
लखनऊ। इंटीग्रल विश्वविद्यालय के विधि संकाय ने आज 5वें एआईयू राष्ट्रीय मूट कोर्ट प्रतियोगिता-2026 का औपचारिक उद्घाटन किया। 9 से 11 अप्रैल तक चलने वाली यह तीन दिवसीय प्रतिष्ठित प्रतियोगिता देश भर से आए आकांक्षी विधिवेत्ताओं को उनके अधिवक्ता कौशल और शोध क्षमता प्रदर्शित करने का अवसर प्रदान करेगी।
केंद्रीय सभागार में आयोजित उद्घाटन समारोह पारंपरिक दीप प्रज्वलन के साथ शुरू हुआ, जो विधि शिक्षा के नए अध्याय की शुरुआत का प्रतीक था।विधि संकायाध्यक्ष एवं डीन प्रो. (डॉ.) नसीम अहमद ने स्वागत भाषण में कहा कि यह प्रतियोगिता संकाय के उस दृष्टिकोण का प्रमाण है, जो न्याय के प्रति समर्पित पूर्णांकीकृत विधिवेत्ताओं को तैयार करने पर केंद्रित है।इसके बाद कुलसचिव प्रो. (डॉ.) मोहम्मद हारिस सिद्दीकी ने संबोधित करते हुए विश्वविद्यालय की स्थापना (2004) से लेकर वर्तमान में उपलब्धियों तक की यात्रा पर प्रकाश डाला।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. फुरकान कमार ने विधि शिक्षा में उत्कृष्टता के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता पर जोर देते हुए कहा कि एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज़ (एआईयू) द्वारा पहली बार किसी निजी विश्वविद्यालय को यह राष्ट्रीय मूट कोर्ट प्रतियोगिता प्रदान करना गौरव का विषय है। उन्होंने प्रो. (डॉ.) नसीम अहमद के अथक प्रयासों की सराहना की।
समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उत्तर प्रदेश राज्य विधि आयोग के अध्यक्ष माननीय जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव (सेवानिवृत्त) ने विधिक नैतिकता के सर्वोच्च मानकों को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने अधिवक्ता की व्यापक भूमिका पर बल दिया, जिसमें समाज के कमजोर वर्गों का उत्थान, संविधान के मूल्यों की रक्षा और समाज के प्रति उपयोगिता शामिल है। उन्होंने बॉलीवुड फ़िल्म धुरंधर से उदाहरण देते हुए कहा कि बलिदान परमो धर्मः बलिदान सर्वोच्च कर्तव्य है, अतः देशसेवा में सदैव बलिदान के लिए सदैव तत्पर रहना चाहिए ।
वस्तु एवं सेवा कर अपीलीय ट्रिब्यूनल के अध्यक्ष माननीय जस्टिस संतोष कुमार श्रीवास्तव ने विधिक परिदृश्य के बदलते स्वरूप पर अमूल्य विचार साझा करते हुए मूट कोर्ट्स की छात्रों में आत्मविश्वास जगाने वाली भूमिका पर प्रकाश डाला।प्रो-चांसलर डा.सैयद नदीम अख्तर ने कहा कि “मूट कोर्ट केवल तर्कों की प्रतियोगिता नहीं है”, बल्कि यह अधिवक्ता के व्यावहारिक पक्ष, सत्यनिष्ठा और विधि पेशे के प्रति अटूट समर्पण का माध्यम है। उन्होंने विश्वविद्यालय के नाम ‘इंटीग्रल’ के अर्थ पर जोर देते हुए कहा कि यह व्यावसायिक शिक्षा के साथ मूल्य और नैतिकता का समावेश करता है।
अतिथियों द्वारा विधि संकाय की प्रमुख पत्रिका ‘इंटीग्रल लॉ रिव्यू’ के पांचवें खंड का विमोचन भी किया गया।समारोह के बाद प्रतिभागी टीमों ने लॉट ड्रॉ और शोधकर्ता परीक्षा दी, जिससे प्रतियोगिता के दौर की औपचारिक शुरुआत हो गई। आगामी दिनों में टीमों के बीच कठिन मुकाबले देखने को मिलेंगे।



