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वैज्ञानिकों का बड़ा दावा: अब एक इंजेक्शन से कंट्रोल होगा हाई कोलेस्ट्रॉल

दुनियाभर में हार्ट अटैक और स्ट्रोक जैसी जानलेवा बीमारियों की सबसे बड़ी वजह हाई कोलेस्ट्रॉल होती है। अब लंदन के मेडिकल रिसर्चर्स ने इसके इलाज में बड़ी कामयाबी हासिल करने का दावा किया है। शुरुआती दौर के एक क्लिनिकल ट्रायल में पता चला है कि, एक नई एक्सपेरिमेंटल जीन थेरेपी की महज़ एक खुराक ‘बैड कोलेस्ट्रॉल’ यानी LDL के स्तर को 62 प्रतिशत तक घटा सकती है और  इसका असर पूरे एक साल तक बना रहा। अगर आगे के बड़े अध्ययनों में भी ऐसे ही सकारात्मक नतीजे सामने आये, तो मरीज़ों को उम्रभर रोज़ाना दवा खाने से छुटकारा मिल जाएगा।

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क्या है VERVE-102

इस नई थेरेपी को VERVE-102 नाम दिया गया है। यह इलाज पारंपरिक गोलियों की तरह नहीं, बल्कि एक बार IV ड्रिप के ज़रिए नस के रास्ते शरीर में पहुंचाया जाता है। इसका तरीका बाकी दवाओं से बिल्कुल अलग है। यह शरीर में कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करने वाले एक खास जीन में स्थायी बदलाव करता है, जिससे लंबे समय तक इसका असर बना रहता है। राहत की बात यह है कि, ट्रायल के दौरान रिसर्चर्स को सुरक्षा से जुड़ी कोई गंभीर दिक्कत सामने नहीं आई। इस अध्ययन के नतीजे मशहूर मेडिकल जर्नल ‘द न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ़ मेडिसिन’ में प्रकाशित हुए हैं।

VERVE-102

गौरतलब है कि, खून में LDL कोलेस्ट्रॉल की मात्रा घटने से धमनियों की दीवारों पर फैटी प्लाक जमा होने की प्रक्रिया धीमी पड़ती है, जिससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है। हालांकि, स्टेटिन जैसी मौजूदा दवाओं से भी कोलेस्ट्रॉल में इसी तरह की कमी लाई जा सकती है, लेकिन उनका असली फायदा तभी मिलता है जब मरीज़ इन्हें बिना नागा किए रोज़ लेता रहे। अगर बड़े स्तर के अध्ययनों में VERVE-102 सुरक्षित और असरदार साबित होती है, तो एक बार का इलाज दिल की बीमारियों से लंबे समय तक बचाव का ज़रिया बन सकता है।

वैज्ञानिक बोले- नतीजे उत्साहजनक

इस ट्रायल के लोकल लीड्स में शामिल यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन (UCL) के क्लिनिकल एकेडमिक और बार्ट्स हेल्थ तथा UCL हॉस्पिटल्स (UCLH) में कंसल्टेंट कार्डियोलॉजिस्ट प्रोफ़ेसर रियाज़ पटेल ने इन नतीजों को शुरुआती लेकिन बेहद उत्साहजनक बताया है। उनके मुताबिक, भले ही यह अध्ययन अभी प्रारंभिक चरण में है, पर इससे यह साबित होता है कि यह टेक्नोलॉजी न सिर्फ काम करती है बल्कि सुरक्षित तरीके से कोलेस्ट्रॉल घटाने में भी कारगर है।

यह मुद्दा इतना अहम क्यों है

बढ़ा हुआ LDL कोलेस्ट्रॉल हार्ट अटैक और स्ट्रोक के सबसे बड़े जोखिम कारकों में गिना जाता है, और इसकी वजह से ब्रिटेन तथा अमेरिका में हर साल लाखों लोगों की जान जाती है। डॉक्टरों के मुताबिक स्टेटिन दवाओं से इस खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। यही वजह है कि इस वक्त ब्रिटेन में 70 लाख से ज़्यादा और अमेरिका में 4 करोड़ से अधिक लोग ये दवाएं ले रहे हैं, लेकिन दिक्कत यह है कि, इनका फायदा तभी मिलता है जब लोग इन्हें लगातार, बिना रुके लेते रहें।

भारत में भी यह समस्या कम गंभीर नहीं है। देश में हर साल करीब 28 से 30 लाख लोगों की मौत हृदय रोगों, खासकर हार्ट अटैक, की वजह से होती है, जबकि स्ट्रोक से हर साल लगभग 7 से 8 लाख लोग अपनी जान गंवाते हैं। यानी हार्ट अटैक और स्ट्रोक को मिलाकर भारत में हर साल तकरीबन 35 से 40 लाख मौतें सिर्फ इन दो कारणों से होती हैं, जो देश में होने वाली कुल मौतों का करीब 28 से 30 प्रतिशत हिस्सा है।

