
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी गतिरोध खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। यहां अमेरिका-ईरान युद्ध के दौरान से होर्मुज जलडमरूमध्य में लगातार एक के बाद एक कई जहाजों को निशाना बन। इसी कड़ी में 22 अप्रैल को घटी एक भयावह घटना का सच अब सामने आया है, जिसने पूरे मामले की गंभीरता को उजागर कर दिया है। इस दिन होर्मुज स्ट्रेट में एक मालवाहक जहाज पर हुए हमले ने उस पर सवार क्रू मेंबरों को दहशत में डाल दिया था। सबसे चिंताजनक बात यह है कि, इस जहाज पर सवार 22 क्रू मेंबरों में से 21 भारतीय नागरिक थे, जो इस हमले के दौरान बेहद खतरनाक परिस्थितियों से गुजरे।
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FSUI ने शेयर किया वीडियो
अब इस पूरी घटना का एक वीडियो सामने आया है, जिसने इस हमले की भयावहता को उजागर कर दिया है। ‘फॉरवर्ड सीमेन्स यूनियन ऑफ इंडिया’ (FSUI) नामक संगठन ने इस हमले से जुड़ा वीडियो सार्वजनिक किया है। संगठन ने एक्स पर एक पोस्ट करते हुए स्पष्ट रूप से कहा कि, जहाज पर हमला करने वाले लोग आम समुद्री लुटेरे नहीं थे, बल्कि यह हमला ईरान की ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ (IRGC) के जवानों ने किया था और रॉकेट-प्रोपेल्ड ग्रेनेड (RPG) से जहाज को निशाना बनाया।
यूनियन ने साझा किए वीडियो और तस्वीरें
‘फॉरवर्ड सीमेन्स यूनियन ऑफ इंडिया’ ने एक्स पर कई वीडियो और तस्वीरें साझा की है। साथ ही एक विस्तृत पोस्ट भी लिखी है। इस पोस्ट में यूनियन ने बताया कि 22 अप्रैल को होर्मुज जलडमरूमध्य में 22 क्रू मेंबरों को लेकर जा रहे एक जहाज को निशाना बनाया गया था। इस जहाज पर 21 सदस्य भारतीय नागरिक भी थे। जहाज में सवार सभी क्रू मेंबर्स को इस हमले के दौरान अत्यंत भयावह और जानलेवा परिस्थितियों का सामना करना पड़ा था।

यूनियन ने अपने बयान में यह भी स्पष्ट किया कि, जहाज पर हमला करने वाले लोग समुद्री डकैत नहीं थे, बल्कि यह ईरान की नौसैनिक शक्ति IRGC की एक सुनियोजित कार्रवाई थी। इस खुलासे ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है, क्योंकि इससे यह साफ होता है कि यह हमला किसी संगठित सैन्य बल द्वारा किया गया था, न कि किसी छिटपुट आपराधिक घटना का हिस्सा था।
वीडियो में दिखी दहशत
FSUI द्वारा साझा किए गए वीडियो में जो दृश्य कैद हुए हैं, वे बेहद डराने वाले हैं। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि, कई छोटी नावों ने जहाज को चारों ओर से घेर रखा है। यह टकराव कितना गंभीर था, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि हमलावरों ने जहाज पर सीधे रॉकेट-प्रोपेल्ड ग्रेनेड (RPG) दागा। यूनियन के अनुसार, इस अचानक हुए हमले की वजह से जहाज पर सवार नाविक अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागते। वे जहाज के गलियारों में छिपते नजर आए।
यूनियन ने अपने बयान में कहा कि, यह वीडियो अपने आप में पूरी सच्चाई बयां कर रहा है। इसे किसी अतिरिक्त स्पष्टीकरण की आवश्यकता नहीं है। वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि, उस समय जहाज पर किस कदर डर और खतरे का माहौल बना हुआ था, जब भारतीय नाविक अपनी जान बचाने के लिए संघर्ष कर रहे थे।
FSUI की चेतावनी
इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए FSUI ने एक अहम मुद्दा भी उठाया। संगठन ने कहा कि, केवल सरकारी एडवाइजरी और सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देश जारी करने भर से समुद्र में काम कर रहे नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जा सकती। यूनियन का स्पष्ट कहना है कि, खतरनाक समुद्री क्षेत्रों में जहाजों पर काम कर रहे मासूम नाविकों को वास्तविक सुरक्षा प्रदान करने के लिए वहां नौसैनिक बलों की मजबूत और सक्रिय उपस्थिति होना बेहद आवश्यक है।
On 22 April, in the Strait of Hormuz, a vessel carrying 22 crew members, of whom 21 were Indian, faced a deeply distressing situation.
These were not pirates.
They were naval forces of the IRGC.Videos show several small boats surrounding the vessel, the intensity of the… pic.twitter.com/5UgxtZETSd
— FSUI (@FSUIINDIA) August 20, 2026
यूनियन ने यह भी दावा किया कि, होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों पर ईरान की IRGC से जुड़ी छोटी नावों द्वारा लगातार दबाव बनाया जाता रहा है। संगठन के मुताबिक, वीडियो में यह स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि, किस तरह कई छोटी नावों ने जहाज को घेर लिया, एक रॉकेट ग्रेनेड दागा गया और डरे हुए क्रू मेंबर जहाज के भीतर सुरक्षित स्थान तलाशते हुए छिपने की कोशिश करते नजर आए।
युद्ध के दौरान लगातार निशाना बनते रहे जहाज
यह पूरी घटना अमेरिका और इजरायल की ईरान के खिलाफ शुरू हुई सैन्य कार्रवाई के बाद समुद्री क्षेत्र में हुए तमाम टकरावों की एक झलक भर है। इस दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य समेत आसपास के समुद्री इलाकों में कई बार वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाया गया, जिसमें भारतीय नाविक बार-बार खतरे की जद में आते रहे।

गौरतलब है कि, यह हमला केवल अप्रैल महीने तक ही सीमित नहीं रहा। इसके बाद जून महीने में भी होर्मुज जलडमरूमध्य में एक और गंभीर घटना घटी, जब अमेरिकी सेना की ओर से भारतीय क्रू मेंबरों को लेकर जा रहे एक वाणिज्यिक जहाज पर हमला किया गया। इस हमले में तीन भारतीय नाविकों की जान चली गई थी, जिसने भारत सरकार को गहरे सदमे में डाल दिया।
भारत ने जताई थी नाराजगी
जून में हुई इस दुखद घटना के बाद भारत सरकार ने अमेरिका के समक्ष कड़ी नाराजगी दर्ज कराई थी। भारत ने वाशिंगटन प्रशासन से स्पष्ट रूप से यह मांग की थी कि समुद्री क्षेत्रों में भारतीय नाविकों को ले जा रहे जहाजों पर इस तरह के हमले तत्काल प्रभाव से रोके जाएं। इतना ही नहीं, इस पूरे प्रकरण को लेकर भारत सरकार ने एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी को भी तलब किया था, ताकि इस गंभीर मुद्दे पर स्पष्टीकरण मांगा जा सके।
यह पूरा घटनाक्रम इस बात को रेखांकित करता है कि, युद्धग्रस्त क्षेत्रों से होकर गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों पर काम कर रहे भारतीय नाविकों की सुरक्षा एक गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है। बार-बार हो रहे इन हमलों के बाद अब यह सवाल और गहरा होता जा रहा है कि आखिर अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर भारतीय नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस और स्थायी कदम कब उठाए जाएंगे।
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