
रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में साइबर ठगों के हौसले इतने बुलंद हो गये हैं कि, अब वे सत्ताधारी दल के विधायकों तक पहुंच गए हैं। ऐसा ही कुछ मामला रायपुर से आया है, यहां भाजपा विधायक पुरंदर मिश्रा साइबर धोखाधड़ी का शिकार हो गये हैं। यहां एक ठग ने खुद को बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्षनितिन नवीन का पर्सनल असिस्टेंट बताकर विधायक से 10,000 रुपये ठग लिए। जैसे ही इस घटना की खबर पुलिस को मिली, तेजी से कार्रवाई हुई और आरोपी सहदेव मलिक को ओडिशा के पूरी से दबोच लिया गया।
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अंजान नबंर से आई कॉल
जानकारी के मुताबिक, रविवार रात करीब 8:24 बजे विधायक पुरंदर मिश्रा के मोबाइल पर एक अनजान नंबर से कॉल आई। ट्रूकॉलर ऐप पर उस नंबर के सामने नितिन नवीन के पीए का नाम दिख रहा था। फोन करने वाले व्यक्ति ने बेहद घबराए हुए स्वर में कहा कि, उनकी गाड़ी का पेट्रोल खत्म हो गया है और वे परिवार के साथ जंगल के इलाके में फंस गए हैं। मदद की गुहार लगाते हुए उसने विधायक से कुछ पैसे मांगे। विधायक ने सहायता की भावना से तुरंत यूपीआई के जरिए 10,000 रुपये ट्रांसफर कर दिए।

रकम ट्रांसफर होते ही आरोपी का लालच बढ़ गया। कुछ ही देर बाद उसने फिर फोन किया और और अधिक पैसे की मांग करने लगा। बार-बार आने वाली कॉल्स और लगातार पैसे मांगने से विधायक पुरंदर मिश्रा को शक हो गया। उन्होंने अपने करीबी सहयोगियों और नितिन नवीन के कार्यालय से संपर्क किया तो उन्हें पता चला कि, वे साइबर ठगी का शिकार हो चुके हैं। विधायक ने तुरंत रायपुर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने कॉल डेटा रिकॉर्ड, यूपीआई ट्रांजेक्शन डिटेल और अन्य तकनीकी सबूतों के आधार पर जांच शुरू की। जांच में आरोपी सहदेव मलिक ओडिशा के पुरी में छिपा हुआ पाया गया।
ट्रूकॉलर ऐप का दुरूपयोग
रायपुर पुलिस की टीम ने ओडिशा पुलिस के सहयोग से मलिक को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी सहदेव मलिक इंटरनेट से सार्वजनिक रूप से उपलब्ध फोन नंबर्स इकट्ठा करता था। वह खासकर राजनीतिक नेताओं, व्यापारियों और आम लोगों को निशाना बनाता था। ट्रूकॉलर जैसे ऐप का दुरुपयोग करके वह खुद को किसी बड़े नेता का सहायक या रिश्तेदार बताकर लोगों का भरोसा जीतता था। इस बार उसने जंगल में फंसने की कहानी बनाकर विधायक को फंसाया।
पुलिस के अनुसार आरोपी इस तरीके से पहले भी कई लोगों को ठग चुका था। वह अक्सर गाड़ी खराब होने, एक्सीडेंट होने या अस्पताल में भर्ती होने जैसी भावुक कहानियां गढ़कर लोगों से पैसे ऐंठता था। इस मामले में भी उसने ठीक यही तरीका अपनाया। यह घटना छत्तीसगढ़ में साइबर अपराध की बढ़ती प्रवृत्ति को साफ दिखाती है। हाल के महीनों में रायपुर समेत पूरे प्रदेश में ऐसे कई मामले सामने आए हैं जिनमें लोग छोटी-छोटी राशि से लेकर लाखों रुपये तक ठगे जा चुके हैं।
विधायक ने की पुलिस की तारीफ़
ठग अब फर्जी आईडी, ट्रूकॉलर और व्हाट्सएप का इस्तेमाल कर लोगों का विश्वास जीतने में काफी माहिर हो गए हैं। राजनीतिक व्यक्तियों को निशाना बनाना इसलिए आसान होता है क्योंकि वे आमतौर पर मदद करने वाले स्वभाव के होते हैं और जल्दी फैसला ले लेते हैं। इस मामले में भी ठग ने इसी कमजोरी का फायदा उठाया। हालांकि विधायक पुरंदर मिश्रा की सतर्कता और पुलिस की तेज कार्रवाई से आरोपी जल्द ही पकड़ा जा सका। विधायक पुरंदर मिश्रा ने इस घटना पर निराशा जताते हुए कहा कि अगर एक विधायक भी ऐसे ठगों का शिकार हो सकता है तो आम आदमी की स्थिति और भी खराब है।
उन्होंने पुलिस की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे अपराधियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। रायपुर पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि किसी भी अनजान नंबर से आने वाली घबराहट भरी या इमरजेंसी वाली कॉल पर तुरंत पैसे ट्रांसफर न करें। पहले दोबारा वेरिफिकेशन जरूर करें और संबंधित व्यक्ति से सीधे संपर्क करें। पुलिस ने साइबर अपराध की किसी भी शिकायत के लिए 1930 हेल्पलाइन नंबर या साइबर सेल में तुरंत संपर्क करने की सलाह दी है।
आरोपी से पूछ्ताछ कर रही पुलिस
आजकल फर्जी नाम दिखाना, कॉल स्पूफिंग करना और भावनात्मक ब्लैकमेल करना बहुत आसान हो गया है, इसलिए हर व्यक्ति को छोटी-छोटी सावधानियां बरतनी चाहिए। पुलिस अब आरोपी सहदेव मलिक से विस्तृत पूछताछ कर रही है ताकि उसके अन्य साथियों और बड़े साइबर ठगी नेटवर्क का पता लगाया जा सके।
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