डेटाबेस के साथ वास्तविक समय में सत्यापन की व्यवस्था करनी चाहिए।

फिलहाल, 25 हजार करोड़ के इस तथाकथित निवेश का भविष्य पूरी तरह से अधर में है और अब यह केवल एक औपचारिक कागजी कार्रवाई मात्र रह गया है जिसे जल्द ही समाप्त कर दिया जाएगा। सरकार का लक्ष्य अब इस विवाद को पीछे छोड़कर पारदर्शी और विश्वसनीय निवेशकों के साथ विकास की राह पर आगे बढ़ना है।

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