
नई दिल्ली। यमन के हूती विद्रोहियों ने मंगलवार तड़के सऊदी अरब के कई शहरों को निशाना बनाते हुए बड़ा हमला किया है, जिसमें अबहा, जजान, नजरान और खमिस मुशैत जैसे इलाके शामिल हैं। इस हमले में सैन्य ठिकानों की बजाय आम नागरिकों के घरों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया गया। एक रिपोर्ट में बताया गया है कि, इस हमले में कुल 73 लोग घायल हुए हैं। सऊदी नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन ने इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए हूती मिलिशिया के खिलाफ सख्त सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दी है।
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नागरिक और आर्थिक ठिकानों को बनाया निशाना
सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मलिकी ने बताया कि, हूती विद्रोहियों ने इस बार सीधे नागरिक बस्तियों और कारोबारी इलाकों को निशाना बनाया है।

यह हमला ऐसे वक्त हुआ है जब यमन में हूतियों और सऊदी अरब समर्थित सरकारी सेनाओं के बीच संघर्ष लगातार तेज होता जा रहा है। गठबंधन के प्रवक्ता ने साफ शब्दों में कहा कि हूती मिलिशिया को रोकने के लिए हर जरूरी सैन्य कदम उठाया जाएगा, जिससे आने वाले दिनों में क्षेत्रीय तनाव और गहराने की आशंका जताई जा रही है।
चार साल पुराना संघर्षविराम टूटा
गौरतलब है कि यमन में हूतियों और सऊदी समर्थित बलों के बीच पिछले कई हफ्तों से लड़ाई तेज हुई है, जिसने करीब चार साल से चले आ रहे संघर्षविराम को पूरी तरह खत्म कर दिया है। हूती विद्रोहियों ने इससे पहले आरोप लगाया था कि सऊदी अरब ने यमन के उत्तरी प्रांत अल-जौफ में एक जेल को निशाना बनाया, हालांकि सऊदी पक्ष की ओर से इन आरोपों पर विस्तृत सफाई सामने नहीं आई है। यमन का यह गृहयुद्ध अब सिर्फ स्थानीय संकट नहीं रहा, बल्कि पूरे खाड़ी क्षेत्र की स्थिरता के लिए खतरा बनता जा रहा है।
तेल बाजार पर पड़ेगा असर
सऊदी अरब पर हुए ताजा हमले का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर देखने को मिल रहा है। दरअसल सऊदी अरब दुनिया के सबसे बड़े तेल निर्यातक देशों में शुमार है, और हूती हमलों की वजह से सऊदी की तेल आपूर्ति व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ गई है। बाजार सूत्रों के मुताबिक, हूती हमलों की खबर के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंचती दिख रही हैं, क्योंकि आपूर्ति में रुकावट को लेकर चिंताएं बढ़ती जा रही हैं। रिपोर्टों के अनुसार डब्ल्यूटीआई क्रूड ऑयल जुलाई के उच्च स्तर को पार कर जून के बाद से सबसे ऊंचे स्तर पर कारोबार कर रहा है।
ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला
हूती विद्रोहियों ने बताया कि उन्होंने सऊदी अरब पर ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया, जिसमें अरामको की सुविधाओं और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। सऊदी अरब की ऊर्जा मंत्री ने भी पुष्टि की कि देश के दक्षिणी क्षेत्र में स्थित कई ऊर्जा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया गया, जिससे वहां आग लग गई और कुछ समय के लिए परिचालन ठप करना पड़ा। हालात पर काबू पाने के लिए आपातकालीन दल मौके पर भेजे गए।
बता दें कि यह हमला कोई नई घटना नहीं है। इससे पहले भी हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरामको की जिजान रिफाइनरी को कई बार निशाना बनाया है। जिजान रिफाइनरी पर सोमवार को दोबारा हमला हुआ, जो पिछले दो महीने में तीसरी बार था, जिस दौरान ब्रेंट क्रूड 97 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया था। इस रिफाइनरी का सामरिक महत्व इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए ईरान से जुड़े तनाव के बाद से सऊदी अरब का निर्यात रूट लाल सागर की तरफ स्थानांतरित हो रहा है।
भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर बढ़ा दबाव
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई इस तेजी का असर अब भारत में भी महसूस किया जा रहा है। सोमवार यानी 8 सितंबर को जारी आंकड़ों के मुताबिक ब्रेंट क्रूड करीब 97.34 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई क्रूड करीब 92.63 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था, जबकि भारतीय रुपये में ब्रेंट क्रूड करीब 9,181 रुपये प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया।
देश की राजधानी दिल्ली में मौजूदा समय में पेट्रोल करीब 102.12 रुपये प्रति लीटर और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर के भाव पर बिक रहा है। वहीं आर्थिक राजधानी मुंबई की स्थिति और भी ज्यादा महंगी बनी हुई है, जहां पेट्रोल 110 रुपये के आंकड़े को पार कर 111.21 रुपये प्रति लीटर तथा डीजल 99.82 रुपये प्रति लीटर के भाव पर बिक रहा है।
अभी स्थिर हैं पेट्रोल-डीजल की कीमतें
गौर करने वाली बात यह है कि देश में पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतें फिलहाल स्थिर बनी हुई हैं। इससे पहले 25 मई को सरकारी तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) ने पेट्रोल की कीमत में 2.61 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत में 2.71 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी, उसके बाद से दरों में कोई और बदलाव नहीं हुआ है। हालांकि बाजार जानकारों का कहना है कि अमेरिका और ईरान के बीच फिर से बढ़े तनाव तथा होर्मुज जलडमरूमध्य में लंबे समय तक रुकावट की आशंका के चलते कच्चे तेल की कीमतों में जुलाई के बाद से सबसे बड़ी साप्ताहिक बढ़त दर्ज की जा रही है, जिसका असर आगे चलकर घरेलू बाजार में भी दिख सकता है।
इसके अलावा मुंबई में सीएनजी की कीमतों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे ऑटो और टैक्सी का किराया भी प्रभावित हुआ है। जानकारों का मानना है कि अगर सऊदी अरब और यमन के बीच तनाव इसी तरह बढ़ता रहा और हूती हमले जारी रहे, तो आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों पर और दबाव बन सकता है, जिसका सीधा असर भारत जैसे तेल आयातक देशों की जेब पर पड़ना तय है।
क्षेत्रीय स्थिरता पर मंडराया खतरा
यमन लंबे समय से गृहयुद्ध और राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रहा है और हूती विद्रोहियों तथा सऊदी समर्थित सरकारी बलों के बीच जारी संघर्ष का असर अब सिर्फ यमन तक सीमित नहीं रह गया है। सऊदी अरब पर हुए ताजा हमलों के बाद खाड़ी क्षेत्र में तनाव और गहराने तथा दोनों पक्षों के बीच सैन्य कार्रवाई तेज होने की आशंका जताई जा रही है, जिससे न सिर्फ क्षेत्रीय स्थिरता बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर भी गंभीर खतरा मंडरा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर स्थिति इसी तरह बिगड़ती रही, तो इसका असर सिर्फ मध्य पूर्व तक सीमित न रहकर दुनियाभर के तेल बाजार और आम उपभोक्ताओं की जेब पर भी पड़ सकता है।
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