
भारत और श्रीलंका के बीच खेली जा रही टेस्ट सीरीज का पहला मुकाबला गॉल के मैदान गॉल के मैदान पर हुआ। इस मैदान में स्पिन गेंदबाजों ने अपनी फिरकी से बल्लेबाजों के पसीने छुड़ा दिए। दोनों टीमों स्पिनरों ने कुल 26 विकेट चटकाए और पूरे मैच का रुख पलट कर रख दिया। अब जब सीरीज का दूसरा टेस्ट मैच कोलंबो में खेला जाना है, तो सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हुई हैं कि क्या यहां की पिच भी गॉल की तरह स्पिन-फ्रेंडली है या फिर बल्लेबाजों को कुछ राहत मिलेगी।
इसे भी पढ़ें- SL vs IND: मानव सुथार का कहर! चारों खाने चित हुई श्रीलंकाई टीम, भारत ने अपने नाम की जीत
23 अगस्त से शुरू होगा दूसरा टेस्ट
भारत और श्रीलंका के बीच सीरीज का दूसरा टेस्ट मैच 23 अगस्त से कोलंबो के एसएससी स्पोर्ट्स क्लब मैदान पर खेला जाएगा। यह मैदान भारतीय टीम के लिए ऐतिहासिक रूप से बेहद शुभ साबित रहा है। साल 2008 से लेकर अब तक टीम इंडिया इस मैदान पर हर मैच जीती है।

भारत का यह शानदार रिकॉर्ड मेजबान श्रीलंकाई टीम के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि, श्रीलंका अपनी घरेलू परिस्थितियों का पूरा फायदा उठाते हुए भारतीय टीम के लिए कोई मुश्किल और चुनौतीपूर्ण पिच तैयार करने की रणनीति अपनाती है या नहीं।
स्पिन-फ्रेंडली पिच पर विचार
एक न्यूज एजेंसी के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि, फिलहाल इस बात पर विचार-विमर्श चल रहा है कि, कोलंबो की पिच को भी गॉल स्टेडियम जैसी तैयार करनी चाहिए या नहीं, जहां स्पिनरों का जबरदस्त दबदबा देखने को मिला था। इससे यह संकेत मिलता है कि, श्रीलंकाई टीम मैनेजमेंट एक बार फिर स्पिन गेंदबाजी के अनुकूल पिच बनाकर भारतीय बल्लेबाजों के लिए मुश्किलें खड़ी करने की योजना बना रहा है।
अधिकारी ने यह भी खुलासा किया कि, श्रीलंकाई टीम इस मुकाबले में कई अनुभवी और सीनियर खिलाड़ियों के बिना उतरने वाली है। टीम से दिनेश चांदीमल, कुसल मेंडिस और पथुम निसांका जैसे अहम खिलाड़ी बाहर रहेंगे। इस बड़े बदलाव के पीछे की वजह बताते हुए अधिकारी ने कहा कि, टीम मैनेजमेंट का उद्देश्य युवा और नए बल्लेबाजों को भी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में खुद को साबित करने और अच्छा प्रदर्शन दिखाने का मौका देना है।
टीम की जरूरत के हिसाब से तैयार होगी पिच
इसी रिपोर्ट में एक और महत्वपूर्ण बात का खुलासा हुआ है, जिसमें बताया गया कि, कोलंबो की पिच पूरी तरह से टीम प्रबंधन की जरूरतों और रणनीति के अनुसार तैयार की जाएगी। इसका मतलब साफ है कि, श्रीलंकाई टीम अपनी सुविधा और मजबूती के मुताबिक ही पिच का स्वरूप तय करेगी, ताकि उसे अपने स्पिन गेंदबाजी आक्रमण का पूरा फायदा मिल सके।
गौरतलब है कि, सीरीज का पहला मुकाबला भारतीय टीम ने बेहद शानदार अंदाज में 165 रनों के बड़े अंतर से अपने नाम किया था, जिसके बाद अब श्रीलंका के लिए स्थिति काफी मुश्किल हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि, अब श्रीलंका के पास इस सीरीज को अधिक से अधिक ड्रॉ कराने का ही विकल्प बचा है, क्योंकि सीरीज जीतने की संभावना लगभग समाप्त हो चुकी है।
