\n\n\n\n\n \n

प्रत्याशियों को लेकर मायावती की अहम बैठक, दिवंगत विधायक के बेटे यूकेश को टिकट मिलन तय!

लखनऊ। अगले साल होने वाले यूपी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो चुकी हैं। इसी कड़ी में सोमवार को बहुजन समाज पार्टी की एक महत्वपूर्ण बैठक पार्टी प्रमुख मायावती की अध्यक्षता में आयोजित की गई। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य आगामी विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी प्रत्याशियों के चयन को लेकर रणनीति तैयार करना था।

इसे भी पढ़ें- स्कूलों में हिजाब विवाद पर मायावती ने स्पष्ट की राय, बोलीं- ‘कोर्ट तक नहीं जाना चाहिए मामला’

प्रिंस यूकेश की मौजूदगी से मिले संकेत

बैठक में पार्टी के दिवंगत विधायक उमाशंकर सिंह के पुत्र प्रिंस यूकेश की मौजूदगी ने राजनीतिक हलकों में खासी चर्चा बटोरी। बसपा ने इस बैठक में अपने सभी संभावित उम्मीदवारों को आमंत्रित किया था। इस सूची में प्रिंस यूकेश का शामिल होना इस बात का स्पष्ट संकेत माना जा रहा है कि, पार्टी उन्हें आगामी चुनाव में प्रत्याशी बनाने का लगभग मन बना चुकी है। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, यूकेश की बैठक में उपस्थिति महज औपचारिकता नहीं, बल्कि पार्टी की आगामी रणनीति का हिस्सा प्रतीत होती है।

75 जिलों के पदाधिकारियों के साथ गहन समीक्षा

बसपा प्रमुख मायावती ने इस दौरान उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों के जिलाध्यक्षों और वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ भी अलग से बैठक की। यह बैठक लखनऊ स्थित 12 माल एवेन्यू पर मौजूद बसपा के मुख्यालय में आयोजित हुई।

Mayawati

बैठक में पार्टी ने आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर अपनी तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की। इस दौरान उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया के साथ-साथ पोलिंग बूथ स्तर तक पार्टी की समितियों के पुनर्गठन को लेकर भी गहन चर्चा की गई, ताकि जमीनी स्तर पर संगठन को और मजबूत किया जा सके।

विरोधियों से सतर्क रहने की अपील

बैठक के दौरान मायावती ने पार्टी कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि, विरोधी दलों की ओर से अपनाए जाने वाले साम, दाम, दंड और भेद जैसे हथकंडों का पूरी मुस्तैदी से मुकाबला किया जाना चाहिए। उन्होंने कार्यकर्ताओं का आह्वान किया कि, वे प्रदेश में पांचवीं बार ‘सर्वजन हिताय-सर्वजन सुखाय’ की भावना पर आधारित सरकार बनाने के लक्ष्य के साथ पूरी ताकत से जुटें।

इसके साथ ही बसपा प्रमुख ने विरोधी पार्टियों पर मुफ्त योजनाओं यानी रेवड़ी बांटने की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए जनता से इस तरह की रणनीतियों को लेकर सतर्क रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि, चुनावी स्वार्थ पूरा करने के लिए अक्सर लुभावने वादे किए जाते हैं, लेकिन सरकार बनने के बाद इन वादों को पूरा करने के बजाय उनसे मुकर जाने की प्रवृत्ति देखी जाती रही है।

युवा पीढ़ी में भी नाराजगी का दावा

मायावती ने अपने संबोधन में युवा पीढ़ी का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि, जेन-जी और जेन-अल्फा के नाम से जानी जाने वाली युवा पीढ़ी भी विरोधी पार्टियों के रवैये से नाराज और आक्रोशित है। इस बयान के जरिए बसपा प्रमुख ने यह संकेत देने का प्रयास किया कि उनकी पार्टी युवाओं के बीच भी अपनी पैठ मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है।

कांशीराम पुण्यतिथि कार्यक्रम को लेकर घोषणा

बैठक के दौरान मायावती ने पार्टी के संस्थापक कांशीराम की पुण्यतिथि को लेकर भी एक अहम घोषणा की। उन्होंने बताया कि, इस वर्ष 9 अक्टूबर को आयोजित होने वाला पुण्यतिथि कार्यक्रम केवल राजधानी लखनऊ में ही आयोजित किया जाएगा।

mayawati

इसके तहत मुख्य कार्यक्रम लखनऊ स्थित मान्यवर कांशीराम स्मारक स्थल पर होगा, जहां पार्टी के बड़े नेता और कार्यकर्ता शामिल होंगे।

नेपाल में बाढ़ पर जताया दुख

बैठक के आखिर में मायावती ने नेपाल में आई भीषण बाढ़ की वजह से हुए जान-माल के भारी नुकसान पर गहरा दुख भी व्यक्त किया। उन्होंने उत्तर प्रदेश के लोगों से अपील की कि, वे अपनी क्षमता के अनुसार बाढ़ प्रभावित लोगों की मदद के लिए आगे आएं। इस बयान के जरिए बसपा प्रमुख ने मानवीय संवेदना और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश देने की कोशिश की।

चुनावी तैयारियों में जुटी बसपा

गौरतलब है कि, उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर सभी प्रमुख राजनीतिक दल अपनी-अपनी रणनीति तैयार करने में जुट गए हैं। बसपा भी इस दौड़ में पीछे नहीं रहना चाहती और इसी वजह से पार्टी प्रमुख मायावती लगातार जिला स्तर से लेकर बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने में जुटी हुई हैं। प्रत्याशियों के चयन को लेकर हुई इस बैठक से यह साफ संकेत मिलता है कि पार्टी जल्द ही अपने संभावित उम्मीदवारों की सूची को अंतिम रूप देने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है।

राजनीतिक गलियारों में इस बात की भी चर्चा है कि, दिवंगत विधायक उमाशंकर सिंह के परिवार को टिकट देकर पार्टी सहानुभूति कारक का भी लाभ उठाने की कोशिश कर सकती है। हालांकि पार्टी की ओर से अभी तक इस बारे में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। आने वाले दिनों में बसपा की ओर से प्रत्याशियों की औपचारिक घोषणा किए जाने की उम्मीद जताई जा रही है, जिसके बाद प्रदेश की सियासी तस्वीर और अधिक स्पष्ट हो सकेगी।

 

इसे भी पढ़ें- यूपी चुनाव 2027: यूपी में जातीय सियासत तेज, मायावती ने सपा को बताया गिरगिट

Related Articles

Back to top button