
राजधानी दिल्ली और एनसीआर में इन दिनों H1N1 यानी स्वाइन फ्लू के मामलों में तेजी से इजाफा हो रहा है, जिसने स्वास्थ्य विभाग से लेकर आम लोगों तक की चिंता बढ़ा दी है। आंकड़ों पर नजर डालें, तो इस साल अब तक दिल्ली में इन्फ्लूएंजा-A के कुल 2,392 मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें से अकेले 1,777 मामले H1N1 यानी स्वाइन फ्लू के हैं। यह आंकड़ा साफ बताता है कि, शहर में यह वायरस कितनी तेजी से फैल रहा है।
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परिवार के अन्य सदस्य कैसें बचें
बढ़ते मामलों के बीच सबसे बड़ी चुनौती यह है कि अगर घर के किसी एक सदस्य को H1N1 हो जाए, तो परिवार के अन्य सदस्यों तक इसे फैलने से कैसे रोका जाए। हालांकि डॉक्टरों का कहना है कि घबराने की जरूरत नहीं है।

स्वाइन फ्लू कोई नया या अनजाना वायरस नहीं है। यह पहले भी कई बार देश में फैल चुका है। कुछ बुनियादी सावधानियां अपनाकर इसे परिवार के अन्य सदस्यों तक पहुंचने से आसानी से रोका जा सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इस बारे में कुछ अहम सुझाव दिए हैं, जिनका पालन कर घर के बाकी लोग खुद को सुरक्षित रख सकते हैं।
मरीज को करें आइसोलेट
डॉक्टरों के मुताबिक, सबसे पहला और सबसे जरूरी कदम यह है कि जिस भी व्यक्ति में H1N1 के लक्षण नजर आएं, उसे तुरंत बाकी परिवार से अलग कर दिया जाए। मरीज को एक अलग कमरे में रखना चाहिए और जितना संभव हो सके उसके करीब जाने से बचना चाहिए। इसकी वजह यह है कि, यह वायरस मुख्य रूप से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के बीच सीधे संपर्क या हवा के जरिए ही फैलता है, इसलिए दूरी बनाए रखना संक्रमण की रफ्तार को काफी हद तक धीमा कर सकता है।
हाथों की सफाई करें
विशेषज्ञों का कहना है कि, इस वायरस को फैलने से रोकने का सबसे सरल मगर सबसे असरदार तरीका है बार-बार हाथ धोना। घर के हर सदस्य को चाहिए कि, वे नियमित रूप से साबुन-पानी से हाथ धोएं या सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें, खासकर तब जब वे मरीज की देखभाल कर चुके हों या उसके आसपास गए हों। हाथों की सफाई न सिर्फ H1N1 बल्कि अन्य कई तरह के संक्रमणों से बचाव में भी मददगार साबित होती है।
मास्क पहनना न भूलें
डॉक्टरों की सलाह है कि मरीज और उसकी देखभाल करने वाले, दोनों को ही मास्क जरूर पहनना चाहिए। दिलच,स्प बात यह है कि विशेषज्ञ इस मामले में कोविड-19 महामारी के दौरान अपनाई गई सावधानियों को दोहराने की सलाह दे रहे हैं। जैसे भीड़भाड़ वाली जगहों से दूरी बनाना, मास्क का नियमित इस्तेमाल करना, बार-बार हाथ धोते व सैनिटाइज करते रहना। यानी कोरोना के दौर में जो आदतें लोगों ने अपनाई थीं, वही आदतें अब स्वाइन फ्लू से बचाव में भी काम आ सकती हैं।
खांसते-छींकते वक्त रखें विशेष सावधानी