कोलंबो में भारत-श्रीलंका का हेड टू हेड रिकॉर्ड
अगर बात करें कोलंबो के मैदान पर भारत और श्रीलंका के बीच खेले गए ऐतिहासिक मुकाबलों की, तो अब तक दोनों टीमों के बीच इस मैदान पर कुल 9 टेस्ट मैच खेले जा चुके हैं। इनमें से भारतीय टीम ने 3 मुकाबलों में जीत हासिल की है, जबकि श्रीलंका को केवल 2 मौकों पर ही जीत नसीब हुई है। बाकी बचे हुए 4 मुकाबले ड्रॉ पर समाप्त हुए थे।

यह आंकड़ा भारतीय टीम के पक्ष में स्पष्ट रूप से झुका हुआ नजर आता है। इसके अलावा एक और दिलचस्प तथ्य यह है कि श्रीलंका ने भारत के खिलाफ टेस्ट क्रिकेट में आखिरी बार जीत साल 2008 में ही दर्ज की थी, यानी पिछले करीब डेढ़ दशक से श्रीलंकाई टीम इस मैदान पर भारत के खिलाफ जीत के लिए तरस रही है।
हालांकि, एक बात जो श्रीलंका के पक्ष में जाती दिख सकती है, वह यह है कि इसी मैदान पर श्रीलंका ने अपने पिछले दोनों टेस्ट मुकाबले बड़े अंतर से जीते थे। यह आंकड़ा दर्शाता है कि हाल के वर्षों में इस मैदान पर श्रीलंकाई टीम का प्रदर्शन बेहतर रहा है, भले ही भारत के खिलाफ उसका समग्र रिकॉर्ड कमजोर रहा हो।
गॉल में स्पिनरों ने दिखाया दम
सीरीज के पहले टेस्ट मैच की बात करें, तो गॉल में खेला गया यह मुकाबला पूरी तरह से स्पिन गेंदबाजों के नाम रहा था। इस मैच में कुल मिलाकर सभी 40 विकेट गिरे थे, जो अपने आप में इस बात का प्रमाण है कि, पिच बल्लेबाजी के लिए कितनी मुश्किल साबित हुई थी। इन 40 विकेटों में से अकेले 10 विकेट भारतीय स्पिनर मानव सुथार ने अपने नाम किए थे, जो उनके शानदार प्रदर्शन को दर्शाता है।
भारत और श्रीलंका के स्पिन गेंदबाजों ने इस मुकाबले में मिलकर 26 विकेट चटकाए थे, जबकि तेज गेंदबाज केवल 14 बल्लेबाजों को ही आउट कर पाने में सफल रहे। इन आंकड़ों से यह बिल्कुल स्पष्ट हो जाता है कि गॉल की पिच किस हद तक स्पिन गेंदबाजी के अनुकूल थी और तेज गेंदबाजों के लिए वहां बहुत ज्यादा मदद मौजूद नहीं थी।
श्रीलंका अपना सकता है अलग रणनीति?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि, क्या कोलंबो की पिच भी गॉल की तरह ही स्पिनरों का साथ देगी या फिर यहां बल्लेबाजों को कुछ राहत मिलेगी। अगर श्रीलंका एक बार फिर स्पिन-फ्रेंडली पिच तैयार करने का फैसला करता है, तो भारतीय स्पिन आक्रमण के लिए यह एक और सुनहरा मौका साबित हो सकता है।
वहीं दूसरी तरफ अगर श्रीलंका अपनी हालिया सफलताओं को देखते हुए कोई अलग रणनीति अपनाता है, तो मुकाबला और भी दिलचस्प मोड़ ले सकता है। बहरहाल, क्रिकेट प्रेमियों की निगाहें अब पूरी तरह से इस बात पर टिकी हैं कि कोलंबो की पिच आखिरकार किस तरह का रुख अख्तियार करती है और यह दूसरा टेस्ट मैच किस दिशा में करवट लेता है।
इसे भी पढ़ें- गॉल की स्पिन पिच पर भारत का बड़ा दांव, इन तीन दिग्गजों के साथ उतरेगी टीम इंडिया!



