
देहरादून। भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य उत्सव श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की पूर्व संध्या पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में भगवान श्रीकृष्ण से कामना की है कि, प्रदेश के हर नागरिक के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली बनी रहे। यह संदेश उन्होंने जन्माष्टमी के पावन पर्व से एक दिन पहले जारी किया, जब पूरे प्रदेश में उत्सव की तैयारियां जोरों पर हैं और मंदिरों से लेकर घरों तक भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव को लेकर उत्साह का माहौल है।
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अपने संदेश में सीएम
धामी ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का संपूर्ण जीवन मानवता को सत्य और न्याय के मार्ग पर चलने की गहरी प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि भगवान कृष्ण का जीवन-दर्शन आज के दौर में भी उतना ही प्रासंगिक है, जितना सदियों पहले था, और यही वजह है कि उनके उपदेश आज भी करोड़ों लोगों के जीवन को दिशा देने का काम करते हैं।
मानवता के सच्चे संरक्षक हैं भगवान कृष्ण
मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में भगवान श्रीकृष्ण को मानवता का सच्चा संरक्षक, मार्गदर्शक और जीवन-दर्शन का प्रेरणास्रोत बताया। उन्होंने कहा कि, भगवान कृष्ण का जीवन हमें प्रेम, त्याग, सेवा, करुणा, सद्भाव और समरसता जैसे मूल्यों को आत्मसात करने की प्रेरणा देता है। उनके मुताबिक, आज के तेज रफ्तार और प्रतिस्पर्धी जीवन में इन मूल्यों की प्रासंगिकता और भी बढ़ जाती है, क्योंकि यही मूल्य समाज को जोड़े रखने और आपसी सौहार्द बनाए रखने का काम करते हैं।

मुख्यमंत्री ने इस मौके पर समाज के वंचित और उपेक्षित वर्गों के प्रति संवेदनशीलता बरतने और उनके कल्याण को लेकर भी एक अहम संदेश दिया। उन्होंने कहा कि भगवान कृष्ण का जीवन हमेशा से समाज के हर वर्ग, चाहे वह कितना भी वंचित या उपेक्षित क्यों न हो, उसके प्रति करुणा और सेवा भाव रखने की सीख देता है। यही भावना समाज में समानता और भाईचारे को मजबूत करने का आधार बनती है।
अपने संदेश में मुख्यमंत्री ने श्रीमद्भगवद्गीता का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण द्वारा दिया गया निष्काम कर्म का संदेश आज के समय में भी उतना ही सार्थक और प्रासंगिक बना हुआ है। उन्होंने कहा कि गीता के माध्यम से भगवान कृष्ण ने संपूर्ण मानव जाति को यह सिखाया कि, अपने कर्तव्यों का निर्वहन पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ करना चाहिए, बिना इस बात की चिंता किए कि इसका फल क्या मिलेगा। यह सिद्धांत आज भी हर उम्र और हर क्षेत्र के लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण जीवन-मंत्र माना जाता है।
सीएम धामी ने आगे कहा कि, गीता में निहित भक्ति, ज्ञान, योग और कर्म का समग्र संदेश व्यक्ति के जीवन में सकारात्मकता, आत्मविश्वास और संतुलन लाने का काम करता है। उनके मुताबिक, आज जब समाज में तनाव, प्रतिस्पर्धा और अनिश्चितता का माहौल बढ़ता जा रहा है, ऐसे समय में गीता के ये उपदेश लोगों को मानसिक स्थिरता और आत्मबल प्रदान करने का सशक्त माध्यम बन सकते हैं। यही कारण है कि आज भी देश-विदेश में लाखों लोग गीता के संदेशों से प्रेरणा लेकर अपने जीवन को नई दिशा देने का प्रयास करते हैं।
विकास में भागीदार बनने की अपील
अपने संदेश के आखिर में मुख्यमंत्री धामी ने प्रदेशवासियों से भावुक अपील करते हुए कहा कि, सभी लोग भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से प्रेरणा लेते हुए समाज में प्रेम, भाईचारे और समरसता की भावना को बढ़ावा दें। उन्होंने कहा कि, यही भावना है जो प्रदेश और देश को आगे बढ़ाने में सबसे बड़ी ताकत बन सकती है। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों का आह्वान किया कि वे इस पावन अवसर पर आपसी सद्भाव को मजबूत करते हुए उत्तराखंड के समग्र विकास में सक्रिय भागीदार बनें।
जन्माष्टमी पर उत्सव का माहौल
गौरतलब है कि, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व देशभर के साथ-साथ उत्तराखंड में भी बड़ी श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है। इस दिन प्रदेश के मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, झांकियां और भजन-कीर्तन का आयोजन किया जाता है। भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव को लेकर मंदिरों को विशेष रूप से सजाया जाता है और रात के बारह बजे भगवान कृष्ण के जन्म के समय भक्तगण बड़ी संख्या में मंदिरों में एकत्रित होकर उत्सव मनाते हैं। इसके अलावा घरों में भी परिवार के सदस्य मिलकर व्रत रखते हैं और भगवान कृष्ण की आराधना करते हैं।
यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह समाज को एकजुटता, सेवा भावना और नैतिक मूल्यों की याद दिलाने का भी अवसर माना जाता है। मुख्यमंत्री द्वारा दिया गया यह संदेश इसी भावना को आगे बढ़ाते हुए प्रदेशवासियों को आपसी सौहार्द और सामाजिक समरसता बनाए रखने की प्रेरणा देता है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का यह जन्माष्टमी संदेश न केवल भगवान श्रीकृष्ण के प्रति श्रद्धा व्यक्त करता है, बल्कि यह प्रदेशवासियों को कर्तव्यनिष्ठा, सेवा भावना और सामाजिक समरसता जैसे मूल्यों को अपनाने की भी प्रेरणा देता है। उम्मीद की जा रही है कि इस पावन पर्व पर पूरे उत्तराखंड में श्रद्धा और उल्लास का यह माहौल आने वाले दिनों में भी बना रहेगा, और लोग भगवान कृष्ण की शिक्षाओं से प्रेरणा लेकर समाज सेवा और विकास कार्यों में अपनी सक्रिय भूमिका निभाते रहेंगे।
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