डॉक्टरों के अनुसार मरीज को खांसते या छींकते समय हमेशा रुमाल या टिशू पेपर से अपना नाक और मुंह ढकना चाहिए। इस्तेमाल किए गए टिशू को इधर-उधर न फेंककर तुरंत किसी बंद डस्टबिन में डाल देना चाहिए। ऐसा न करने पर वायरस हवा या सतहों के जरिए तेजी से फैल सकता है, इसलिए यह छोटी सी आदत संक्रमण को रोकने में बड़ी भूमिका निभा सकती है।
मरीज का निजी सामान रखें अलग
घर में मरीज के तौलिए, बर्तन, कपड़े और अन्य निजी इस्तेमाल की चीजों को बाकी परिवार के सामान से पूरी तरह अलग रखना चाहिए। डॉक्टरों की चेतावनी है कि, अगर इन चीजों को परिवार के अन्य सदस्यों के साथ साझा किया जाता है, तो वायरस बेहद आसानी से दूसरे लोगों तक पहुंच सकता है, इसलिए मरीज के लिए अलग तौलिया, अलग बर्तन और अलग कपड़े इस्तेमाल में लाना बेहद जरूरी माना जा रहा है।
हवादार और साफ-सुथरा रखें घर
विशेषज्ञों का सुझाव है कि, घर के कमरों में हवा का सही वेंटिलेशन बना रहना चाहिए। खासतौर पर जिस कमरे में मरीज रह रहा हो, वहां नियमित रूप से सफाई की जानी चाहिए।

इसके अलावा घर के उन हिस्सों को भी बार-बार साफ करते रहना चाहिए, जिन्हें लोग बार-बार छूते हैं। जैसे दरवाजों के हैंडल, स्विच बोर्ड और अन्य स्थान। ये वे जगहें हैं, जहां वायरस सबसे ज्यादा समय तक टिका रह सकता है।
बुजुर्गों, बच्चों और गर्भवती महिलाओं का रखें खास ख्याल
डॉक्टरों ने विशेष रूप से आगाह किया है कि, बुजुर्ग, छोटे बच्चे, गर्भवती महिलाएं और वे लोग जो पहले से किसी बीमारी से जूझ रहे हैं, उनमें फ्लू के गंभीर रूप लेने का खतरा कहीं ज्यादा रहता है। ऐसे कमजोर इम्यूनिटी वाले सदस्यों को मरीज से यथासंभव दूर रखना चाहिए और उनकी सेहत पर लगातार बारीकी से नजर रखनी चाहिए, ताकि किसी भी असामान्य लक्षण को समय रहते पहचाना जा सके।
लक्षण दिखते ही न करें देरी
डॉक्टरों की सबसे अहम सलाह यही है कि, अगर परिवार के किसी अन्य सदस्य को भी बुखार, खांसी, गले में खराश या बदन दर्द जैसे लक्षण महसूस हों, तो बिना किसी देरी के डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। खासतौर पर अगर किसी को सीने में दर्द या सांस लेने में तकलीफ जैसी शिकायत हो, तो उसे हल्के में लेने की गलती बिल्कुल नहीं करनी चाहिए, क्योंकि ऐसे लक्षण गंभीर स्थिति का संकेत हो सकते हैं और समय पर इलाज मिलना बेहद जरूरी है।
सतर्कता ही है सबसे बड़ा बचाव
दिल्ली-एनसीआर में लगातार बढ़ते H1N1 के मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञ लोगों से अपील कर रहे हैं कि, वे घबराने के बजाय सतर्क रहें और ऊपर बताई गई सावधानियों को गंभीरता से अपनाएं। डॉक्टरों का मानना है कि, अगर परिवार के सभी सदस्य समय रहते जरूरी एहतियात बरतें, तो एक मरीज से पूरे घर में संक्रमण फैलने के खतरे को काफी हद तक टाला जा सकता है। साथ ही, किसी भी तरह के लक्षण नजर आने पर लापरवाही न बरतते हुए तुरंत डॉक्टरी सलाह लेना ही सबसे सुरक्षित रास्ता है।
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नोट: यह जानकारी सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या के लिए कृपया योग्य चिकित्सक से सलाह जरूर लें।



