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युवाओं को जॉब सीकर नहीं, क्रिएटर बनाना है लक्ष्य: CM विष्णु देव

रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने नई दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय वर्ल्ड लीडर्स फोरम में शिरकत करते हुए राज्य की तेजी से बदलती आर्थिक तस्वीर, निवेश की व्यापक संभावनाओं और आगामी वर्षों के लिए विकास का पूरा रोडमैप वैश्विक मंच पर प्रस्तुत किया। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि, छत्तीसगढ़ अब अपनी परंपरागत औद्योगिक और खनिज आधारित पहचान से आगे बढ़कर युवा शक्ति, नवाचार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्टार्टअप, ग्रीन एनर्जी और आधुनिक विनिर्माण पर आधारित एक बिल्कुल नई अर्थव्यवस्था की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है।

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युवाओं को जॉब क्रिएटर बनाने पर जोर

सीएम साय ने कहा कि, राज्य सरकार का लक्ष्य केवल बड़े निवेश आकर्षित करना भर नहीं है, बल्कि इस निवेश को रोजगार, उद्यमिता, बेहतर आय और युवाओं के उज्ज्वल भविष्य से सीधे जोड़ना है। उन्होंने कहा कि, सरकार चाहती है कि, छत्तीसगढ़ के युवा केवल रोजगार तलाशने वाले ‘जॉब सीकर’ न रहें, बल्कि अपने नवाचार और उद्यमिता के दम पर दूसरों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा करने वाले ‘जॉब क्रिएटर’ बनें। इसी सोच के साथ राज्य की तमाम नीतियों और योजनाओं को नए सिरे से आकार दिया जा रहा है।

CM Vishnu Dev

बता दें कि, इस फोरम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, विदेश मंत्री एस जयशंकर, भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर और ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन सहित भारत और विश्व की कई प्रमुख हस्तियां शामिल हुईं।

6.31 लाख करोड़ रुपये तक पहुंची अर्थव्यवस्था

छत्तीसगढ़ की आर्थिक प्रगति का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2025-26 में राज्य की अर्थव्यवस्था का आकार लगभग 6.31 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है और इस दौरान आर्थिक वृद्धि दर 11.57 प्रतिशत दर्ज की गई है। उन्होंने बताया कि प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय भी बढ़कर 1 लाख 79 हजार 244 रुपये हो गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के आर्थिक विकास का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचे, इसके लिए विकास और जनकल्याण दोनों को बराबर प्राथमिकता दी जा रही है।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2026-27 के 1.72 लाख करोड़ रुपये के बजट में अधोसंरचना निर्माण, पूंजीगत व्यय और सामाजिक कल्याण पर विशेष जोर दिया गया है, ताकि सड़क, रेल, ऊर्जा, डिजिटल कनेक्टिविटी और औद्योगिक अधोसंरचना को मजबूत करते हुए छत्तीसगढ़ को देश के प्रमुख निवेश गंतव्यों में शामिल किया जा सके।

8 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव

मुख्यमंत्री ने कहा कि निवेश के लिए अनुकूल और पारदर्शी माहौल तैयार करना सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल है। नई औद्योगिक विकास नीति 2024-30, वन क्लिक सिंगल विंडो सिस्टम 2.0 और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस से जुड़े सुधारों के जरिए निवेश की पूरी प्रक्रिया को सरल और समयबद्ध बनाया गया है।

उन्होंने बताया कि पिछले दो वर्षों में 450 से अधिक प्रशासनिक प्रक्रियाओं का सरलीकरण किया जा चुका है, जिसके सकारात्मक नतीजे अब सामने आ रहे हैं। नई औद्योगिक नीति लागू होने के बाद प्रदेश को 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं। मुख्यमंत्री के मुताबिक, अब छत्तीसगढ़ में पारंपरिक स्टील, सीमेंट और खनिज आधारित उद्योगों के साथ-साथ सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा सेंटर, फार्मास्यूटिकल, टेक्सटाइल, लॉजिस्टिक्स, ग्रीन एनर्जी और फूड प्रोसेसिंग जैसे भविष्य के क्षेत्रों में भी निवेश की नई संभावनाएं बन रही हैं।

2030 तक 5 हजार स्टार्टअप का लक्ष्य

मुख्यमंत्री ने कहा कि, छत्तीसगढ़ की नई अर्थव्यवस्था के केंद्र में राज्य के युवा हैं। सरकार का साफ इरादा है कि, प्रदेश के युवा नौकरी की प्रतीक्षा करने के बजाय खुद रोजगार पैदा करने वाले उद्यमी बनें। इसी उद्देश्य के तहत राज्य में वर्ष 2030 तक 5 हजार स्टार्टअप विकसित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

उन्होंने बताया कि, नए उद्यमियों को अपने नवाचारी विचारों को व्यवसाय में बदलने के लिए सरकार की ओर से 10 लाख रुपये तक की सीड फंड सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने कहा कि स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करने के साथ-साथ युवाओं को तकनीक, नवाचार, कौशल विकास और बाजार से जोड़ने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिससे न सिर्फ नए व्यवसाय खड़े होंगे बल्कि स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर रोजगार भी पैदा होगा।