रिसर्च में यह भी सामने आया है कि, लगभग आधे मरीज़ कोलेस्ट्रॉल की दवा शुरू करने के एक साल के भीतर ही उसे लेना बंद कर देते हैं। इसकी बड़ी वजहें हैं रोज़ाना गोली लेने की झंझट या फिर दवा के साइड इफेक्ट्स। इनमें मांसपेशियों में दर्द की शिकायत सबसे आम है, जबकि कुछ मरीज़ों को इससे भी ज़्यादा गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ता है। यही वजह है कि वैज्ञानिक VERVE-102 जैसी थेरेपी को लेकर इतने उत्साहित हैं। अगर एक ही खुराक से कोलेस्ट्रॉल लंबे समय तक काबू में रह सकता है, तो मरीज़ों की उम्रभर दवा खाने की मजबूरी पूरी तरह खत्म हो सकती है।

ट्रायल में क्या हुआ

UCL और UCLH के रिसर्चर्स द्वारा किए गए इस अध्ययन में कुल 35 वयस्क मरीज़ शामिल किए गए। इनमें से कुछ मरीज़ ‘हेटरोज़ायगस फैमिलियल हाइपरकोलेस्ट्रोलेमिया’ नाम की वंशानुगत बीमारी से जूझ रहे थे, जिसमें कोलेस्ट्रॉल स्वाभाविक रूप से बहुत ज़्यादा रहता है, जबकि कुछ मरीज़ों को कम उम्र में ही कोरोनरी आर्टरी डिज़ीज़ यानी दिल की बीमारी हो चुकी थी। हर मरीज़ को शरीर के वज़न के हिसाब से अलग-अलग खुराक दी गई, 0.3 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम से लेकर 1.0 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम तक। इसमें इस्तेमाल हुआ RNA शरीर के भीतर एक जेनेटिक मैसेंजर की तरह काम करता है।

VERVE-102

नतीजों के मुताबिक, सबसे ज़्यादा खुराक दिए जाने पर LDL कोलेस्ट्रॉल में 62 प्रतिशत तक की कमी देखी गई, जबकि सबसे कम खुराक (0.3 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम) पर यह कमी सिर्फ 9 प्रतिशत रही। जिन मरीज़ों की सबसे लंबे समय तक निगरानी की गई, उनमें कोलेस्ट्रॉल का स्तर लगातार कम बना रहा।

शरीर में कैसे करता है काम

VERVE-102 को एक बार ड्रिप के ज़रिए नस में दिया जाता है और यह घुमावदार तरीके से LDL कोलेस्ट्रॉल को कम करता है। दरअसल यह उस जीन को निष्क्रिय कर देता है जो लिवर को PCSK9 नाम का प्रोटीन बनाने के लिए उकसाता है। यह प्रोटीन सामान्य रूप से शरीर को खून में मौजूद LDL कोलेस्ट्रॉल साफ़ करने से रोकता है। जब यह जीन बंद हो जाता है, तो शरीर पहले के मुकाबले कहीं ज़्यादा LDL कोलेस्ट्रॉल हटा पाता है।

दिलचस्प बात यह है कि यह तरीका प्रकृति की ही एक खासियत की नकल करता है। कुछ लोग जन्म से ही ऐसे जीन के साथ पैदा होते हैं जो पहले से बंद रहता है, जिसकी वजह से उनका कोलेस्ट्रॉल जीवनभर बेहद कम रहता है और उन्हें दिल की बीमारी का खतरा भी काफी कम होता है। इस थेरेपी का मकसद यही सुरक्षा कवच उन लोगों को भी देना है जिन्हें हार्ट अटैक और स्ट्रोक का ज़्यादा खतरा है।

कितना सुरक्षित है यह इलाज

हालांकि इसे ‘जीन थेरेपी’ कहा जा रहा है, लेकिन यह किसी व्यक्ति के पूरे DNA में बदलाव नहीं करती। यह सिर्फ लिवर की कोशिकाओं के भीतर एक खास जीन को निशाना बनाती है, और इसका असर मरीज़ के शरीर की उन्हीं कोशिकाओं तक सीमित रहता है।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसका असर स्पर्म या एग में मौजूद जीन्स पर नहीं पड़ता, इसलिए यह बदलाव किसी व्यक्ति की अगली पीढ़ी यानी उसके बच्चों में नहीं जा सकता। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि इसकी दीर्घकालिक सुरक्षा को लेकर अभी और अध्ययन किए जाने बाकी हैं। फिलहाल वैज्ञानिक समुदाय इसे कोलेस्ट्रॉल के इलाज की दिशा में एक बड़ी और उम्मीद जगाने वाली शुरुआत के तौर पर देख रहा है।

 

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