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वीधुरा में खेली गई खूनी बग्वाल, चोटिल हुए दर्जनों श्रद्धालु, बोले- ‘यह मां का आशीर्वाद है’

चंपावत। उत्तराखंड के चंपावत जिले में स्थित विश्व प्रसिद्ध मां वाराही धाम देवीधुरा में रक्षाबंधन के पावन पर्व पर एक बार फिर ऐतिहासिक बग्वाल का भव्य आयोजन हुआ। सदियों पुरानी इस अनूठी परंपरा को अपनी आंखों से देखने के लिए दूर-दूर से हजारों श्रद्धालु देवीधुरा पहुंचे। चार खाम और सात थोक के बग्वालियों के बीच खेली जाने वाली इस परंपरा ने एक बार फिर पूरे क्षेत्र को आस्था और उत्साह से सराबोर कर दिया। फल-फूल और पत्थरों की बरसात के बीच बग्वाल मैदान मानो रणभूमि में तब्दील हो गया, और चारों तरफ मां वाराही के जयकारों की गूंज सुनाई देने लगी।

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आठ मिनट तक चला पाषाण युद्ध

जानकारी के मुताबिक, दोपहर 1 बजकर 48 मिनट पर शुरू हुई यह ऐतिहासिक बग्वाल महज सात मिनट बाद, यानी 1 बजकर 55 मिनट पर संपन्न हो गई। इन आठ मिनटों के दौरान बग्वालियों ने अपने हाथों में परंपरागत ढाल थामे हुए एक-दूसरे पर जमकर फल-फूल और पत्थर बरसाए।

Maa Varahi Dham

वालिक, चम्याल, गहड़वाल और लमगड़िया इन चार खामों के बग्वालिए अपनी पारंपरिक वेशभूषा में मैदान में उतरे और सदियों से चली आ रही इस अनूठी परंपरा का बखूबी निर्वहन किया।यह बग्वाल केवल एक रस्म भर नहीं है, बल्कि उत्तराखंड की समृद्ध लोकसंस्कृति और सामुदायिक भागीदारी का प्रतीक मानी जाती है, जिसे देखने के लिए हर साल श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है।

चोट लगी, फिर भी आस्था नहीं डिगी

बग्वाल के दौरान कई बग्वाली वीरों के साथ-साथ कुछ श्रद्धालु भी चोटिल हुए। किसी के सिर पर चोट आई तो किसी को शरीर के अन्य हिस्सों में चोटें लगीं। बावजूद इसके, चोटिल श्रद्धालुओं और बग्वालियों के चेहरों पर दर्द से कहीं ज्यादा आस्था और संतोष का भाव नजर आया। चोटिल हुए बग्वालियों का कहना था कि मां वाराही की बग्वाल में लगने वाली चोट उनके लिए दर्द नहीं, बल्कि मां का आशीर्वाद मानी जाती है। यही अटूट श्रद्धा और विश्वास है, जिसकी वजह से यह ऐतिहासिक परंपरा आज भी उतनी ही जीवंत बनी हुई है, जितनी सदियों पहले थी।

Maa Varahi Dham

बग्वाल संपन्न होने के बाद परंपरा के अनुसार दोनों पक्षों के बग्वाली वीर आपस में गले मिले और भाईचारे का संदेश दिया, जो इस आयोजन की सबसे खास बात मानी जाती है, यहां प्रतिद्वंद्विता के बावजूद अंत में एकता और सौहार्द की भावना ही हावी रहती है।

 धामी ने की पूजा-अर्चना

बग्वाल के इस भव्य आयोजन में शामिल होने के लिए सीएम पुष्कर सिंह धामी खुद देवीधुरा पहुंचे। उन्होंने मां वाराही के दर्शन कर विधिवत पूजा-अर्चना की और प्रदेशवासियों की सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना की। मुख्यमंत्री ने देवीधुरा की इस बग्वाल परंपरा को उत्तराखंड की आस्था, लोकसंस्कृति और सामुदायिक सहभागिता की अनूठी मिसाल बताया।

मुख्यमंत्री की कई बड़ी घोषणाएं

इस मौके पर मुख्यमंत्री धामी ने क्षेत्र के विकास से जुड़ी कई महत्वपूर्ण घोषणाएं भी कीं। उन्होंने ऐलान किया कि देवीधुरा को अब नगर पंचायत क्षेत्र बनाया जाएगा, जिससे इस क्षेत्र का सुनियोजित विकास हो सकेगा। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि यहां करीब 9.80 करोड़ रुपये की लागत से एक मल्टी लेवल पार्किंग का निर्माण भी कराया जाएगा, ताकि हर साल आने वाले हजारों श्रद्धालुओं को पार्किंग की समस्या से राहत मिल सके।

Maa Varahi Dham

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि बग्वाल मेले को राजकीय मेला घोषित किए जाने के बाद से इस आयोजन की गरिमा और भी बढ़ गई है। उन्होंने बताया कि सरकार की ओर से यहां की व्यवस्थाओं को लगातार सुदृढ़ किया जा रहा है, ताकि श्रद्धालुओं को किसी तरह की असुविधा का सामना न करना पड़े और यह ऐतिहासिक परंपरा आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रूप से चलती रहे।

आस्था, परंपरा और भाईचारे की मिसाल

फल-फूल और पत्थरों के बीच खेली जाने वाली यह बग्वाल दरअसल सिर्फ एक पारंपरिक युद्ध भर नहीं है, बल्कि यह मां वाराही के प्रति सदियों पुरानी अटूट आस्था, परंपरा और भाईचारे की एक जीवंत मिसाल है। इस आयोजन की गूंज केवल देवीधुरा या उत्तराखंड तक सीमित नहीं रहती, बल्कि देश-विदेश तक पहुंचती है और हर साल इसे देखने के लिए श्रद्धालुओं की संख्या में इजाफा होता जा रहा है।

स्थानीय लोगों का मानना है कि यह परंपरा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह समाज में एकता, सहयोग और भाईचारे का भी संदेश देती है। मुख्यमंत्री द्वारा की गई घोषणाओं से स्थानीय लोगों में खुशी की लहर है, और उन्हें उम्मीद है कि आने वाले समय में देवीधुरा एक महत्वपूर्ण धार्मिक और पर्यटन स्थल के रूप में और अधिक विकसित होगा।

 

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