स्टूडेंट्स को मिलेगा एआई प्रशिक्षण 

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को छत्तीसगढ़ के भविष्य के विकास का महत्वपूर्ण माध्यम बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में 6 लाख विद्यार्थियों और 1.5 लाख शासकीय कर्मचारियों को एआई प्रशिक्षण देने की योजना बनाई गई है। इसके अलावा नागरिकों को बेहतर और तेज सेवाएं देने के लिए 50 से अधिक एआई आधारित सरकारी सेवाएं भी विकसित की जाएंगी।

CM Vishnu Dev

उन्होंने स्पष्ट किया कि, एआई का मकसद सिर्फ तकनीकी बदलाव लाना नहीं है, बल्कि इसका असली उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाना, युवाओं के लिए भविष्य के रोजगार और उद्यमिता के अवसर तैयार करना तथा सरकारी सेवाओं को अधिक प्रभावी और नागरिक-केंद्रित बनाना है।

मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि राज्य में 500 करोड़ रुपये के एआई मिशन पर काम चल रहा है, जिसके तहत 100 एआई डेटा लैब और 5 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए जाएंगे और 300 से अधिक एआई स्टार्टअप को सहयोग दिया जाएगा। नवा रायपुर में करीब 1,000 करोड़ रुपये की लागत से एक एआई डेटा सेंटर पार्क भी विकसित किया जा रहा है।

 बस्तर बनेगा विकास का नया अध्याय 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि, बदलता हुआ बस्तर छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण अध्याय बनकर उभर रहा है। सुरक्षा की स्थिति में हुए बड़े सुधार के बाद अब बस्तर में विकास, निवेश, रोजगार और उद्यमिता के लिए नए अवसर पैदा हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि बस्तर सहित प्रदेश के करीब 10 लाख परिवारों की आय बढ़ाने के लिए 4,824 करोड़ रुपये की आजीविका उन्नयन योजना तैयार की जा रही है।

बस्तर क्षेत्र में 421 बंद पड़े स्कूलों को दोबारा शुरू किया जा चुका है। वहीं स्वास्थ्य सेवाओं को तकनीक से जोड़ते हुए 34 लाख से अधिक लोगों की डिजिटल हेल्थ प्रोफाइल भी तैयार की गई है। मुख्यमंत्री ने बताया कि, 3,513 करोड़ रुपये की जगदलपुर-रावघाट रेल परियोजना बस्तर के आर्थिक विकास में मील का पत्थर साबित होगी, जिससे स्थानीय उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुंचाना आसान होगा।

पर्यटन पर भी फोकस

मुख्यमंत्री ने कहा कि, छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक सुंदरता, जनजातीय संस्कृति और ऐतिहासिक विरासत में पर्यटन की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। चित्रकोट, तीरथगढ़, कांगेर घाटी और सिरपुर जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों को बस्तर की समृद्ध जनजातीय संस्कृति के साथ जोड़कर विश्वस्तरीय पर्यटन मानचित्र पर लाने की दिशा में काम किया जा रहा है।

पर्यटन को उद्योग का दर्जा दिए जाने से होटल, हॉस्पिटैलिटी, परिवहन और स्थानीय हस्तशिल्प जैसे क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। इसके साथ ही राज्य में लघु वनोपज, औषधीय पौधों, मिलेट और कृषि उत्पादों की स्थानीय प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि छत्तीसगढ़ केवल कच्चे माल का उत्पादक न रहकर तैयार उत्पादों का केंद्र बने।

ग्रीन एनर्जी पर जोर

मुख्यमंत्री ने बताया कि छत्तीसगढ़ ऊर्जा उत्पादन में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है और अब वह तेजी से ग्रीन एनर्जी की दिशा में बढ़ रहा है। आने वाले वर्षों में राज्य में करीब 4 हजार मेगावाट अतिरिक्त सौर ऊर्जा क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है, वहीं प्रदेश के 90 हजार से अधिक घर पहले ही सौर ऊर्जा से जुड़ चुके हैं। भिलाई में राज्य का पहला फ्लोटिंग सोलर प्लांट भी स्थापित किया गया है।

इसके अलावा नवा रायपुर और राजनांदगांव में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी अधोसंरचना विकसित की जा रही है, जबकि राजनांदगांव में प्रस्तावित स्पेस मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर, 142 एकड़ का फार्मा पार्क और टेक्सटाइल पार्क भविष्य के औद्योगिक विकास को नई गति देंगे।

ऊर्जा भंडारण में नई संभावनाएं

कोरबा में लिथियम की खोज से बैटरी निर्माण और ऊर्जा भंडारण के क्षेत्र में भी नई संभावनाएं खुली हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम-2026 लागू होने से आठ विभागों की 43 सेवाओं को शामिल करते हुए प्रदेश के करीब 15 लाख एमएसएमई को इसका सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।

मुख्यमंत्री साय ने वैश्विक निवेशकों के सामने छत्तीसगढ़ को ऐसे राज्य के रूप में पेश किया, जहां प्राकृतिक संसाधन, पर्याप्त ऊर्जा, भूमि, कुशल युवा मानव संसाधन, बेहतर होती कनेक्टिविटी और निवेश-अनुकूल नीतियां एक साथ उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि राज्य की विकास यात्रा का अगला चरण संसाधन आधारित अर्थव्यवस्था से आगे बढ़कर ज्ञान, तकनीक, नवाचार और उद्यमिता आधारित अर्थव्यवस्था के निर्माण का है, जिसका अंतिम उद्देश्य प्रदेश के युवाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना है।

 

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