
त्योहारी सीजन शुरू हो चुका है और इसी के साथ आम आदमी की रसोई का बजट एक बार फिर बिगड़ता नजर आ रहा है। चीनी की बढ़ती कीमतों से परेशान लोगों को अब प्याज भी रुलाने लगी है। हाल के दिनों में देश के कई हिस्सों में प्याज की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। अब इसकी औसत खुदरा कीमत 40.72 रुपये प्रति किलो तक पहुंच चुकी है। वहीं, दिल्ली-एनसीआर, मुंबई और कोलकाता जैसे बड़े महानगरों में प्याज 50 से 60 रुपये प्रति किलो के रेट पर बिक रहा है।
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सिर्फ दो दिन में दोगुनी हुई कीमतें
एक रिपोर्ट के मुताबिक, ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में प्याज की कीमतों में सबसे तेज उछाल देखने को मिला है, जहां भाव 25-30 रुपये प्रति किलो से बढ़कर सीधे 55-60 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए हैं।

स्थानीय खुदरा विक्रेताओं का कहना है कि, यह बढ़ोतरी इतनी तेज रही कि महज दो दिनों के भीतर ही कीमतें लगभग दोगुनी हो गईं। प्याज की कीमतों में आई इस अचानक और तीखी बढ़ोतरी ने आम आदमी की रसोई का पूरा बजट बिगाड़ दिया है, क्योंकि प्याज भारतीय भोजन का एक अनिवार्य हिस्सा माना जाता है और इसके बिना ज्यादातर घरों में रोजमर्रा का खाना बनाना मुश्किल हो जाता है।
एक महीने में कितने बढ़े दाम
एशिया की सबसे बड़ी प्याज मंडी मानी जाने वाली महाराष्ट्र के लासलगांव में केवल एक सप्ताह के भीतर थोक कीमतों में 30 से 42 प्रतिशत तक का बड़ा उछाल दर्ज किया गया है। शुक्रवार, 21 अगस्त को प्याज की औसत खुदरा कीमत बढ़कर 40.79 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई, जबकि ठीक एक महीने पहले यानी 21 जुलाई को यह कीमत 34.87 रुपये प्रति किलोग्राम थी। इसका सीधा मतलब यह है कि, पिछले सिर्फ एक महीने में ही प्याज की कीमतों में करीब 17 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
अगर बात सालाना कीमतों पर नजर डाली जाये तो यह बढ़ोतरी और भी ज्यादा चौंकाने वाली है। पिछले साल यानी 21 अगस्त 2025 को प्याज की औसत खुदरा कीमत महज 28.72 रुपये प्रति किलोग्राम थी। इस लिहाज से देखा जाए, तो बीते एक साल के भीतर प्याज की कीमतों में 42 प्रतिशत से भी अधिक की जबरदस्त बढ़ोतरी हो चुकी है, जो आम उपभोक्ताओं की जेब पर सीधा और भारी असर डाल रही है।
प्रमुख शहरों में आज प्याज के खुदरा रेट
देश के अलग-अलग महानगरों में प्याज की मौजूदा कीमतों पर नजर डालें, तो दिल्ली-एनसीआर में प्याज फिलहाल 50 से 55 रुपये प्रति किलो के भाव पर बिक रहा है। वहीं मुंबई में यह दर 52 से 58 रुपये प्रति किलो के बीच है। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में सबसे ज्यादा भाव देखने को मिल रहे हैं, जहां प्याज 55 से 60 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है।
दक्षिण भारत के प्रमुख महानगर चेन्नई में प्याज की कीमत 48 से 54 रुपये प्रति किलो के बीच है, जबकि बेंगलुरु में यह थोड़ा कम यानी 45 से 52 रुपये प्रति किलो के दायरे में है। बिहार की राजधानी पटना में भी प्याज के दाम 48 से 55 रुपये प्रति किलो के बीच बने हुए हैं। इन आंकड़ों से साफ है कि, देश के लगभग सभी बड़े शहरों में प्याज की कीमतों ने आम उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है।
थोक मंडियों में भी दिख रहा तेजी का असर
खुदरा बाजार के साथ-साथ थोक मंडियों में भी प्याज की कीमतों में तेज उछाल साफ नजर आ रहा है। महाराष्ट्र की लासलगांव मंडी में प्याज का थोक भाव बढ़कर 3195 से 3600 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच चुका है, जो प्रति किलो के हिसाब से लगभग 32 से 36 रुपये के आसपास बैठता है।

वहीं राजधानी दिल्ली की आजादपुर मंडी में भी अच्छी क्वालिटी के प्याज का थोक भाव 45 से 50 रुपये प्रति किलो के स्तर से ऊपर चल रहा है। थोक मंडियों में बढ़ते भाव का सीधा असर आगे चलकर खुदरा बाजार पर भी पड़ता है, जिससे आम उपभोक्ताओं तक महंगाई का यह बोझ और तेजी से पहुंच रहा है।
आखिर क्यों बढ़ रहीं कीमतें
विशेषज्ञों के मुताबिक प्याज की कीमतों में इस तेज उछाल के पीछे मुख्य वजह देश में देर से शुरू हुई बुआई है, जिसके चलते खरीफ सीजन की नई प्याज फसल की आवक भी देरी से हो रही है। बाजार में नई फसल की सप्लाई कम होने से पहले से मौजूद स्टॉक पर दबाव बढ़ गया है। इसके साथ ही ठीक इसी दौरान त्योहारी सीजन शुरू होने की वजह से प्याज की मांग में भी तेजी से इजाफा हुआ है। इस तरह मांग और आपूर्ति के बीच का अंतर लगातार गहराता जा रहा है, जिसका सीधा असर बाजार में कीमतों पर पड़ रहा है और यही असंतुलन प्याज को महंगा बना रहा है।
बफर स्टॉक से राहत की उम्मीद
आम जनता को इस बढ़ती महंगाई से राहत दिलाने के लिए सरकार की ओर से भी सक्रिय कदम उठाए जाने की तैयारी है। बताया जा रहा है कि, सरकार सितंबर महीने से अपने सुरक्षित बफर स्टॉक से प्याज को बाजार और मंडियों में उतारने की योजना बना रही है। सरकार का मानना है कि बफर स्टॉक से प्याज की आपूर्ति बढ़ाए जाने से बाजार में मांग और आपूर्ति के बीच बना असंतुलन कम होगा, जिससे कीमतों में कुछ हद तक स्थिरता आने की उम्मीद है।
हालांकि जब तक यह राहत आम उपभोक्ताओं तक व्यावहारिक रूप से नहीं पहुंचती, तब तक त्योहारी सीजन के दौरान लोगों को महंगे प्याज के साथ ही अपना काम चलाना पड़ सकता है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार की यह पहल कीमतों पर कितना असरदार साबित होती है और आम आदमी को कब तक राहत मिल पाती है।
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