
भोपाल। मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले में इन दिनों एक खतरनाक बैक्टीरियल संक्रमण ने जनता और प्रशासन दोनों की नींद उड़ा रखी है। शुरुआत में मामूली सी दिखने वाली चोट, कट या खरोंच धीरे-धीरे इतना भयावह रूप ले रही है कि, मरीजों की त्वचा तक गलने लग रही है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार अब तक जिले में इस संक्रमण की चपेट में 40 से ज्यादा लोग आ चुके हैं। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि, एक मरीज का पैर बचाने के लिए डॉक्टरों को उसका पंजा तक काटना पड़ा।
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कैसे शुरू हुआ मामला
राजगढ़ जिला अस्पताल के हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. अभिषेक सिलोदिया बताते हैं कि, ब्यावरा निवासी मनोज पालीवाल के पैर में एक छोटी सी गिट्टी चुभ गई थी। शुरुआत में उन्होंने इसे मामूली चोट समझकर नजरअंदाज कर दिया गया, लेकिन कुछ ही दिनों में उनके पैर में सूजन बढ़ने लगी और घाव से मवाद के साथ-साथ खून रिसने लगा।

परिजन जब तक उन्हें जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, तब तक स्थिति काफी बिगड़ चुकी थी। पैर का रंग पहले लाल, फिर नीला और अंततः काला पड़ चुका था। संक्रमण इतनी तेजी से फैला कि मरीज की जान बचाने के लिए उसके पंजे को काटना पड़ा।यह अकेला मामला नहीं है। मोरपीपली की निवासी इंदू सिंह, शेलापानी के देवकरण और डूंगर सिंह सहित कई अन्य ग्रामीण भी इसी तरह की छोटी-मोटी चोट या गिरने की घटना के बाद इस संक्रमण की चपेट में आकर अस्पताल पहुंचे हैं। इन सभी मामलों में शुरुआती लापरवाही ही बाद में गंभीर संकट का कारण बनी।
क्या है बीमारी
डॉक्टरों के मुताबिक इस संक्रमण की वजह ‘सेल्यूलाइटिस’ नाम का बैक्टीरिया है। यह एक ऐसा जीवाणु है जो त्वचा के नीचे मौजूद कोमल ऊतकों (टिशू) में बेहद तेजी से फैलता है। आमतौर पर यह बैक्टीरिया शरीर में किसी मामूली चोट, कट, खरोंच या त्वचा में पड़ी दरार के रास्ते प्रवेश करता है और फिर धीरे-धीरे संक्रमण का दायरा बढ़ाता चला जाता है। शुरुआती दौर में यह संक्रमण साधारण सूजन जैसा प्रतीत होता है, यही वजह है कि ज्यादातर लोग इसे गंभीरता से नहीं लेते और समय पर इलाज नहीं कराते, जिसका खामियाजा बाद में भारी पड़ता है।
पहचानें ये लक्षण
चिकित्सकों ने इस संक्रमण के प्रमुख लक्षणों के प्रति लोगों को सचेत रहने की सलाह दी है। सबसे पहला संकेत त्वचा का लाल पड़ना और उस स्थान पर असामान्य गर्मी महसूस होना है। इसके साथ ही संक्रमित हिस्से में तेज दर्द और खिंचाव जैसा अनुभव भी होता है। समय के साथ सूजन लगातार बढ़ती जाती है और कई मामलों में मरीज को बुखार के साथ कंपकंपी भी छूटने लगती है।
डॉक्टरों ने कहा जिन लोगों को पहले से डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर या शरीर में सामान्य कमजोरी की शिकायत रहती है, उनमें यह संक्रमण कहीं अधिक तेज गति से और घातक रूप में फैलता है। ऐसे मरीजों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की जरूरत है, क्योंकि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता पहले से कमजोर होने के कारण संक्रमण को नियंत्रित करना मुश्किल हो जाता है।
लोगों में दहशत
जिले भर में इस संक्रमण के लगातार बढ़ते मामलों ने स्थानीय निवासियों के बीच भय और चिंता का माहौल बना दिया है। गांव-गांव में लोग अब मामूली चोट लगने पर भी सतर्क हो गए हैं और अस्पतालों का रुख कर रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि, इस बीमारी के प्रति जागरूकता की कमी ही अब तक की सबसे बड़ी चुनौती रही है, क्योंकि ग्रामीण इलाकों में अक्सर लोग छोटी चोटों को घरेलू उपचार से ठीक करने की कोशिश करते हैं और डॉक्टर के पास तभी पहुंचते हैं जब हालत बिगड़ चुकी होती है।
डॉक्टरों की अपील
स्वास्थ्य विभाग और चिकित्सकों की टीम ने संयुक्त रूप से जिलेवासियों से अपील की है कि, वे किसी भी प्रकार की चोट, कट या खरोंच को हल्के में न लें। डॉक्टरों ने स्पष्ट कहा है कि यदि शरीर के किसी भी हिस्से में लगातार लालपन, असामान्य सूजन या असहनीय दर्द जैसे लक्षण नजर आएं, तो बिना देरी किए नजदीकी डॉक्टर या जिला अस्पताल से संपर्क करना चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार यदि संक्रमण की शुरुआती अवस्था में ही सही इलाज मिल जाए, तो इसे फैलने से पूरी तरह रोका जा सकता है। लेकिन लापरवाही या देरी की स्थिति में यह संक्रमण जानलेवा साबित हो सकता है, जैसा कि जिले में सामने आए कई मामलों में देखा जा चुका है।
मुख्य बातें
राजगढ़ जिले में सेल्यूलाइटिस बैक्टीरिया के संक्रमण से लोगों की त्वचा गलने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं, जिनकी संख्या अब तक 40 से अधिक पहुंच चुकी है। मामूली कट या चोट से शुरू होने वाला यह संक्रमण गंभीर होने पर अंग-विच्छेदन तक की नौबत ला सकता है, जैसा एक मरीज के मामले में हुआ जहां डॉक्टरों को उसका पैर का पंजा काटना पड़ा। डायबिटीज और ब्लड प्रेशर के मरीजों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है। विशेषज्ञों का स्पष्ट संदेश है कि शरीर में सूजन, लालपन या तेज दर्द जैसे लक्षण दिखते ही तुरंत चिकित्सीय सलाह लेनी चाहिए, ताकि समय रहते इस गंभीर संक्रमण को नियंत्रित किया जा सके।
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