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बुद्ध और दलित महापुरुषों के अपमान का इतिहास समाज भुलाएगा नहीं- बृजलाल
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कुशीनगर एयरपोर्ट से कपिलवस्तु अवशेष तक, बृजलाल ने गिनाए भाजपा के बौद्ध विकास कार्य
लखनऊ। पूर्व डीजीपी और राज्यसभा सांसद बृजलाल ने सपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के बौद्ध तीर्थ स्थलों के विकास संबंधी बयान पर करारा जवाब दिया है। उनका कहना है कि, बौद्ध स्थलों का विकास समाजवादी पार्टी के एजेंडे में कभी शामिल ही नहीं रहा। सपा के शासनकाल में बुद्ध प्रतिमा और बौद्ध भिक्षुओं पर हुआ हमला प्रदेश आज भी याद रखता है।
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2012 की घटना का जिक्र
बृजलाल ने बताया कि 17 अगस्त 2012 को लखनऊ में जुमे की नमाज के बाद निकले जुलूस ने बुद्धा पार्क में उत्पात मचाया था, जिसमें भगवान बुद्ध की मूर्ति और अन्य बौद्ध चिह्नों को क्षति पहुंचाई गई। उन्होंने दावा किया कि भंते अशोकानंद और उनके अनुयायियों के साथ हिंसा हुई तथा उनके वाहनों को भी नुकसान पहुंचाया गया, लेकिन तब की अखिलेश सरकार ने दोषियों पर सख्त कदम नहीं उठाया। उन्होंने इसे उस समय की सरकार की तुष्टिकरण नीति का नतीजा करार दिया।
अंबेडकर के प्रति भी रवैया सवालों में
सांसद ने कहा कि आज अखिलेश यादव बौद्ध तीर्थ स्थलों के विकास की बात करते नजर आ रहे हैं, जबकि उनकी सरकार का ट्रैक रिकॉर्ड बिल्कुल विपरीत रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा सरकार के दौरान कन्नौज मेडिकल कॉलेज से डॉ. भीमराव आंबेडकर का नाम हटा दिया गया था और आंबेडकर से संबंधित संस्थाओं-प्रतीकों को भी उचित सम्मान नहीं दिया गया। उन्होंने 2016 में आजम खान की बाबा साहब को लेकर दी गई टिप्पणी का भी हवाला दिया।
भाजपा का “विरासत से विकास” मॉडल
बृजलाल ने कहा कि इसके ठीक उलट भाजपा सरकार ने “विरासत से विकास” को अपनी नीति का अभिन्न हिस्सा बनाया है। अयोध्या में श्रीराम मंदिर, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर, मां विंध्यवासिनी कॉरिडोर के साथ-साथ कुशीनगर इंटरनेशनल एयरपोर्ट और बुद्धिस्ट सर्किट के तहत बौद्ध स्थलों के विकास पर काम चल रहा है।
कपिलवस्तु अवशेषों की नीलामी रुकवाने का जिक्र
उन्होंने कपिलवस्तु से जुड़े भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों का उल्लेख करते हुए बताया कि, विदेश में इनकी होने वाली नीलामी को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने पहल की थी। बृजलाल ने यह भी कहा कि उन्होंने खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस विषय पर पत्र लिखा था।
दलित विरोधी राजनीति का आरोप
बृजलाल ने अखिलेश यादव पर दलित विरोधी सियासत करने का इल्जाम लगाते हुए कहा कि, सपा के शासनकाल में दलित अधिकारियों-कर्मचारियों की पदावनति और आरक्षण आधारित पदोन्नति के मसले पर पार्टी का रुख भी समाज को याद है। उन्होंने कहा, “बुद्ध और दलित महापुरुषों के अपमान का इतिहास रखने वाले लोग आज बौद्ध स्थलों के विकास की बात कर रहे हैं। दलित समाज इस दोहरे चेहरे को बखूबी पहचानता है और इसे कभी नहीं भूलेगा।”
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